डिलीवरी का समय और दर्द कम करने के लिए कौन-सी पोजीशन है बेहतर, एक्सपर्ट ने दूर किया कन्फ्यूजन
डिलीवरी के दौरान मां किस पोजीशन में है यह लेबर पेन को कम करने और कॉम्प्लिकेशन्स से बचने में अहम भूमिका निभाता है। ...और पढ़ें

क्या पीठ के बल लेटकर जन्म देना सही है? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद अहसास होता है, लेकिन प्रसव की प्रक्रिया को लेकर अक्सर मन में कई सवाल और डर होते हैं। क्या आप जानती हैं कि डिलीवरी के दौरान आपकी पोजीशन आपके अनुभव को आसान या मुश्किल बना सकती है?
आमतौर पर फिल्मों में हमने यही देखा है कि महिला पीठ के बल लेटकर बच्चे को जन्म देती है और शायद इसलिए हम इसे स्टैंडर्ड पोजीशन भी मान लेते हैं। लेकिन इस बारे में डॉ. मनन गुप्ता (चेयरमैन एंड एचओडी, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, एटलांटिस हॉस्पिल, नई दिल्ली) बताते हैं कि मेडिकल रिसर्च से अब यह साफ हो गया है कि डिलीवरी के लिए कोई एक तरीका हर महिला पर फिट नहीं बैठता, लेकिन कुछ खास पोजीशन स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर मानी जाती हैं।
कौन-सी पोजीशन है ज्यादा बेहतर?
शोध बताते हैं कि बच्चे को जन्म देने के लिए सीधा रहना, जैसे कि खड़ा होना, बैठना या उकड़ू बैठना, पीठ के बल लेटने की तुलना में कहीं ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण है ग्रैविटी। जब मां सीधी स्थिति में होती है, तो ग्रैविटेशन फोर्स बच्चे को बर्थ कैनाल के जरिए नीचे आने में मदद करता है।

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अध्ययनों से पता चला है कि इस स्थिति में कॉन्ट्रैक्शन्स ज्यादा मजबूत होते हैं। इसका पॉजिटिव असर बच्चे पर भी पड़ता है, क्योंकि उसे अंबिकल कॉर्ड के जरिए ज्यादा ऑक्सीजन मिल पाती है। इतना ही नहीं, सीधा रहकर डिलिवर करने से प्रसव का समय भी कम हो सकता है।
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कॉम्प्लिकेशन्स का खतरा कम
सीधी पोजीशन में डिलीवरी का एक और बड़ा फायदा यह है कि इससे बच्चों को जन्म देते समय होने वाली कॉम्प्लिकेशन्स कम हो सकती हैं। शोध के अनुसार, इस स्थिति में फोरसेप्स या चीरा लगाने जैसे मेडिकल हस्तक्षेप की जरूरत कम पड़ती है। साथ ही, बच्चे को बाहर की तरफ पुश करने के दौरान मां को होने वाली बेचैनी और दर्द में भी कमी आती है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
पीठ के बल लेटने के नुकसान
आमतौर पर हम अस्पतालों में प्रसव के दौरान पीठ के बल लेटने की स्थिति ही देखते हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। इस स्थिति में शरीर ग्रैविटी के विपरीत काम करता है, जिससे प्रसव की गति धीमी हो सकती है। इसके अलावा, पीठ के बल लेटने से कॉन्ट्रैक्शन कम प्रभावी हो सकते हैं और कुछ मामलों में बच्चे तक पहुंचने वाली ब्लड सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।
आराम और फ्लेक्सिबिलिटी भी है जरूरी
हालांकि, सीधी पोजीशन बेहतर है, लेकिन हर महिला की स्थिति अलग होती है। कुछ महिलाएं करवट लेकर लेटना या आधा झुककर बैठना पसंद करती हैं। यह स्थितियां तब फायदेमंद होती हैं जब मां को आराम की जरूरत हो या उसने एपिड्यूरल लिया हो।
सबसे जरूरी बात यह है कि प्रसव के दौरान महिलाओं को अपनी पोजीशन बदलने की पूरी आजादी होनी चाहिए। हालांकि, मेडिकली सीधी पोजीशन्स ज्यादा असरदार हैं, लेकिन सुरक्षित डिलीवरी के लिए व्यक्तिगत देखभाल और मां की सुविधा को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।