लड़ाई के बाद पार्टनर से थोड़ी दूरी है जरूरी, पर इसे टॉक्सिक साइलेंट ट्रीटमेंट न बनने दें, समझें दोनों का फर्क
कई बार लोग पर्सनल स्पेस और साइलेंट ट्रीटमेंट के बीच फर्क समझ नहीं पाते हैं। ...और पढ़ें

पर्सनल स्पेस और साइलेंट ट्रीटमेंट के बीच फर्क (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या भी पार्टनर के साथ ऐसा झगड़ा या बहस हुई है, जिसके बाद दिल इतना दुखा ही कि सब कुछ खत्म करने का मन करने लगे? तो जान लें कि ऐसा सबके साथ होता है। ये वो समय होता है जब कपल को एक दूसरे से स्पेस की जरूरत होती है। लेकिन इसके बीच में भी एक लाइन है जिसे समझना जरूरी है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं साइलेंट ट्रीटमेंट की, क्योंकि कई बार लोग पर्सनल स्पेस और साइलेंट ट्रीटमेंट के बीच फर्क समझ नहीं पाते हैं।
पर्सनल स्पेस कब हेल्दी है?
पार्टनर से बहस या झगड़े के बाद अपने इमोशन को रेगुलेट करने, उसपर अच्छे से सोच-विचार करने और बातचीत में अपनी राय रखने के लिए समय मिल जाता है। इसे ही हेल्दी स्पेस कहते है, और जब इसे हेल्दी कम्यूनिकेशन के साथ संभाला जाता है तो इसके बाद रिश्ता पहले से ज्यादा मजबूत बनता है।
झगड़े के बाद साइलेंट ट्रीटमेंट
कपल के झगड़े के बाद जब एक पार्टनर पूरी तरह से चुप हो जाता है तो उसे साइलेंट ट्रीटमेंट कहा जाता है। ऐसा सिचुएशन को शांत करने के लिए नहीं बल्कि कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। साइलेंट ट्रीटमेंट जानबूझकर दिया जाता है ताकि पार्टनर को सजा दी जा सके, जिम्मेदारी से बचा जा सके और सामने वाले को सोचने पर मजबूर किया जा सके कि कहीं वह ही तो गलत नहीं। इसे इमोशनल अब्यूज की केटेगरी में शामिल किया गया है।
पर्सनल स्पेस और साइलेंट ट्रीटमेंट के बीच फर्क कैसे करें?
पर्सनल स्पेस थोड़े समय के लिए होता है और इसके बाद व्यक्ति बेहतर तरीके से अपनी बात रखकर स्थिति ठीक करने की कोशिश करता है। जबकि साइलेंट ट्रीटमेंट में बातचीत कभी भी क्लियर नहीं होती, इसमें व्यक्ति नेगेटिव महसूस करता है और पार्टनर को लगता है कि उसे सजा दी जा रही है। साथ ही, साइलेंट ट्रीटमेंट की कोई टाइम लिमिट भी नहीं होती।
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हेल्दी रिलेशनशिप के लिए टिप्स
जब भी किसी झगड़े के बाद आपका दूर होने का मन हो तो उसे पार्टनर के सामने सच्चाई से रखें और थोड़े टाइम का स्पेस लें।
पर्सनल स्पेस लेते समय टाइम लिमिट भी बताएं ताकि नेगेटिव इमोशन से बचा जा सके।
अपने रिश्ते को लेकर साफ करें कि आपको रिश्ते की परवाह है।
वहीं, अगर आपको साइलेंट ट्रीटमेंट दिया जा रहा है तो सामने से अपने सवाल पूछ लें।
यह बात साफ करना जरूरी है कि आप बात करने के तैयार हैं लेकिन अनदेखे किये जाने की स्थिति में दूर रहना पसंद करेंगे।