'जिस पार्टी को जिताने की साजिश रची, उसी ने जेल भेजा’, निशिकांत दुबे का JPSC के पूर्व अध्यक्ष खियांग्ते की गिरफ्तारी पर बड़ा बयान
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी पर तीखा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खियांग्ते को उसी पार्टी ...और पढ़ें

निशिकांत दुबे का जेपीएससी पूर्व अध्यक्ष खियांग्ते की गिरफ्तारी पर बड़ा बयान।
HighLights
निशिकांत दुबे ने खियांग्ते की गिरफ्तारी पर बयान दिया।
आरोप लगाया कि उसी पार्टी ने जेल भेजा जिसने साजिश रची।
जेपीएससी भर्ती धांधली मामले में खियांग्ते गिरफ्तार हुए।
डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी पर भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने सोमवार को तीखा हमला बोला। उन्होंने खियांग्ते पर झारखंड विधानसभा चुनाव में धांधली का आरापे लगाया। गोड्डा सांसद ने एक्स पर लिखा— “आज झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन के बर्खास्त अध्यक्ष खियांते जी गिरफ़्तार हो गए। 2019 में मुझे लोकसभा चुनाव हरवाने की भरपूर कोशिश की थी, मेरे फ़ोन करने पर मेरे उपर इन्होंने केस कर दिया था, उस वक़्त ये झारखंड के चुनाव अधिकारी थे। विधि का विधान देखिए, जिस पार्टी को जिताने की मेरे खिलाफ इन्होंने साज़िश रची, उसी ने इनको जेल भेजा। छात्रों को जीत की बधाई।”
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में खियांग्ते (तब झारखंड के चुनाव अधिकारी) ने उन्हें हराने की भरपूर कोशिश की थी और फोन करने पर उनके खिलाफ केस भी दर्ज कर दिया था। उन्होंने कहा कि कानून का चक्र घूम गया और जिस पार्टी को जिताने के लिए उनके खिलाफ साजिश रची गई, उसी पार्टी की सरकार ने अब खियांग्ते को जेल भेज दिया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्र आंदोलन जारी है। सांसद ने छात्रों के हौसले पर बधाई भी दी। रांची में पुलिस के लाठीचार्ज पर राहुल गांधी और हेमंत सोरेन से सवाल किया है। निशिकांत दुबे का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कल गिरफ्तार हुए थे जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की जांच कर रही सीआइडी ने सोमवार को आयोग के पूर्व अध्यक्ष सह झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया था। सीआईडी के अधिकारी खियांग्ते को उनके कांके रोड स्थित आवास से गिरफ्तार कर सीआइडी के राजा रानी कोठी स्थित मुख्यालय ले गए।
कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद देर रात उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। एल. खियांग्ते पर जेपीएससी की परीक्षाओं को संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के साथ मिलकर अनियमितता बरतने आदि के आरोप लगे हैं।
टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी की गिरफ्तारी व उसके स्वीकारोक्ति बयान में एल. खियांग्ते के विरुद्ध सनसनीखेज आरोप लगे हैं। इसके बाद ही सीआइडी ने उन्हें गिरफ्तार किया है। बताते चलें कि खियांग्ते ने जेपीएससी परीक्षा की सीआइडी जांच शुरू होने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
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दो करोड़ रुपये की रिश्वत व भुगतान में 20 प्रतिशत कमीशन लेने का है आरोप
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल को ठेका देने के एवज में दो करोड़ रुपये की रिश्वत ली। इतना ही नहीं, काम के बदले टीडीपीएल को होने वाले भुगतान में भी एल. खियांग्ते ने 20 प्रतिशत का कमीशन मांगा था। सीआइडी को यह जानकारी अभय तिवारी ने अपनी स्वीकारोक्ति बयान में दिया है।
अभय तिवारी ने मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कार्यरत कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र कुमार को इसका सूत्रधार बताया है, जिसने टीडीपीएल व एल. खियांग्ते के बीच बातचीत को आगे बढ़ाया था। उसने ही सौदा तय कराया और इसके एवज में उसने भी अपने लिए 20 से 25 लाख रुपये का कमीशन मांगा था और कुछ अभ्यर्थियों को जेपीएससी परीक्षा पास कराने का आश्वासन दिया था।
अभय के अनुसार, टीडीपीएल ने रिश्वत देकर परीक्षा संचालन का टेंडर लिया और उसकी वसूली के लिए प्रत्येक सीट को 30 से 40 लाख रुपये में बेचने की योजना बनाई थी। रिश्वत व कमीशन के बिंदु पर टीडीपीएल व एल. खियांग्ते के बीच कई दौर की बैठक भी हुई थी।
पूर्व में चार दिनों तक सीआइडी कर चुकी है पूछताछ
एल. खियांग्ते से पूर्व में सीआईडी चार दिनों तक पूछताछ कर चुकी है। उन्हें सीआइडी ने यह भी कहा था कि रिमांड पर लिए गए अन्य आरोपितों से पूछताछ के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर उन्हें फिर पूछताछ के लिए बुलाया जाना था। इसी बीच उनके विरुद्ध सामने आए तथ्यों के आधार पर सीआइडी ने अंतिम रूप से उनकी गिरफ्तारी कर ली।
14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सहित अन्य भर्तियों में गड़बड़ी के आरोपों के बीच उन्होंने 22 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था। सीआईडी ने उनसे पहले कई दौर की पूछताछ की थी। उनकी गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक करीब 20 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।