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कश्मीर से 310 बांग्लादेशी निकाले गए, अब जम्मू में तैयार हो रहा एक्शन प्लान; 15000 अवैध प्रवासियों पर होगी कार्रवाई

Published: Thu, 08 Oct 2026 10:31 AM (GMT+05:30)

कश्मीर से 310 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा गया है, जिसके बाद जम्मू में भी अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग तेज हो गई है।

फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।

फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. 160 बांग्लादेशी घुसपैठियों को विशेष विमान से असम भेजा गया

  2. तीन दिन में कुल 310 बांग्लादेशी कश्मीर से वापस भेजे गए

  3. जम्मू में अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर कार्रवाई की मांग

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कश्मीर में कार्रवाई जारी है। बुधवार को 160 और बांग्लादेशियों को विशेष विमान से असम के कुंभीग्राम भेजा गया।

इन्हें बीएसएफ के हवाले किया गया और फिर तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बांग्लादेशी अधिकारियों के हवाले कर दिया जाएगा। इससे पूर्व सोमवार को भी 150 घुसपैठियों को बंगाल के बागडोगरा में भेजा गया था।

इस कार्रवाई के बाद अब जम्मू से आवाज उठने लगी है कि संभाग में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चले। सामाजिक संगठनों के अनुसार जम्मू घुसपैठियों का बड़ा केंद्र बन रहा है और यहां बांग्लादेशियों द्वारा पहचान छिपाकर कई सब्जी बचने वाले, मजदूरी करने वाले के रूप में काम करने वालों की सूचनाएं आती रही हैं।

रोहिग्याओं की बसी है बस्तियां

बांग्लादेशियों के साथ ही यहां रोहिंग्याओं की बस्तियां बसी हैं। एक अनुमान के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 15 हजार से अधिक रोहिंग्या हैं और इसमें से ज्यादातर जम्मू शहर में ही रह रहे हैं।

इसी वर्ष अगस्त में जनसांख्यिकीय बदलाव का अध्ययन करने आई केंद्र की उच्चस्तरीय समिति के जम्मू दौरे के दौरान स्थानीय संगठनों ने बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई थी। समिति की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 504 बांग्लादेशी रह रहे हैं। हालांकि दस्तावेज की सही पड़ताल होने पर यह संख्या कई गुणा हो सकती है।

116 पुरुष और 44 महिलाएं असम भेजे गए

बुधवार को असम भेजे बांग्लादेशियों में 116 पुरुष व 44 महिलाएं शामिल हैं। इसके साथ ही तीन दिन में वापस भेजे गए बांग्लादेशियों की संख्या 310 हो गई है। सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठिये कश्मीर में विभिन्न जगहों पर मजदूरी व अन्य काम कर रहे थे।

आतंकियों ने प्रवासियों को बनाया निशाना, सुरक्षा एजेंसियों ने किया पंजीकरण तो हुआ खुलासा, 15000 से ज्यादा अवैध प्रवासी

आतंकियों द्वारा अन्य राज्यों के श्रमिकों को निशाना बनाए जाने की धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने श्रमिकों का पंजीकरण शुरू किया। इस दौरान उनके दस्तावेजों की जांच के दौरान कई विसंगतियां मिलीं। सुरक्षा एजेंसियां अब बांग्लादेशियों के कश्मीर पहुंचने के रास्तों की भी पड़ताल कर रही हैं।

जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार डॉ. अजय च्रंगू ने कहा कि एक सुनियोजित साजिश के तहत इन घुसपैठियों को जम्मू व आसपास बसाया गया था। इन्हें वापस भेजने के साथ उन लोगों की भी पहचान होनी चाहिए, जिन्होंने इन्हें यहां बसाने में मदद की। इसके राशन कार्ड बनवाए और बिजली-पानी के कनेक्शन तक दिलवाए।

जम्मू-कश्मीर बेहद संवेदनशील राज्य

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का आभार जताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य को पूरी तरह सैनिटाइज करना होगा ताकि घुसपैठियों को बाहर निकाल सकें। हमें आशा है कि शेष राज्य सरकारें भी द्रुत गति से इस मामले में आगे बढ़ेंगी जिससे हम अपने देश को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व सुरक्षा की दृष्टि से समृद्ध बना सकेंगे।

भाजपा नेता एडवोकेट राजेश गुप्ता ने कहा कि जम्मू संभाग के आसपास भी बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों और अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं की पहचान होनी चाहिए। केंद्र सरकार को चाहिए कि जिस तरह से कश्मीर में ऐसे घुसपैठियों को वापस भेजा रहा रहा है, जम्मू व आसपास के क्षेत्र में भी अभियान चलाया जाए।

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