रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने की पहल में जुटा भारत, कीव पहुंचे जयशंकर ने जेलेंस्की से की मुलाकात
भारत रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक पहल कर रहा है, जिसमें पीएम मोदी की पुतिन से मुलाकात और विदेश मंत्री जयशंकर की कीव यात्रा शामिल है।
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जयशंकर ने कीव में जेलेंस्की और सिबिहा से मुलाकात की

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। एक तरफ जहां यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध नए सिरे से भड़क रहा है और पिछले साढ़े चार वर्षों से चल रहे इस युद्ध को समाप्त करने की वैश्विक स्तर पर कोई कोशिश भी नहीं हो रही है, तब भारत कूटनीतिक पहल करने के लिए आगे आया है।
पिछले सप्ताह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी ने अंतहीन युद्ध का अंत करने की बात कही थी।
गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में पहले विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ विस्तार से बात की और उसके बाद राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की।
इन दोनों के साथ बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषका व इसे समाप्त करने के मुद्दे ही प्रमुख रहे। वैसे इसके अलावा द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कुछ अन्य आयामों, राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत यात्रा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर की सिबिहा के साथ अहम बैठक
कीव में जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए भारत अगर किसी तरह की मदद कर सकता है, तो इसके लिए तैयार है।
विदेश मंत्री सिबिहा के साथ हुई बैठक में यह हमारी चर्चा का सबसे अहम पक्ष रहा। हमने इससे जुड़े कुछ अन्य विशेष मुद्दों पर भी बात की है। जैसे काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले का मुद्दा।
दुर्भाग्य से जो हमले हुए हैं, उनमें वाणिज्यिक जहाजों पर काम करने वाले भारतीय भी हताहत हुए हैं। जहाजों पर हो रहे हमलों से कई विकासशील व कम विकसित देशों पर काफी असर पड़ रहा है।
इससे ईंधन, उर्वरकों और खाद्यान्न की कमी महसूस की जा रही है। इस बारे में भी हमारे बीच चर्चा हुई है। सनद रहे कि इसी सप्ताह काला सागर में एक जहाज पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक मारा गया है, जबकि एक अन्य भारतीय के घायल होने की सूचना है।
रूस-यूक्रेन जंग में भारत बना शांति सेतु
कूटनीतिक गलियारों में जयशंकर की कीव यात्रा को रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने को लेकर भारत की तरफ से तीन चरणों में की गई कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पहले चरण में जयशंकर ने रूस की 24 अगस्त को यात्रा की थी। इसके बाद बिश्केक में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच वार्ता हुई।
तीसरे चरण में जयशंकर की कीव यात्रा है। अभी यह साफ नहीं है कि भारत की कोशिशों का कोई असर हुआ है या नहीं। लेकिन, रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त कराने की यह वर्तमान में एकमात्र वैश्विक कोशिश है।
पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से अमेरिका का पूरा ध्यान उसी तरफ है। यूरोपीय देश भी साढ़े चार वर्षों की युद्ध की मार से पस्त हैं और उनकी तरफ से कोई नई कोशिश होती नहीं दिख रही है।
ऐसे में भारत ही एकमात्र देश है जिसका रूस व यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच भी लगातार बैठकें हुई हैं। उनकी अंतिम मुलाकात जून, 2026 में जी-सात बैठक से इतर हुई थी।
किन-किन मुद्दों पर हुई बात?
भारत की कोशिश का संकेत जयशंकर-सिबिहा मुलाकात के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान से चलता है। इसमें कहा गया है-दोनों मंत्रियों ने अलग से शांति प्रक्रिया और युद्ध को समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भारत की अधिक सक्रिय भागीदारी की संभावनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पुतिन की उपस्थिति में कहा था, अब अंतहीन युद्ध को समाप्त करने का समय आ गया है। हम इस स्थिति का समर्थन करते हैं। यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए तैयार है और हमारे पास यथार्थवादी प्रस्ताव हैं। अब कूटनीति की ओर बढ़ने का समय है।
जयशंकर से मिलने के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा-हम इस अन्यायपूर्ण युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता के प्रति आभारी हैं। यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं होना चाहिए। शांति की आवश्यकता है। यह भारत की स्पष्ट स्थिति है।
आज जब मंत्री यहां कीव में हमारे साथ थे, तो रूस ने एक बार फिर जेट-संचालित 'शाहेद' ड्रोन दागा, जिन्हें ईरान की मदद के बिना विकसित नहीं किया गया।
हमारे लड़ाकू विमानों की बदौलत प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा, क्योंकि यूक्रेनी लड़ाकू विमान ही इनमें से अधिकांश ड्रोनों को मार गिराते हैं। हमें उम्मीद है कि दुनिया की अन्य बड़ी शक्तियां भी यह स्पष्ट रुख अपनाएंगी कि यह युद्ध समाप्त होना चाहिए और एक विश्वसनीय शांति स्थापित होनी चाहिए।
पुतिन ने शांति समझौते की संभावना जताई
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते तक पहुंचने की संभावना है, जबकि यूक्रेन ने शांति प्रयासों में नई पहल की उम्मीद जताई।
रूस के सुदूर पूर्व में एक आर्थिक फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि अमेरिका और चीन सहित कई देश शांति समझौते का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
हालांकि, इस समस्या का अंतत: समाधान संघर्ष में शामिल देशों-रूस और यूक्रेन को ही करना होगा। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि हम उन सभी लोगों के आभारी हैं, जो किसी समझौते तक पहुंचने में योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं। क्या इसकी कोई संभावना है? मेरी नजर में हां, है।
दूसरी तरफ यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कीव में पत्रकारों से कहा कि मेरा मानना है कि अब शांति प्रयासों में एक नई गति आएगी, क्योंकि दुनिया भर की कई राजधानियों में राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत का सक्रिय दौर फिर से शुरू हो रहा है।
उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी और पत्रकारों से कहा कि वे खबरों पर नजर रखें। हालांकि, न तो पुतिन और न ही सिबिहा ने प्रगति की उम्मीद करने के लिए कोई खास वजह बताई।
इसके उलट रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन की हालिया कार्रवाइयों से अवरोध उत्पन्न हुआ है। आम नागरिकों के व्यापारिक जहाजों पर यूक्रेनी हमले और नागरिक विमानों पर हमलों की धमकी राज्य प्रायोजित आतंकवाद है। इससे शांति वार्ता की संभावनाओं में मुश्किलें आती हैं।
