झारखंड में भाजपा ने आंदोलन का बना दिया दो सेंटर, मुख्यमंत्री आवास पर धरना देकर सरकार पर बनाया दबाव
जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति में भ्रष्टाचार के विरोध में भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास पर धरना दिया और सीबीआई जांच की मांग की। पुलिस ने प्रदेश अध्यक् ...और पढ़ें
HighLights
भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास पर दिया धरना।
जेपीएससी-जेएसएससी घोटाले की सीबीआई जांच की मांग।
आदित्य साहू, बाबूलाल मरांडी हिरासत में लिए गए।
दिव्यांशु, रांची। जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति में भ्रष्टाचार के विरोध में चल रहे छात्रों के आंदोलन में सीधे शामिल होने की जगह भारतीय जनता पार्टी ने प्रदर्शन के दो केंद्र बना दिए। सोमवार सुबह छात्रों को विधानसभा घेराव करने से रोकने में पुलिस प्रशासन लगा हुआ था। लेकिन सुबह करीब दस बजे भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री आवास के पास पहुंच गए।
दोनों नेता वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए और छात्रों के समर्थन में नारे लगाने लगे। कुछ ही मिनटों में भाजपा से सभी विधायक और अन्य नेता भी वहां पहुंच गए। इसके बाद करीब 45 मिनट तक भाजपा नेता मुख्यमंत्री के इस्तीफे और जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग करते रहे।
इसके बाद आनन फानन में पुलिस पहुंची और भाजपा नेताओं को हिरासत में लेकर बस में बिठाया गया। मुख्यमंत्री आवास के सामने से बस में बिठाकर आदित्य साहू समेत सभी नेताओं और विधायकों को पुलिस खेलगांव स्थित कैंप जेल ले गई। खेलगांव से आदित्य साहू, बाबूलाल मरांडी, सीपी सिंह वीडियो संदेश जारी कर आंदोलन कर रहे छात्रों की मांग का समर्थन करते रहे।
छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगाा संघर्ष: आदित्य साहू
छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों की आवाज बुलंद करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर जेपीएससी- जेएसएससी महाघोटाले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया है।
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राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं के हक और न्याय की इस लड़ाई में भाजपा पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है। न्याय मिलने और सीबीआइ जांच तक संघर्ष जारी रहेगा। सरकार भले हमें गिरफ्तार करे, भाजपा कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं।
दिखावे के लिए हुई है खियांग्ते की गिरफ्तारी: बाबूलाल मरांडी
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की सीआइडी द्वारा गिरफ्तारी महज दिखावे की है। राज्य सरकार विनय चौबे की तरह इन्हें भी बिना चार्जशीट दाखिल किए डिफाल्ट बेल दिलाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगी।
छात्रों की मांग सिर्फ जेपीएससी तक सीमित नहीं है। जेएसएससी की सहायक आचार्य, सीजीएल, उत्पाद सिपाही और पीजीटी जैसी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली कर नौकरियां बेची गई है।
सरकार यदि कार्रवाई करना चाहती है, तो जेपीएससी के तीनों सदस्यों के साथ जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जिम्मेदार नीरज सिन्हा और सुधीर गुप्ता तथा अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड अपने पास रखने वाले विनोद कुमार की भी गिरफ्तारी करे। जेएसएससी के प्रभारी चेयरमैन प्रशांत कुमार को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज की जाए।