बिना इस देवी के सामने सिर झुकाए कोई नहीं रख सकता सुंदरबन के जंगलों में कदम, हिंदू-मुस्लिम दोनों टेकते हैं माथा
मां बॉनबीबी सुंदरबन के जंगलों की एक ऐसी देवी हैं, जिनकी पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों करते हैं।

सुंदरबन के जंगलों की देवी बॉनबीबी की कहानी (Picture Courtesy: Facebook)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं बंगाल में एक ऐसी देवी हैं, जिनके आगे हिंदू और मुस्लिम दोनों ही माथा टेकते हैं? जी हां, ये देवी पश्चिम बंगाल के सुंदरबन के जंगलों से जुड़ी हैं। दरअसल, सुंदरबन दुनिया के सबसे खतरनाक और रहस्यमी जंगलों में से एक माना जाता है।
यहां के मैनग्रोव के घने जंगल, नदियां और इंसानों का शिकार करने वाले बंगाल टाइगर्स के बीच एक अनोखी और गहरी लोक आस्था छिपी है, जो इन देवी से जुड़ी है। ये देवी हैं मां बॉनबीबी, जिनके सामने जंगल में प्रवेश करने से पहले हर कोई आकर माथा झुकाता है।
ये देवी किसी एक धर्म से नहीं जुड़ी, बल्कि एक पूरे समाज से जुड़ी हैं और वहां के लोगों की रक्षक कहलाती हैं। आइए जानें क्या हैं मां बॉनबीबी की कहानी, जिन्हें हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही पूजते हैं।
अरब से सुंदरबन तक का सफर
स्थानीय लोक कथाओं के मुताबिक, बॉनबीबी अपने भाई के साथ अरब से सुंदरबन आई थीं। उस समय सुंदरबन के जंगलों पर दक्षिण राय नाम का एक क्रूर बाघ का राज था, जिसे बाघों का राजा कहा जाता था। दक्षिण राय बेहद शक्तिशाली था और इंसानों की बुराई लालच के रूप में देखा जाता था। जो भी सुंदरबन के जंगलों में आता और जंगल से कोई चीज साथ ले जाने की कोशिश करता, तो उसे दक्षिण राय के गुस्से का सामना करना पड़ता।
सुंदरबन के लोगों को दक्षिण राय के आतंक से मुक्त करवाने के लिए बॉनबीबी और उनके भाई ने हराया और जंगल का एक नियम तय किया कि कोई भी जंगल से उतना ही लेगा, जितनी जरूर हो। लालच करोगे, तो सजा पाओगे।
दुखे की कहानी
बॉनबीबी से जुड़ी एक लोक कथा दुखे नाम के एक गरीब लड़के से भी जुड़ी है। दुखे का लालची चाचा उसे लालच में दक्षिण राय के पास बलि चढ़ाने के लिए लाया था। जब दक्षिण राय बाघ के रूप में दुखे का शिकार किया, तब उसने बॉनबीबी को याद किया और देवी प्रकट हो गईं। उन्होंने दक्षिण राय को हराया और दुखे की जान बचा ली।
सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश
बॉनबीबी की खासियत ही यही है कि उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही काफी श्रद्धा के साथ पूजते हैं। यहां के लोग बॉनबीबी को जंगल की देवी मानते हैं और जंगल में प्रवेश करने से पहले अपनी रक्षा के लिए उनके सामने माथा टेकते हैं।
बॉनबीबी के मंदिरों में हिंदू देवी की तरह सजी मूर्तियों को देखा जा सकता है, तो वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम परंपरा की झलक भी देखने को मिलती है।
बंगाल का लोक नाट्य
बंगाल के गांवों में एक खास तरह का लोक नाटक होता है, जिसे बॉनबीबीर पालागान कहा जाता है। इसमें देवी बॉनबीबी की कहानी दिखाई जाती है, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रकृति और सांप्रदायिक एकता का संदेश देता आया है।
