विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली-NCR में 1400 पार पहुंचे स्वाइन फ्लू के मामले, किन लोगों को है H1N1 से सबसे ज्यादा खतरा?

By Dr. Tushar TayalEdited By: Swati Sharma
Published: Fri, 21 Aug 2026 02:41 PM (IST)

दिल्ली-एनसीआर में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़त हुई है। इस साल 12 अगस्त तक 1,449 मामले सामने आए हैं।

दिल्ली में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले (Picture Courtesy: Freepik)

दिल्ली में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले (Picture Courtesy: Freepik)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में मानसून के बीच H1N1 यानी स्वाइल फ्लू के मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 12 अगस्त तक दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1,449 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में छह गुना ज्यादा है। 

स्वाइन फ्लू के इन बढ़ते मामलों के बीच घबराने की नहीं, बल्कि सावधानी बरतने की जरूरत है। इस बीमारी से जुड़ी कुछ जरूरी बातें मालूम होने से व्यक्ति अपनी और अपने परिवार की बेहतर सुरक्षा कर सकता है।

स्वाइन फ्लू के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ क्यों होती है?

ज्यादातर लोगों को H1N1 सामान्य फ्लू की तरह ही होता है, लेकिन कुछ मामलों में वायरस फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाता है। इस स्थिति में वायरस फेफड़ों के टिश्यू में सूजन पैदा कर देता है, जहां से शरीर में ऑक्सीजन का आदान-प्रदान होता है। इस वजह से सांस लेने में तकलीफ होती है। 

इसके कारण वायरल निमोनिया हो सकता है और यह फेफड़ों को इतना कमजोर कर देता है कि बैक्टीरिया आसानी से हमला करके सेकंडरी इन्फेक्शन पैदा कर देते हैं। इन दोनों ही स्थितियों में सांस लेने की प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है। 

सांस की तकलीफ कब एक इमरजेंसी बन जाती है?

अगर आप बिना कोई काम किए, सिर्फ बैठे-बैठे भी तेजी से हांफ रहे हैं या सामान्य से बहुत तेज सांस ले रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। इसके अलावा, होठों या उंगलियों का नीला पड़ना, छाती में जकड़न महसूस होना, कन्फ्यूजन या बहुत ज्यादा सुस्ती आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल जाएं। ये लक्षण संकेत हैं कि शरीर को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं रही है। 

ऑक्सीजन लेवल कम होने का क्या मतलब है?

पल्स ऑक्सीमीटर में अगर ऑक्सीजन लेवल 94% से कम आता है, तो इसका मतलब है आपके फेफड़े खून तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पा रहे हैं। कई बार मरीज को सांस लेने में बहुत परेशानी महसूस नहीं होती, लेकिन पल्स ऑक्सीमीटर की रीडिंग कम आती है। इस स्थिति में भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, स्थिति बिगड़ने का इंतजार न करें। 

क्या H1N1 से निमोनिया और रेस्पिरेटरी फेलियर हो सकता है?

कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है। यह इन्फेक्शन साधारण फ्लू से बढ़कर वायरल निमोनिया और गंभीर मामलों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) का रूप ले सकता है। ARDS में फेफड़े इतने कमजोर हो जाते हैं कि वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। इसलिए हाई रिस्क वाले मरीजों को ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है। 

क्या H1N1 के हर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होती है?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। ज्यादातर मरीज घर पर ही आराम करके, फ्लूइड्स लेकर, पैरासिटामोल और डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाओं की मदद से ठीक हो जाते हैं। ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत सिर्फ उन मरीजों को पड़ती है, जिनके ब्लड में ऑक्सीजन की गिरावट हो जाती है। 

किन्हें स्वाइन फ्लू से सबसे ज्यादा खतरा है?

प्रेग्नेंट महिलाएं, छोटे बच्चे, 65 साल की उम्र के बुजुर्ग और पहले से किसी बीमारी जैसे अस्थमा, सीओपीडी, डायबिटीज, दिल की बीमारी, मोटापा या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। अगर इस वर्ग के लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

डॉ. तुषार तयाल, एसोसिएट डायरेक्टर - इंटरनल मेडिसिन, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम