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गांव की पगडंडियों से टोक्यो के ट्रैक तक पहुंचे कुलदीप यादव, एशियन गेम्स में होगी मेडल की उम्मीद

Published: Wed, 09 Sep 2026 05:00 AM (IST)

प्रयागराज के अलावलपुर गांव के कुलदीप यादव ने 5.45 मीटर की छलांग लगाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है और अब वह ...और पढ़ें

कुलदीप यादव

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अमरीश मनीष शुक्ल, जागरण, प्रयागराज। हौसलों में अगर जान हो, तो गांव की कच्ची पगडंडियां भी अंतरराष्ट्रीय फलक का रास्ता बन जाती हैं। संगम नगरी के मऊआइमा स्थित छोटे से गांव अलावलपुर के एक साधारण परिवार के बेटे ने इस बात को सच कर दिखाया है।

5.45 मीटर की ऐतिहासिक छलांग लगाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले 21 वर्षीय युवा पोल वाल्टर कुलदीप यादव (कुमार) अब जापान में होने वाले एशियन गेम्स में भारतीय दल की तरफ से हुंकार भरेंगे। एथलेटिक्स फेडरेशन द्वारा घोषित 77 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम में जगह पाकर कुलदीप ने न केवल अपने गांव, बल्कि समूचे उत्तर प्रदेश का मान पूरे एशिया में बढ़ा दिया है।

कुलदीप यादव के लिए आसान नहीं थी राह

कुलदीप की यह उड़ान रातों-रात तय नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे सालों का कड़ा पसीना और अटूट अनुशासन है। हाल ही में कुलदीप और देव मीणा दोनों ने 5.45 मीटर की हैरतअंगेज छलांग लगाकर संयुक्त रूप से नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। इस शानदार प्रदर्शन के बूते उन्होंने एशियन गेम्स का कठिन क्वालिफिकेशन मानक तो पार किया ही, साथ ही 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के तय 5.25 मीटर के मानक को भी काफी पीछे छोड़ दिया।

इससे पूर्व, मई माह में भुवनेश्वर में आयोजित प्रथम इंडियन इंडोर ओपन प्रतियोगिता में भी कुलदीप ने 5.41 मीटर कूदकर देव मीणा के 5.40 मीटर के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त किया था। वर्तमान में दोनों ही खिलाड़ी मध्य प्रदेश की डीएसडब्ल्यूवाई अकादमी में कोच घनश्याम यादव के कुशल मार्गदर्शन में एक साथ अभ्यास कर रहे हैं, ताकि देश में पोल वाल्ट के स्तर को और ऊंचा उठा सकें।

कुलदीप का परिवार आर्थिक रूप से था कमजोर

अलावलपुर गांव में किसान सुरेश यादव और मां सुषमा देवी के घर जन्मे कुलदीप की जड़ें जमीन से जुड़ी हैं। पिता दूध बेचकर परिवार का जीविकोपार्जन चलाते हैं और मां कुशल गृहिणी हैं। आर्थिक तंगहाली और सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे के सपनों के आड़े कभी कोई बाधा नहीं आने दी।

प्रारंभिक दिनों में प्रयागराज के मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में कई वर्षों तक पसीना बहाने वाले कुलदीप की प्रतिभा को देखकर ओएनजीसी ने उन्हें स्कॉलरशिप दी थी। पूर्व में उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) बेंगलुरु में कोच विजीस एम. के सानिध्य में भी अपनी तकनीक को निखारा।

कुलदीप चयन के बाद हुए भावुक

चयन की खबर मिलते ही कुलदीप ने भावुक होते हुए कहा, "भारतीय जर्सी पहनना हर एथलीट की जिंदगी का सबसे बड़ा फख्र होता है। बचपन से एशियाई खेलों में देश के लिए पदक जीतने का जो ख्वाब देखा था, उसे पूरा करने की घड़ी आ गई है। जापान के मैदान पर मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दूंगा।"

पोल टूटा, पर नहीं टूटा हौसला

कुलदीप के जज्बे की मिसाल ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी देखने को मिली थी। प्रतियोगिता के ट्रायल प्रयास के दौरान अचानक उनका पोल टूट गया, जिससे गंभीर चोट लगने का खतरा था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 5.10 मीटर की शानदार छलांग लगाकर नया मीट रिकॉर्ड स्थापित करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। मऊआइमा से निकली यह ऊंची छलांग अब जापान के पोडियम पर स्वर्ण पदक में बदलने को आतुर है।

रिकॉर्ड तोड़ने की बन चुकी है आदत

जूनियर सर्किट में कुलदीप का दबदबा ऐसा रहा है कि उन्होंने पांच बार खुद अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। 17वीं यूथ नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पोल वाल्ट में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने कुवैत में आयोजित एशियन यूथ चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया था, जहां उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। इसके अलावा साउथ कोरिया इंटरनेशनल इनविटेशन मीट में देश के लिए रजत पदक और लखनऊ में आयोजित नेशनल जूनियर फेडरेशन कपमें भी स्वर्ण पदक जीता।

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