14वीं सदी में अमीर खुसरो ने वसंत पंचमी पर लिखी थी ये कविता, संजय लीला भंसाली की हीरामंडी का बना मशहूर गाना
हीरामंडी का मशहूर गाना 'सकल बन' सूफी संत अमीर खुसरो की 700 साल पुरानी कविता पर आधारित है।
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गुरु को खुश करने के लिए मनाई वसंत पंचमी (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी हीरामंडी का सकल बन गाना आपने जरूर सुना होगा। इसे लोगों ने काफी पसंद भी किया था, लेकिन क्या आपने गौर किया है कि इस गाने में पीले रंग पर खास जोर दिया गया है? इस गाने में सभी के कपड़ों का रंग पीला है, जो इस गाने के बनने की कहानी से जुड़ा है।
दरअसल, ये गाना असल में सूफी संत और कवि अमीर खुसरो की लिखी एक कविता है, जो उन्होंने 700 साल पहले लिखी थी, लेकिन इस गाने का पीले रंग से क्या नाता है? आइए जानें हीरामंडी के गाने सकल बन में पीले रंग को इतना महत्व क्यों दिया गया है और इस कविता की कहानी क्या है।
गुरु को खुश करने की चाह
ये कहानी 14वीं शताब्दी की है। सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया अपने भांजे के असमय निधन से काफी दुखी थे। वे महीनों तक शोक में डूबे हुए थे और उन्होंने बोलना-मुस्कुराना तक छोड़ दिया था। अपने गुरु को ऐसे दुख के सागर में डूबते देख उनके प्रिय शिष्य अमीर खुसरो काफी बेचैन हो उठे थे और अपने गुरु को खुश करने के लिए कुछ करना चाहते थे।
वसंत पंचमी का खास अवसर
एक दिन वसंत पंचमी के अवसर पर खुसरो ने सड़कों पर कुछ हिंदू महिलाओं को पीले कपड़े पहने और सरसों का फूल लिए देखा। जब खुसरो ने उनसे इसका कारण पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन वे अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनके चरणों में पीले फूल समर्पिक करती हैं।
यह सुनकर खुसरो के मन में एक विचार आया कि उनके ईश्वर तो उनके गुरु हैं। खुसरो ने तुरंत उन महिलाओं से सरसों के फूलों का एक गुच्छा लिया और पीले कपड़े पहनकर अपने गुरु को रिझाने के लिए गीत गाते हुए निजामुदिन औलिया के पास चल पड़े। वह गीत था सकल बन फूल रही सरसों, तरह-तरह के फूल लगाए…।
इतिहास में अमर हो गई कहानी
अमीर खुसरो ने अपने गुरु के चरणों में सरसों के फूल चढ़ाए और उनसे कहा कि यहां के लोग अपने भगवान को खुश करने के लिए उन्हें सरसों के फूल चढ़ाते हैं। खुसरो की ये बात और उनकी खुशी देखकर हजरत निजामुद्दीन औलिया के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। खुसरो की कोशिश सफल हुई और गुरु-शिष्य की ये कहानी इतिहास में अमर हो गई।
दरगाह पर मनती है वसंत पंचमी
आज भी दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर हर साल वसंत पंचमी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन दरगाह पर पीले फूल और पीली चादर चढ़ाई जाती है और कव्वाल कव्वाली गाकर गंगा-जमुनी तहजीब का जश्न मनाते हैं।
हीरामंडी में पीले रंगों का जादू
संजय लीला भंसाली निर्देशन में अपनी बारीकी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने गाने में सरसों के खेत और वसंत के रंग दिखाने के लिए पीले रंगों का खास अंदाज में इस्तेमाल किया है। हीरामंडी की तवायफों के पीले कपड़े, शानदार सेटिंग और क्रोरियोग्राफी अमीर खुसरो की 700 साल पुरानी इस कविता को दर्शाती है।
