पहले करियर सेट, फिर 'बेबी स्टेप': क्यों 30 की उम्र के बाद मां बनने का फैसला कर रही हैं महिलाएं?
मां, यह केवल एक शब्द नहीं बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए चाहिए पूरी तैयारी | इसके लिए देर से शादी के बाद मां बनने में भी देर हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं । ...और पढ़ें

बदल रही है मां बनने की उम्र (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सीमा झा, नई दिल्ली। शादी के एक साल बाद ही ससुराल में सब पूछने लगे- बेबी प्लान कब करोगी? पर मैं अभी बच्चे के लिए तैयार ही नहीं थी, इसलिए चुप रही। नोएडा में कार्यरत 32 वर्षीया अवंतिका शर्मा उन लड़कियों में हैं, जिनके लिए कैलेंडर महत्वपूर्ण है। कब करियर सेट होगा, कब वित्तीय रूप से सक्षम होंगी, यह सोच रहता है, पर शरीर का जैवकीय कैलेंडर अलग है। यही वह चीज है, जहां चुनौतियां शुरू होती हैं। ऐसे में बच्चा अभी नहीं, ऐसी इच्छा पूरी होने में रुकावटें आ सकती हैं, पर वे सब जानते हुए चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार हैं ।
बीते वर्षों में आए आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं कि अब लड़कियां 30 की उम्र के बाद मां बनने का फैसला कर रही हैं। वे चुनौतियों को भी समझती हैं, पर उनके पास विकल्प हैं, जो चिंता की लकीरों को कम करने में मदद कर रहे हैं।

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कुछ समय पहले दक्षिण भारतीय अभिनेता राम चरण की पत्नी उपासना कामिनेनी ने आइआइटी हैदराबाद के एक सत्र में महिलाओं को अपने एग फ्रीज कराने की सलाह दी तो वह ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं। हालांकि उन्होंने उनके सवालों का जवाब भी सवालों से ही दिया कि क्या अपनी परिस्थितियों के आधार पर यह तय करना गलत है कि महिला बच्चा कब चाहती है? क्या अपने लक्ष्य तय करना और करियर पर ध्यान देना गलत है, बजाय इसके कि वह सिर्फ शादी या जल्दी बच्चे पैदा करने के बारे में सोचे ?
बदलाव से असहजता
सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में कई बार ऐसी चीजें भी होती हैं, जो एकदम असहज कर देती हैं। वे मां-बाप जो पढ़ाई व करियर में बेटियों का पूरा साथ दे रहे हैं, देर से संतानोत्पत्ति पर सहमत नहीं दिखते, क्योंकि उन पर सामाजिक दबाव भी हावी रहता है । जैसा प्रिया कहती हैं, मैंने अपनी जिद से पढ़ाई की, जाब के बाद परिवार ने शादी के लिए कहा, शादी हुई। यहां तक मां-बाप का पूरा साथ था, लेकिन उस दिन मुझे खराब लगा, जब शादी के कुछ माह होते ही वे बच्चे की जिद करने लगे । प्रिया के अनुसार, जब मां-बाप ने सभी निर्णय में साथ दिया तो मां बनने के निर्णय में साथ क्यों नहीं? अवंतिका भी कहती हैं, शादी का साल पूरा होते ही बच्चे की जिद ऐसी थी कि ससुराल में मैं थोड़ा असहज हो गई।
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सबसे बहस से बचने के लिए मैंने बात पति पर डाल दी तो थोड़ा सहज हुई। इस संदर्भ में डा. प्रतिमा गोंड कहती हैं, समाज संक्रमण काल से गुजर रहा है। इस समय चीजें बेहतर होने की सहज प्रक्रिया में होती हैं ।
ठोस कारण क्या हैं
लड़कियों की शादी व मां बनने का परंपरागत सोच यानी 20-22 की उम्र में शादी व 24 की उम्र तक मां बनना सही रहता है। इस मान्यता को अब चुनौती मिल रही है तो इसके कुछ ठोस कारण भी हैं। जैसा कि प्रिया कहती हैं, हमारी जनरेशन ने बच्चों को बड़ा करने को लेकर पुरानी पीढ़ी के दर्द व संघर्ष को देखा है। यदि वित्तीय रूप से मजबूत न हो तो कितनी समस्याएं आती हैं, वे यह समझती हैं। साथ ही मां बनने के बाद कामकाजी महिलाओं के जीवन में आई चुनौतियां इसमें अलग से जोड़ी जा सकती हैं। कामकाजी महिलाओं को कभी अपना जरूरी प्रोजेक्ट छोड़ना पड़ता है तो कभी नौकरी भी। प्रिया यह भी कहती हैं कि एक कामकाजी मां के बच्चे को भी यह आसानी से समझ आ सकता है कि कड़ी मेहनत से ही अपना सपना पूरा कर सकते हैं और आगे चलकर अपने संघर्ष के बाद सफल मां-बाप पर वे गर्व कर सकते हैं । अवंतिका के अनुसार, सबसे बड़ी बात यह है कि जब हम मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं तो संतानोत्पत्ति जैसा बड़ा निर्णय कैसे बेहतर हो सकता है? उनके अनुसार, अब परिवार में सपोर्ट सिस्टम भी कमजोर हो रहा है। बच्चा हमें पालना है, न कि हमारे मां-बाप को। इसलिए बच्चे को जन्म देने का निर्णय हमारे अनुकूल होना चाहिए।
यह टास्क बने आसान
आर्थिक आत्मनिर्भरता महिलाओं के सशक्तीकरण का सबसे बड़ा आयाम है। डा. प्रतिमा के अनुसार, हमारे यहां आर्थिक आत्मनिर्भरता थोड़ी चयनात्मक है यानी नौकरी सही है, पर जापान, कोरिया आदि की तरह स्वरोजगार है तो उसे प्राथमिकता नहीं दी जाती। यह ऐसी चीज है, जो लड़कियों पर अच्छी सैलरी वाली जाब के लिए दबाव बनाती है । जैसा प्रिया कहती हैं, केवल नौकरी ही नहीं करना, उसमें अच्छा भी करना होता है और इसमें समय तो लगता है। ऐसे में मां बनना एक बड़ा टास्क बन जाता है, क्योंकि अब लड़कियां गर्भधारण के पूर्व व बाद की पूरी योजना बना लेना चाहती हैं।
कामकाज का दबाव, डेडलाइन का तनाव आदि ऐसी चीजें हैं, जो मां बनने की राह में परेशानियां खड़ी करती हैं। इस बारे में स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. मंजु पुरी कहती हैं कि कई कारणों से गर्भधारण से पूर्व दिक्कतें आती हैं, लेकिन अब वे इसके प्रति सजग हैं। आइवीएफ का बढ़ता कारोबार व एग फ्रीजिंग का चलन अधिक उम्र में मां बनने की राह आसान कर रहा है।
आंकड़ों में तस्वीर

