जंतर-मंतर के बाद अब रांची में प्रदर्शकारियों पर एक्सपायर्ड आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप, छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल
Ranchi Protest: रांची विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों ने पुलिस पर एक्सपायर्ड आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, जिससे उन्हें तेज जलन और सां ...और पढ़ें

एक्सपायर्ड आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप, छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल।
HighLights
छात्रों ने पुलिस पर एक्सपायर्ड आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
आंसू गैस केन पर 2019 मैन्युफैक्चरिंग और 2022 एक्सपायरी दर्ज थी।
रांची में छात्रों ने आंसू गैस की गुणवत्ता और वैधता की जांच की मांग की।
जागरण संवाददाता, रांची। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव के बीच अब आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों का आरोप है कि पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए एक्सपायर्ड आंसू गैस केन का इस्तेमाल किया गया। छात्रों ने मौके पर मिले आंसू गैस के खाली केन को दिखाते हुए दावा किया कि उस पर 2019 का मैन्युफैक्चरिंग वर्ष और 2022 की एक्सपायरी दर्ज थी।
विधानसभा घेराव के लिए निकले छात्रों ने पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेडों को एक के बाद एक पार कर दिया। विधानसभा के पास पहुंचने पर पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। गैस के प्रभाव से प्रदर्शनकारियों में अफरातफरी मच गई। कई छात्र आंखों में तेज जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत करते नजर आए।
पानी डालने के बाद भी नहीं थमी जलन
छात्रों का कहना है कि आंसू गैस का प्रभाव इतना तेज था कि कई लोगों की आंखों और चेहरे पर पानी डालने के बावजूद तत्काल राहत नहीं मिली। प्रदर्शनकारियों ने गैस के खाली केन को उठाकर उसकी एक्सपायरी की तारीख देखी।
इसके बाद छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया, जिसकी वैधता अवधि कई वर्ष पहले समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित केन वास्तव में इस्तेमाल किए गए आंसू गैस के प्रभाव का कारण था या नहीं। मामले की आधिकारिक जांच होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
एक्सपायर्ड आंसू गैस का क्या असर हो सकता है?
आंसू गैस केमिकल एजेंट पर आधारित होती है और इसकी प्रभावशीलता समय के साथ बदल सकती है। एक्सपायरी के बाद इसके रासायनिक घटकों में बदलाव संभव है, जिससे प्रभाव की तीव्रता और प्रकृति पूर्वानुमान से अलग हो सकती है।
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हालांकि, केवल एक्सपायरी डेट देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गैस अधिक जहरीली या अधिक खतरनाक हो गई थी। इसके लिए इस्तेमाल किए गए केन की तकनीकी जांच और उसमें मौजूद रासायनिक सामग्री की जांच जरूरी है।
छात्रों ने सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल
आंदोलनकारी छात्रों ने इस घटना को सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला बताया। छात्रों का कहना है कि यदि कानून-व्यवस्था संभालने के लिए इस्तेमाल होने वाली आंसू गैस जैसी जरूरी सामग्री की खरीद और गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा रही है, तो सरकार से शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर व्यवस्था की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
छात्रों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा पहुंचना चाहते थे, लेकिन रास्ते में पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। बैरिकेडिंग, आंसू गैस और पुलिस कार्रवाई के बीच छात्रों का विधानसभा घेराव का प्रयास तनावपूर्ण हो गया।
आंदोलनकारी छात्रों ने पूरे मामले की जांच कराने और पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए आंसू गैस के सभी केनों की गुणवत्ता एवं वैधता की जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल किए गए सुरक्षा उपकरण और रासायनिक सामग्री की एक्सपायरी की नियमित जांच की जाती है। बता दें कि जंतर-मंतर पर भी पुलिस-प्रशासन पर एक्सपायर्ड टियर गैस उपयोग में लाने पर काफी विवाद हुआ था।