रिश्ता नहीं चले तो अलग होने का रास्ता है, फिर पार्टनर की जान लेने तक कैसे पहुंच जाती है बात?
प्यार, तकरार और फिर... कत्ल! जब कोई रिश्ता नहीं चलता, तो सबसे सीधा और समझदारी भरा रास्ता होता है- अलग हो जाना। मगर आजकल बात हत्या तक क्यों पहुंच रही ह ...और पढ़ें

पार्टनर का खून करने की नौबत क्यों आ रही है? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर कोई रिश्ता सही नहीं चल रहा है, तो उससे अलग होने का सीधा रास्ता मौजूद होता है, लेकिन आजकल तलाक या ब्रेकअप के बजाय बात सीधे मर्डर तक क्यों पहुंच रही है?
हाल ही में आए कुछ रोंगटे खड़े कर देने वाले मामलों ने सबको झकझोर कर रख दिया है। केतन मर्डर केस हो, राजा रघुवंशी हत्याकांड, सौरभ राजपूत का मामला या फिर महालक्ष्मी मर्डर केस- इन सभी में एक ही सवाल खड़ा होता है कि आखिर पार्टनर की जान लेने की नौबत क्यों आ रही है?
कैलाश दीपक अस्पताल की कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. मेघा अग्रवाल ने इस खतरनाक मानसिकता के पीछे की वजहें बताई हैं। उन्होंने समझाया है कि आखिर लोग अलग होने का विकल्प चुनने के बजाय इतना खौफनाक कदम क्यों उठा लेते हैं।

(Image Source: AI-Generated)
सामाजिक रुतबा और परिवार का भारी दबाव
डॉ. मेघा के मुताबिक, इसके पीछे कई अहम कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक बड़ा कारण 'सोशल स्टेटस' यानी सामाजिक रुतबा है। कई बार दो परिवारों के बीच सामाजिक हैसियत का बड़ा अंतर होता है। ऐसे में, अगर कोई महिला ऐसे रिश्ते में है जिसे उसका परिवार पसंद नहीं करता, तो सामाजिक भिन्नता के कारण परिवार वाले उस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं कर पाते।
नतीजतन, महिला पर परिवार का जबरदस्त मानसिक दबाव पड़ता है। यह समाज में लंबे समय से होता आ रहा है और आज भी कई महिलाएं इस तरह के भारी दबाव के बीच जी रही हैं।
अपने ही रिश्ते के लिए 'स्टैंड' न ले पाना
जब परिवार वाले किसी रिश्ते के सख्त खिलाफ होते हैं, तो व्यक्ति को अपने लिए और अपने पार्टनर के लिए एक मजबूत स्टैंड लेना पड़ता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हर कोई ऐसा करने में सक्षम नहीं होता। परिवार के सामने अपनी बात न रख पाना एक बहुत बड़ा कारण बन जाता है जो हालात को बद से बदतर कर देता है।
गुस्सा, चिड़चिड़ापन और खौफनाक कदम
जब लोग स्टैंड नहीं ले पाते, तो वे अंदर ही अंदर बुरी तरह आहत होते रहते हैं और घुटने लगते हैं। इस घुटन की वजह से उनके भीतर भयंकर गुस्सा पनपता है, चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है और उनके मूड में काफी उतार-चढ़ाव आने लगते हैं। जब वे इन हालातों से तालमेल नहीं बिठा पाते या उन्हें स्वीकार नहीं कर पाते, तो ये नकारात्मक भावनाएं उन पर इस कदर हावी हो जाती हैं कि वे मर्डर जैसा खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर महसूस करने लगते हैं।
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इंसान का अपना स्वभाव भी है जिम्मेदार
इस पूरी मानसिकता में इंसान की पर्सनैलिटी यानी उसके स्वभाव की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। डॉ. मेघा बताती हैं कि कुछ लोग स्वभाव से थोड़े जिद्दी और अड़ियल होते हैं। वे साफ तौर पर अपने परिवार से कह देते हैं कि उन्हें अपना रिश्ता आगे बढ़ाना है और वे अपने फैसले पर मजबूती से डटे रहते हैं।
वहीं, दूसरी तरफ कुछ लोग इस तरह का कड़ा स्टैंड नहीं ले पाते। परिवार और समाज के अलग-अलग तरह के दबावों के कारण वे खुद को पूरी तरह फंसा हुआ महसूस करते हैं, और यही भारी दबाव उन्हें इस तरह की खौफनाक वारदातों को अंजाम देने की ओर धकेल देता है।