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भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय की 2023 की नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार:
- महिलाओं के विवाह की औसत आयु 2019 में 22. 1 वर्ष से बढ़कर 2023 में 22.9 वर्ष हो गई है।
- शहरी भारत में, पांच में से चार से अधिक महिलाएं अब 21 वर्ष की आयु के बाद विवाह करती हैं, जिससे संतानोत्पत्ति के लिए उपलब्ध वर्ष कम हो जाते हैं।
- केरल, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में अधिकांश महिलाएं देर से विवाह करने के साथ संतानोत्पत्ति भी कम करती हैं।
दबाव से बिगड़ेगी बात
लड़कियां अपनी मां, दादी-नानी आदि को देखकर समझ चुकी हैं कि पसंद के निर्णय न होने की कितनी पीड़ा हो सकती है। सामाजिक दबाव में आकर ऐसे निर्णय के कारण भावी पार्टनर यहां तक बच्चे पर भी नाराजगी उतर सकती है और रिश्ते पर खराब असर पड़ सकता है। यदि वे डरती हैं या दबाव महसूस करती हैं तो उन्हें किसी काउंसलर या परिवार के किसी सदस्य से परामर्श करना चाहिए।
- सृष्टि अस्थाना बिष्ट, मनोविज्ञानी
पार्टनर का रहे साथ
मां बनने का सुख भी पाना है और करियर में भी आगे बढ़ना है तो कुछ बातें ध्यान में रहें। अपनी सेहत को अनदेखा न करें। शादी से पूर्व भावी पार्टनर से शादी के साथ फैमिली प्लानिंग से लेकर भावी बच्चे की पैरेंटिंग को लेकर भी स्पष्ट विचार रखें।
- प्रिया सारस्वत, कंटेंट माडरेटर, अमेजन, बेंगलुरु
नई पीढ़ी अधिक परिपक्व
नई पीढ़ी दिखावा पसंद नहीं करती, न ही किसी कुंठा में रहना चाहती है । उन्हें पता है कि भावनात्मक रूप से परिपक्व या तैयार होना जरूरी है । जब समाज किसी चीज को बदल नहीं सकता तो उसके विकल्प लेकर आता है । इसलिए कार्पोरेट दुनिया में अब माताओं के लिए क्रेच और बच्चे को लाने का विकल्प रखा जाता है। पालिसी मेकर्स भी नई मांओं को लेकर काफी संवेदनशील हो रहे हैं ।
- डॉ. प्रतिमा गोंड, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र, बीएचयू
दिल्ली सरकार की जन्म- मृत्यु पंजीकरण की वार्षिक रिपोर्ट 2024 के अनुसार उस वर्ष 8.9 प्रतिशत बच्चों को माताओं ने 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में जन्म दिया।
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