चतरा में होलिका दहन की अनोखी परंपरा, जलती हुई लकड़ी बताती है कैसा रहेगा साल
चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड के खैरा गांव में 200 साल पुरानी होलिका दहन की अनोखी परंपरा है। यहां जलती हुई होलिका की मुख्य लकड़ी की गिरने की दिशा से आने ...और पढ़ें
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होलिका दहन की अनोखी परंपरा। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पंकज सिंह, इटखोरी (चतरा)। झारखंड के चतरा जिले में इटखोरी प्रखंड के बाभन टोला स्थित खैरा गांव में होलिका दहन की परंपरा करीब दो सौ वर्षों से चली आ रही है। हर वर्ष यहां होलिका दहन का आयोजन पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया जाता है। जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
इस होलिका दहन की खास बात यह है कि जलती हुई होलिका की मुख्य लकड़ी जिस दिशा में गिरती है। उसके आधार पर आने वाले साल की स्थिति का आकलन किया जाता है।
उत्तर दिशा की तरफ गिरना शुभ संकेत
स्थानीय पंडितो और बुजुर्गो के अनुसार यदि लकड़ी उत्तर दिशा में गिरती है, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। जिससे अच्छी बारिश और बेहतर फसल की संभावना जताई जाती है।
वहीं, लकड़ी के दक्षिण दिशा में गिरने को कठिन समय और कम वर्षा का संकेत माना जाता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी लोगों की आस्था इससे गहराई से जुड़ी हुई है।
भले ही अब अलग-अलग मोहल्लों और गांवों में भी होलिका दहन होने लगा है, लेकिन बाभन टोला का आयोजन क्षेत्र का सबसे पुराना और प्रमुख माना जाता है।
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