बैन के बावजूद लव भाटिया तक कैसे पहुंचा सल्फास? रांची में होटल व्यवसायी की मौत के बाद उठे बड़े सवाल
रांची के होटल व्यवसायी लव भाटिया की संदिग्ध आत्महत्या में सल्फास के उपयोग से झारखंड में प्रतिबंधित जहरीले रसायनों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए ...और पढ़ें

व्यवसायी लव भाटिया। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी के चर्चित होटल व्यवसायी लव भाटिया की संदिग्ध आत्महत्या मामले में सल्फास (एल्युमिनियम फास्फाइड) का नाम सामने आने के बाद झारखंड में प्रतिबंधित जहरीले रसायनों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सल्फास की गोली खाने की बात सामने आ रही है।
हालांकि इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में होगी। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्य में सल्फास की खुले बाजार में बिक्री प्रतिबंधित है, तब यह आम व्यक्ति तक कैसे पहुंचा।
सल्फास, यानी एल्युमिनियम फास्फाइड, अत्यंत जहरीला रसायन है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से अनाज संरक्षण और फ्यूमिगेशन कार्य में किया जाता है।
यह हवा के संपर्क में आते ही जहरीली फास्फीन गैस छोड़ता है, जो इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकारों ने इसकी बिक्री और उपयोग को कड़े नियमों के दायरे में रखा है।
क्या है बिक्री का नियम
नियमों के अनुसार सल्फास की बिक्री सामान्य दुकानों या खुले बाजार में नहीं की जा सकती। इसका उपयोग केवल लाइसेंस प्राप्त पेस्ट कंट्रोल आपरेटरों, सरकारी गोदामों या अधिकृत औद्योगिक संस्थानों तक सीमित है।
विशेषज्ञों की निगरानी में ही इसके इस्तेमाल की अनुमति है। घरों या रिहायशी इलाकों में इसे रखना भी खतरनाक माना गया है।झारखंड में भी सल्फास की खुली बिक्री पर पूरी तरह रोक है।
कृषि कार्यों और अनाज संरक्षण में सीमित उपयोग की अनुमति जरूर है, लेकिन इसके वितरण और भंडारण के लिए लाइसेंस अनिवार्य है। इसके बावजूद समय-समय पर आत्महत्या और जहरीले पदार्थ सेवन के मामलों में सल्फास का नाम सामने आता रहा है।
लव भाटिया मामले के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने यह भी अहम सवाल है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद यह जहरीला पदार्थ आखिर उनके पास कैसे पहुंचा। क्या इसकी अवैध बिक्री हो रही है, या फिर नियमों की निगरानी में कहीं गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
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मालूम हो कि सल्फास जैसी घातक दवा की अवैध उपलब्धता केवल कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। ऐसे में इस मामले की गहन जांच और प्रतिबंधित रसायनों की बिक्री पर सख्त निगरानी की जरूरत है।