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JPSC Scam: अभय तिवारी के पिता के परीक्षा में बैठने की सूचना निकली गलत, कोर्ट ने जारी किया संशोधित आदेश

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:10 PM (IST)

रांची सीआईडी की विशेष अदालत ने जेपीएससी परीक्षा घोटाले में मनोज तिवारी के पिता के परीक्षा में बैठने संबंधी पूर्व ...और पढ़ें

जेपीएससी घोटाले में नया मोड़ अभय तिवारी के पिता की परीक्षा में बैठने की सूचना गलत निकली।

जेपीएससी घोटाले में नया मोड़ अभय तिवारी के पिता की परीक्षा में बैठने की सूचना गलत निकली।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं को संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) का मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी की जेपीएससी की परीक्षाओं में बैठने संबंधित सूचना गलत निकली।

रांची स्थित सीआइडी की विशेष अदालत ने सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 में पांच सितंबर के जारी आदेश को संशोधित करते हुए मंगलवार को संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें इसका उल्लेख किया है। अदालत ने इसे टाइपिंग एरर बताया है।

विशेष अदालत के पांच सितंबर के आदेश में यह उल्लेख था कि अभय कुमार तिवारी ने स्वयं जेपीएससी व जेएसएससी की कई परीक्षाओं में सफलता हासिल तो की ही थी, उसने अपनी पत्नी व भाई सहित कई रिश्तेदारों को भी नौकरी दिलाई।

इतना ही नहीं, उसने पिता सुखदेव तिवारी को भी जेपीएससी की दो परीक्षाओं में शामिल कराया था। इनमें फारेस्ट रेंज अफसर (एफआरओ) प्रारंभिक परीक्षा 2024 में उसके पिता का क्रमांक 24400147 व सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) प्रारंभिक परीक्षा 2024 में क्रमांक 24300086 था। जेपीएससी की दोनों ही परीक्षाओं को एजेंसी टीडीपीएल ने ही संचालित की थी।

पूरे मामले की जांच कर रही सीआइडी ने रांची स्थित सीआइडी की विशेष अदालत को बताया है कि एक बुजुर्ग को परीक्षा में शामिल करा देना यह बताता है कि सार्वजनिक परीक्षाओं को संचालित करने वाले निष्पक्षता व ईमानदारी के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।

सीआईडी ने अपने संशोधित आदेश में उपरोक्त तथ्य को गलत बताया है और लिखा है कि अभय तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी से जुड़ी यह सूचना गलत है। कोर्ट ने संशोधित आदेश में लिखा है कि इसके अतिरिक्त पांच सितंबर के आदेश के सभी तथ्य यथावत रहेंगे।

सीआईडी ने कोर्ट में दाखिल अपनी 19 पन्ने की प्रारंभिक रिपोर्ट में जानकारी दी है कि सुनियोजित तरीके से एक सिंडिकेट सक्रिय था, जो जालसाजी कर अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के लिए सेटिंग करता था।

सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि यह सिंडिकेट प्रारंभिक परीक्षा कराने के लिए पांच लाख रुपये व अंतिम रूप से चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक की वसूली करता था।

अभ्यर्थी चयनित होने के बाद रुपये देने के वादे से न मुकरें, इसके लिए सिंडिकेट के सदस्य अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, स्टांप पेपर व हस्ताक्षरयुक्त कागज सिक्योरिटी के तौर पर जमा ले लेते थे।

पहले काली सूची में डाला, फिर उसी एजेंसी से कराया परीक्षा संचालन का कार्य

सीआइडी ने कोर्ट में जानकारी दी है कि परीक्षा संचालन कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल को जेपीएससी ने अनियमितता के मामले में 20 मई 2025 को पहले काली सूची में डाला। इसके बावजूद जून 2025 में इसी एजेंसी से संवेदनशील परीक्षाओं का संचालन कराया। इस एजेंसी से परीक्षा संचालन में जेपीएससी ने निविदा शर्तों को भी पूरा नहीं किया।

जांच में यह भी जानकारी मिली हे कि जब तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने इसपर आपत्ति की तो जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने एजेंसी पर कार्रवाई तो नहीं की, असीम किस्पोट्टा को ही परीक्षा कार्य से हटा दिया और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को इसका प्रभार सौंप दिया।

सीआईडी ने आगे छानबीन में यह भी पाया है कि टीडीपीएल के निदेशक समरपाल सिंह व रणवीर सिंह तथा अन्य कर्मियों ने मिलकर जालसाजी की पूरी पटकथा लिखी थी। परीक्षा केंद्र व जेपीएससी कार्यालय से मूल उत्तर पुस्तिकाएं बाहर ले जाकर दोबारा लिखवाई गईं।

जांच में यह खुलासा हुआ है कि एफआरओ प्रारंभिक परीक्षा में 350 व एसीएफ परीक्षा में 150 से ज्यादा ओएमआर शीट्स में हेराफेरी की गई है। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की अधिकारिक उत्तर पुस्तिका जारी होने से पहले ही तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ने अपने वाट्सए नंबर से टीडीपीएल कर्मी को दे दी थी।

खियांग्ते ने सरकारी लैपटाप व पेन ड्राइव से साक्ष्य मिटाने की कोशिश की

सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी के दफ्तर में सीआईडी का छापा पड़ते ही जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद उन्हें जो सरकारी लैपटाप मिला था, उस लैपटाप व पेन ड्राइव को वे अपने साथ लेकर चले गए थे।

सीआईडी ने बाद में उन डिजिटल उपकरणों को जब्त किया था और उसकी फोरेंसिक जांच कराई तो पता चला कि एल. खियांग्ते ने लैपटाप व पेन ड्राइव से डिजिटल साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। हार्डवेयर के स्टोरेज को खुरचा गया था। उपकरणों से डेटा को मिटाया गया था।

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