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अपनी वीरता से इस रानी ने किया था दिल्ली के सुल्तान का घमंड चकनाचूर, शीशे में एक झलक देखकर हो गया था दीवाना

Published: Sun, 30 Aug 2026 06:47 PM (IST)

चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती अपने रूप और बुद्धिमानी के लिए जानी जाती थीं। अपने सतीत्व को बचाने के लिए उन्होंने हजारों महिलाओं के साथ महल में जौहर किया था।

रानी पद्मावती की वीरता की कहानी (Picture Courtesy: Instagram)

रानी पद्मावती की वीरता की कहानी (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पद्मावत फिल्म का गाना घनी घनी खम्मा आपने सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गाने में कहा क्या जा रहा है? इस गाने में रानी पद्मावती, जिन्हें रानी पद्मिनी भी कहा जाता है, की बात हो रही है। उनके घाघरे और पायल के जरिए उनकी राजसी शान को बयां किया गया है, तो उन्हें क्षत्राणी कहकर उनकी बहादुरी के बारे में बताया गया है। 

रानी पद्मावती ने अपने सतीत्व को बचाने के लिए हजारों राजपूती महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था और उनकी इसकी वीरता के लिए उन्हें जाना जाता है। आइए आज रानी पद्मावती के जीवन की कहानी जानते हैं। 

पद्मावत कहती है कहानी

रानी पद्मावती की कहानी 16वीं सदी के सूफी कवि मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत में मिलती है। इसमें रानी पद्मावती के बारे में बताया गया है, जिनके रूप देखकर दिल्ली का सुल्तान दीवाना हो गया था और जिन्होंने अपनी बहादुरी से उस सुल्तान को धूल चटा दी थी। 

श्रीलंका की राजकुमारी बनी चित्तौड़गढ़ की रानी

पद्मावत के अनुसार, रानी पद्मावती सिंहल द्वीप, जो आज का श्रीलंका है, की बेहद खूबसूरत राजकुमारी थी। वे जितनी खूबसूरत थीं, उतनी ही बुद्धिमान भी थीं। चित्तौड़गढ़ के राजा रावल रतन सिंह ने जब उनकी सुंदरता और बुद्धिमानी के बारे में सुना, तो वे खुद सिंहल गए और बहुत मुश्किल परीक्षाओं को पार करके राजकुमारी पद्मावती से विवाह किया। शादी के बाद पद्मावती चित्तौड़ की महारानी बनीं। पूरे महल और प्रजा में रानी का खूब सम्मान था। 

दिल्ली तक होने लगी रूप की चर्चा

चित्तौड़ की इस नई रानी के रूप की चर्चा दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन के कानों तक पहुंची, तो खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर हमला कर दिया। कई महीनों तक घेराबंदी के बाद, जब वह सीधे युद्ध में नहीं जीत सका, तो उसने संधि के बहाने राजा रतन सिंह से रानी के केवल एक झलक देखने की मांग की। 

शीशे में देखी रानी की झलक

राजपूती मर्यादा के अनुसार, रानी किसी गैर पुरुष के सामने यूं ही नहीं जा सकती थीं। इसलिए एक शीशे के जरिए खिलजी को रानी की परछाई दिखाई गई। जब खिजली ने रानी पद्मावती को देखा, तो वो उनके रूप का दीवाना हो गया और उसने जबरदस्ती राजा रतन सिंह को बंदी बना लिया और दिल्ली ले गया। 

रानी की बुद्धिमता ने बचाई राजा की जान

इसके जवाब में रानी पद्मावती ने अपनी बुद्धिमानी दिखाई और अपने वीर सेनापतियों को की मदद से एक रणनीति बनाई और खिलजी की चुंगल से राजा रतन सिंह को मुक्त करवाकर वापस चित्तौड़गढ़ ले आईं।

चित्तौड़गढ़ का ऐतिहासिक जौहर

रतन सिंह के लौटने के बाद खिलजी ने गुस्से में आकर चित्तौड़गढ़ पर हमला कर दिया और युद्ध में राजा रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। जब राजपूती सेना की पराजय दिखने लगी, तो अपने सतीत्व को बचाने के लिए रानी पद्मावती ने जौहर करने का फैसला लिया और महल में हजारों महिलाओं के साथ उन्होंने एक बड़े अग्निकुंड में जौहर कर लिया। 

जब खिलजी किले के अंदर पहुंचा, तो उसे वहां सिर्फ राख का ढेर मिला। रानी पद्मावती ने उसे अपनी परछाई भी नहीं छूने दी। अपने इस महान बलिदान के कारण वो इतिहास में अमर हो गईं और आज भी उन्हें बहादुरी और स्वाभिमान की मिसाल माना जाता है।