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    35+ की उम्र में मां बनने का चलन तीन गुना बढ़ा, फैमिली प्लानिंग से पहले करियर को चुन रहीं महिलाएं

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 12:48 PM (IST)

    दिल्ली में मातृत्व की उम्र तेजी से बढ़ रही है, जहां अब महिलाएं 35 वर्ष के बाद अधिक मां बन रही हैं। दिल्ली सरकार की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 35+ माता ...और पढ़ें

    35 प्लस उम्र में मां बनने का आंकड़ा तीन गुना तक बढ़ा (Image Source: AI-Generated)

    35 प्लस उम्र में मां बनने का आंकड़ा तीन गुना तक बढ़ा (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. दिल्ली में 35+ उम्र में मातृत्व तीन गुना बढ़ा

    2. शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिरता मातृत्व में देरी का कारण

    3. मातृत्व अब जैविक नहीं, सामाजिक-आर्थिक निर्णय बना

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में मातृत्व का पारंपरिक गणित तेजी से बदल रहा है। राजधानी में अब महिलाएं पहले की तुलना में अधिक उम्र में मां बन रही हैं। और इसके पीछे परिवार से पहले शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिरता की प्राथमिकता आदि कारण प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए हैं। इस कारण अब पहले की तुलना में कहीं अधिक महिलाएं 35 वर्ष की उम्र के बाद बच्चे पैदा कर रही हैं।

    Pregnancy after 35

    (Image Source: AI-Generated) 

    सामाजिक बदलाव की नई तस्वीर

    दिल्ली सरकार के जन्म - मृत्यु पंजीकरण की वार्षिक रिपोर्ट 2024 के अनुसार वर्ष 2024 में जन्मे कुल बच्चों में 8.9 प्रतिशत बच्चे 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की माताओं से पैदा हुए। वर्ष 2005 में यह आंकड़ा महज 2.7 प्रतिशत था। यानी दो दशकों में 35 प्लस उम्र में मातृत्व लगभग तीन गुना बढ़ गया है। जो बता रहा है कि राजधानी में मातृत्व अब एक जैविक नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक निर्णय बनता जा रहा है। दिल्ली सरकार के डायरेक्टरेट आफ इकोनामिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स और मुख्य पंजीयक (जन्म एवं मृत्यु) की वार्षिक रिपोर्ट - 2024 इस सामाजिक बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

    35 पार की उम्र में मातृत्व तीन गुना बढ़ा

    रिपोर्ट अनुसार वर्ष 2024 में राजधानी में दर्ज कुल 3,06,459 जन्मों में से 8.9 प्रतिशत बच्चे 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं से पैदा हुए। वर्ष 2005 में यह आंकड़ा 2.7 प्रतिशत था। यानी, इस दौरान दिल्ली में 35 प्लस उम्र में मातृत्व का आंकड़ा लगभग तीन गुना बढ़ा है। रिपोर्ट बताती है कि 30 से 34 वर्ष की उम्र में भी मातृत्व तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024 में पैदा हुए कुल बच्चों में से करीब 24.5 प्रतिशत बच्चे 30-34 वर्ष की माताओं से जन्मे, जबकि 25-29 वर्ष की उम्र की माताओं से 36.9 प्रतिशत बच्चे पैदा हुए। यह परिवर्तन बताता है कि मातृत्व अब 20 की उम्र तक सीमित नहीं, बल्कि यह बदलती सामाजिक प्राथमिकताओं, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, करियर केंद्रित जीवन और शहरी समाज के नए स्वरूप का प्रतिबिंब है।

    शिक्षा, रोजगार के साथ देर से विवाह बड़ा कारण

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस बदलाव का सीधा संबंध महिलाओं की शिक्षा व रोजगार से जुड़ा है। रिपोर्ट में दर्ज विवरण के मुताबिक, लगभग 31 प्रतिशत बच्चों की मां ग्रेजुएट या उससे अधिक शिक्षित थीं, जबकि 41 प्रतिशत मां 10वीं या 12वीं तक पढ़ी- लिखी थीं। विशेषज्ञ का कहना है कि इधर के दिनों में उच्च शिक्षा और करियर में स्थिरता हासिल करने के बाद ही परिवार बढ़ाने का निर्णय लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी जीवनशैली में देर से विवाह भी मातृत्व की उम्र बढ़ने का एक अहम कारण है। दिल्ली जैसे महानगरों में नौकरी, आवास, आर्थिक सुरक्षा और जीवन-शैली से जुड़े फैसले अब विवाह और बच्चों की योजना को आगे खिसका रहे हैं।

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    मातृ आयु का प्रभाव गर्भावस्था और नवजात स्वास्थ्य पर

    दिल्ली बर्थ कोहोर्ट स्टडी जो अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध अनुसार मातृ आयु का गर्भावस्था और नवजात स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। अध्ययन के अनुसार 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर जटिलताओं का खतरा हो जाता है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के चलते इन जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा रहा है।

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