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    30 हफ्ते में अबॉर्शन कराना कितना सुरक्षित? गायनेकोलॉजिस्ट ने दिए हर जरूरी सवाल के जवाब

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 05:27 PM (GMT+05:30)

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक युवती को 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दी, यह कहते हुए कि कोर्ट किसी को मजबूर नहीं कर सकता। हालांकि, 30 ह ...और पढ़ें

    30 हफ्ते के गर्भपात की सुरक्षा: जानें गायनेकोलॉजिस्ट की राय और जोखिम (Picture Credit- AI Generated)

    30 हफ्ते के गर्भपात की सुरक्षा: जानें गायनेकोलॉजिस्ट की राय और जोखिम (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दी

    2. देर से गर्भपात केवल गंभीर आपात स्थितियों में ही संभव है

    3. यह प्रक्रिया महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले के तहत एक युवती को 30 हफ्तों की प्रेग्नेंसी खत्म करने का फैसला सुनाया। अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोई युवती प्रेग्नेंसी पूरी नहीं करना चाहती है, तो कोर्ट उसे मजबूर नहीं कर सकता। 

    इस फैसले के बाद अब युवती को 30 हफ्तों की प्रेग्नेंसी को अबॉर्ट करने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, 30 हफ्तों की प्रेग्नेंसी के बाद अबॉर्शन काफी दुलर्भ होता है। यह काफी रिस्की होता है और आमतौर पर डॉक्टर ऐसा न करने की सलाह देते हैं। ऐसे में हमने एलेंटिस हेल्थकेयर, नई दिल्ली में ऑब्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी के एचओडी और चेयरमैन डॉ. मन्नान गुप्ता से बातचीत कर लेट प्रेग्नेंसी से जुड़े कुछ सवालों के जवाब जानें। 

    क्या 30 सप्ताह की प्रेग्नेंसी के बाद गर्भपात हो सकता है? 

    आम तौर पर 30 हफ्ते के बाद गर्भपात की अनुमति नहीं होती है। यह बहुत ही दुर्लभ मामलों में और सख्त कानूनी/मेडिकल नियमों के तहत ही किया जाता है। डॉक्टर यह फैसला तभी लेते हैं जब मां की जान को गंभीर खतरा हो या गर्भ में पल रहे शिशु में कोई ऐसा विकार हो, जिससे उसका जीवित रहना नामुमकिन हो।

    डॉक्टर कब देर से गर्भपात (Late Abortion) की सलाह देते हैं? 

    डॉक्टर ऐसा कदम सिर्फ आपातकालीन हालातों यानी इमरजेंसी में उठाते हैं, जैसे:

    • मां की जान को खतरा: अगर मां को गंभीर प्रीक्लेम्पसिया (High BP), हार्ट फेलियर या कोई जानलेवा इन्फेक्शन हो।
    • शिशु में गंभीर समस्या: अगर भ्रूण में कोई ऐसी शारीरिक या दिमागी कमी (Birth Defect) हो, जिससे जन्म के बाद उसका बचना संभव न हो।

    30 हफ्ते के बाद गर्भपात का शरीर पर क्या असर पड़ता है? 

    चूंकि यह प्रेग्नेंसी का आखिरी चरण होता है, इसलिए इसका अनुभव लगभग नॉर्मल डिलीवरी जैसा ही होता है।

    खबरें और भी

    • शारीरिक प्रभाव: इसमें दर्द (लेबर पेन), ब्लीडिंग, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। रिकवरी में शुरुआती गर्भपात के मुकाबले ज्यादा समय लगता है।
    • मानसिक प्रभाव: यह फैसला अक्सर मजबूरी में लिया जाता है, इसलिए महिला को गहरे दुख, तनाव या अपराधबोध का सामना करना पड़ सकता है।

    क्या इससे भविष्य में मां बनने में कोई दिक्कत आती है?

    ज्यादातर मामलों में, अगर यह प्रक्रिया किसी अनुभवी डॉक्टर की देखरेख में सही तरीके से की गई हो, तो भविष्य की प्रेग्नेंसी पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ता। गर्भाशय (Uterus) ठीक होने के बाद सामान्य हो जाता है। हालांकि, संक्रमण या चोट का थोड़ा जोखिम रहता है, लेकिन सही इलाज और चेकअप से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

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