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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 08, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दो साल में सब के पास होगा बैंक खाता, 15 मिनट की पैदल दूरी पर होगा बैंक

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Updated: Wed, 08 Jan 2014 12:39 PM (IST)

अगर रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की नई समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया तो फिर अगले दो वर्षो के भीतर देश के हर नागरिक के पास अपना बैंक खाता होगा। इतन ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अगर रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की नई समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया तो फिर अगले दो वर्षो के भीतर देश के हर नागरिक के पास अपना बैंक खाता होगा। इतना ही नहीं, गरीब जनता के लिए बैंक आकर्षक रिटर्न वाली जमा योजनाएं और बीमा पॉलिसियां भी लांच कर पाएंगे।

देश के हर नागरिक को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने पर सुझाव देने के लिए गठित नचिकेत मोर समिति ने अपनी रिपोर्ट आरबीआइ को सौंप दी। देश के कोने-कोने में बैंक खोलने व लोगों को वित्तीय उत्पाद पहुंचाने पर यह रिपोर्ट मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव के पक्ष में है।

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रिपोर्ट की पहली सिफारिश है कि सरकार को एक जनवरी, 2016 तक देश के हर नागरिक को बैंक खाता नंबर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखना चाहिए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समिति ने कई सुझाव दिए हैं। मसलन, गरीबों व छोटे उद्यमियों के लिए खास तौर पर एक बैंक स्थापित किया जाए। इस बैंक की लागत कैसे कम रखी जाएगी और कैसे यह कम संसाधन में बेहतर परिणाम दे सकता है, इस बारे में भी समिति ने विस्तार से सुझाव रखे हैं।

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इसमें बताया गया है कि गरीबों को बारिश, पशु, जीवन, अन्न सहित तमाम कई तरह के बीमा पॉलिसियों को बहुत ही कम प्रीमियम पर देने की व्यवस्था कैसे की जा सकती है। मध्यवर्ग के लिए इसमें कहा गया है कि बैंकों को एक ऐसी जमा योजना चलानी चाहिए जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से ज्यादा का रिटर्न सुनिश्चित करे।

मौजूदा दर के हिसाब से यह दर 10.50 फीसद से ज्यादा होती है, जिसे काफी आकर्षक माना जा सकता है। नचिकेत की अध्यक्षता में गठित इस समिति का गठन आरबीआइ गवर्नर का पद संभालने के दिन ही रघुराम राजन ने किया था। हर नागरिक को वित्तीय सेवा से जोड़ना उनकी प्रमुख प्राथमिकता है।

मोर समिति की सिफारिशें

- एक जनवरी, 2016 तक हर वयस्क का हो बैंक अकाउंट

- किसी भी हिस्से से सिर्फ 15 मिनट की पैदल दूरी पर हो बैंक शाखा - उपभोक्ता मूल्य आधारित महंगाई दर से ज्यादा मिले जमा पर ब्याज

- हर गरीब को उसकी सुविधा से कर्ज देने की हो व्यवस्था

- गरीब परिवार को काफी कम प्रीमियम पर हर तरह का बीमा मुहैया हो

- आधार नंबर के साथ ही बैंक खाता नंबर देने की हो व्यवस्था

- एनबीएफसी को बैंकों के एजेंट के रूप में काम करने की अनुमति मिले

- गरीबों व छोटे उद्यमियों को कर्ज के लिए खोले जाए नए पेमेंट बैंक

- सस्ती सेवा देने के लिए बैंकों को किया जाएगा नए सिरे से तैयार

- बैंकों की सेवा देने वाले एमएफआइ, एनजीओ की निगरानी के लिए राज्य गठित करें आयोग

- बैंको की एनपीए सूचनाओं को किया जाए सार्वजनिक

- कर्ज माफी के बजाय सीधे किसानों को मिले वित्तीय मदद