दिल्ली का 'पिज्जा-बर्गर' बनाम रांची का 'सादा भोजन, JPSC-JSSC आंदोलन में दिखा झारखंडी छात्रों का संयम
रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन दिल्ली के नीट पेपर लीक विरोध से भिन्न है। यहां छात्र संयमित हैं, किसी ...और पढ़ें

JPSC-JSSC आंदोलन में दिखा झारखंडी छात्रों का संयम (PTI)
HighLights
रांची छात्र आंदोलन संयमित, किसी के इस्तीफे की मांग नहीं।
दिल्ली नीट विरोध से अलग, राजनीति से रहे दूर।
गड़बड़ी जांच, परीक्षा रद्द और प्रक्रिया सुधार पर केंद्रित।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की राजधारी रांची में जेपीएससी एवं जेएसएससी की नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में चल रहे छात्रों का आंदोलन नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन से बिल्कुल अलग है।
सोमवार को विधानसभा घेराव करने पहुंचे छात्रों का व्यवहार भी वैसा नहीं था, जैसा जंतर-मंतर पर उनकी उग्रता में दिख रहा था। आंदोलन स्थल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम हो या फिर विधानसभा मार्च, न तो कोई गाली-गलौज जैसी बात हो रही थी न ही छात्र किसी के इस्तीफे की जिद पर अड़े थे।
किसी राजनीतिक दल या राजनेता को टारगेट भी नहीं किया जा रहा था। दो-तीन मांगों को छोड़ दें तो मंत्रियों की कमेटी के समक्ष वार्ता में भी किसी तरह की हठधर्मिता नहीं दिखी। जंतर-मंतर पर भी जेन-जी आंदाेलन कर रहे थे। झारखंड में भी जेन-जी हैं, लेकिन इनका व्यवहार, सोच और उद्देश्य अलग है।
जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा की मांग पर अड़े थे। प्रधान ने इस्तीफा भी दिया। दूसरी तरफ, झारखंड में आंदोलनरत छात्रों ने कभी भी न तो मुख्यमंत्री और न ही उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री से इस्तीफा की मांग की।
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इनकी तमाम मांगें नियुक्ति में अबतक हुई गड़बड़ियों की जांच, संबंधित परीक्षाओं काे रद करने तथा परीक्षा आयोगों व नियुक्ति प्रक्रियाओं में सुधार पर केंद्रित हैं। जंतर-मंतर पर छात्र प्रधानमंत्री के विरुद्ध भी अपशब्द बोलने से परहेज नहीं कर रहे थे।
कई बार तीखी और अभद्र भाषा या राजनीतिक नारे देखे गए थे, लेकिन रांची में छात्र पूरी तरह संयमित हैं और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या व्यक्ति विशेष के विरुद्ध बयानों से दूर हैं।
वहां पिज्जा-बर्गर, यहां सादा भोजन-उच्च विचार
दिल्ली में छात्रों के बीच पिज्जा और बर्गर बंट रहे थे। रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों ने ऐसी खाद्य सामग्री उपलब्ध करानेवालेे लोगों को दूर रखा है। यहां के छात्र अपने खर्च पर सादा भोजन ले रहे हैं।
वहां आंदोलन केंद्रीय यहां, एक ही मैदान में अलग-अलग टेंट
दिल्ली में हुआ आंदोलन पूरी तरह केंद्रीयकृत था। ऐसा लग रहा था कि कहीं एक जगह से आंदोलन को निर्देशित किया जा रहा हो। लेकिन झारखंड में छात्रों के अलग-अलग समूह हैं। एक ही मैदान में अलग-अलग टेंट में आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक है। गुटों के बीच कोई टकराव नहीं है।
छात्र भी कभी एक टेंट में बैठ रहे हैं तो कभी दूसरे टेंट में। इनका आंदोलन राजनीति से भी दूर है। समर्थन देने पहुंच रहे नेताओं से बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें अपने आंदोलन में सम्मिलित नहीं कर रहे।