बच्चे को बनाना है सुपर-स्मार्ट और हेल्दी? प्रेग्नेंसी के 9 महीनों में छिपा है सेहत का राज
गर्भावस्था के 9 महीने सिर्फ एक नए जीवन को दुनिया में लाने का सफर नहीं हैं, बल्कि यह बच्चे के आजीवन स्वास्थ्य की नींव रखने का सबसे अहम समय है। ...और पढ़ें

जन्म के बाद नहीं, बल्कि गर्भ से ही शुरू होती है बच्चे की असली सुरक्षा (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर साल 7 अप्रैल को पूरी दुनिया World Health Day मनाती है। इस मौके पर जब हम सभी बेहतर स्वास्थ्य और बीमारियों से बचाव पर चर्चा करते हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि एक स्वस्थ शरीर की शुरुआत जन्म के बाद नहीं, बल्कि मां के गर्भ से ही हो जाती है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. सोमसुंदरम ए (MD, FIAP) के मुताबिक, एक गर्भवती महिला की दिनचर्या, उसका खानपान और बीमारियों से बचाव के तरीके- ये सब मिलकर यह तय करते हैं कि बच्चे का दिमाग, उसके शरीर के अंग और उसकी इम्युनिटी कितनी मजबूत होगी। आइए जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान उठाए गए आपके छोटे-छोटे कदम शिशु के भविष्य को कैसे संवार सकते हैं।
शुरुआती विकास का नाजुक दौर
जब शिशु मां के पेट में होता है, तब उसके शरीर के हर अंग का निर्माण हो रहा होता है। यह दौर इतना संवेदनशील होता है कि मां को होने वाला कोई भी इन्फेक्शन या खराब खानपान सीधे बच्चे पर असर डाल सकता है।
आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 3% बच्चों में किसी न किसी तरह के जन्मजात दोष पाए जाते हैं। चूंकि, गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह अपनी मां पर निर्भर होता है, इसलिए मां की अच्छी सेहत ही बच्चे की सबसे बड़ी ढाल है।
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'ज्यादा खाना' नहीं, 'सही खाना' है जरूरी
अक्सर कहा जाता है कि गर्भवती महिला को दो लोगों का खाना खाना चाहिए, लेकिन असल में ध्यान खाने की मात्रा पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर होना चाहिए। मां जो भी पोषक तत्व लेती है, वह 'प्लेसेंटा' के रास्ते बच्चे तक पहुंचता है।

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बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए कुछ पोषक तत्व जादुई असर करते हैं:
- फोलिक एसिड: यह बच्चे के दिमाग और रीढ़ की हड्डी को आकार देता है। इसके सेवन से 'न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट' जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा 70% तक टल जाता है।
- आयरन: यह खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को दुरुस्त रखता है, जिससे बच्चे को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है।
- कैल्शियम: यह शिशु की हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए अनिवार्य है।
- आयोडीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड: ये दोनों ही बच्चे के दिमाग को तेज और स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं।
अपनी डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन को शामिल करने से बच्चे का वजन भी सही रहता है और भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी कम होता है।
मां की इम्यूनिटी से मिलता है बच्चे को 'सुरक्षा कवच'
दुनिया में कदम रखने वाले नवजात शिशु का शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होता। बड़ों को होने वाला मामूली-सा इन्फेक्शन भी छोटे बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
ऐसे में बच्चे की रक्षा कैसे होती है?
इसका जवाब भी मां ही है। गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर से कुछ 'एंटीबॉडीज' बच्चे के शरीर में ट्रांसफर होते हैं। जब तक बच्चे का अपना इम्यून सिस्टम पूरी तरह काम करना नहीं शुरू कर देता, तब तक मां से मिली यही ताकत उसे सुरक्षित रखती है।

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जन्म से पहले ही बीमारियों को मात देता है टीकाकरण
डॉक्टरों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार गर्भवती महिला का सही समय पर टीकाकरण होना बहुत जरूरी है। जब मां को टीका लगता है, तो उसका शरीर एंटीबॉडीज बनाता है जो गर्भनाल के जरिए शिशु तक पहुंच जाते हैं।
काली खांसी के उदाहरण से समझें
नवजात शिशुओं को जन्म के शुरुआती दो महीनों तक काली खांसी का टीका नहीं लगाया जा सकता, लेकिन विडंबना यह है कि इस बीमारी से सबसे ज्यादा खतरा भी दो महीने से कम उम्र के बच्चों को ही होता है। कई बार इसके कारण बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है और जान का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में, अगर मां ने गर्भावस्था के दौरान टीका लगवाया है, तो बच्चे को जन्म से पहले ही इस जानलेवा बीमारी से लड़ने की ताकत मिल जाती है।
हेल्दी बेबी, हैप्पी मॉम
घर में नन्हे मेहमान के आने से पहले कपड़े खरीदना या कमरा सजाना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन असली तैयारी आपकी सेहत से जुड़ी है। संतुलित भोजन करना, नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह लेना और जरूरी टीके लगवाना- ये वो फैसले हैं जो आपके बच्चे को एक सुरक्षित, स्वस्थ और मजबूत शुरुआत देते हैं।