कश्मीर में सेब सीजन ने बढ़ाई ट्रैफिक की टेंशन, शोपियां में रोज जाम; पीक आवर्स में ट्रकों की एंट्री रोकने की मांग
शोपियां में सेब की कटाई के चरम पर होने के कारण सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही से भीषण ट्रैफिक जाम लग ...और पढ़ें

शोपियां में सेब ट्रकों से यातायात बाधित, यात्रियों को भारी परेशानी।(फाइलफोटो)
HighLights
शोपियां में सेब की कटाई से यातायात जाम की समस्या बढ़ी।
सैकड़ों सेब लदे ट्रकों से सड़कों पर आवाजाही हुई मुश्किल।
स्थानीय लोगों ने प्रभावी यातायात प्रबंधन योजना की मांग की।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले से सेब ले जाने वाले सैकड़ों ट्रकों की वजह से लंबे समय तक ट्रैफिक जाम लग रहा है। फल तोड़ने का मौसम अपने चरम पर है, जिससे लोगों को सड़कों पर चलने में काफी परेशानी हो रही है। पूरे जिले में फल तोड़ने का काम तेज़ी से चल रहा है, इसलिए सेब उगाने वाले गांवों से शोपियां फ्रूट मंडी तक सेब ले जाने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में फलों से लदे ट्रक शोपियां शहर में आते हैं।
हाल के हफ्तों में यह आवाजाही और बढ़ गई है, और ट्रक पूरे दिन, खासकर पीक आवर्स के दौरान शहर से गुजरते हैं। भारी वाहनों के लगातार आने-जाने से मुख्य रास्तों पर ट्रैफिक धीमा हो गया है, जिससे लोगों को काम पर जाने और घर लौटने में देरी हो रही है।
शिरमल और रंगकदल पुल के पास जाम से लोग परेशान
आवाजाही करने वाले तनवीर अहमद ने कहा, 'शिरमल और रंगकदल पुल के पास जहाँ से रास्ता अगलर मंडी की ओर जाता है, अक्सर ट्रैफिक जाम लगता है।' उन्होंने कहा कि कटाई का मौसम शुरू होने के बाद से ही जाम की समस्या रोज़ की बात हो गई है।
उन्होंने कहा, 'मुझे काम पर पहुँचने में देर हो रही है और घर लौटते समय भी देरी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को शहर से भारी गाड़ियों की आवाजाही को रेगुलेट करना चाहिए।'
कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि फल ले जाने वाले ट्रकों को शाम 6 बजे के बाद शहर में आने की अनुमति दी जानी चाहिए, जब लोगों की आवाजाही कम होने लगती है।
समय पर ट्रांसपोर्टेशन पर हजारों किसानों की निर्भरता
गौरतलब है कि शोपियां घाटी के प्रमुख सेब उत्पादक ज़िलों में से एक है, और बागों से घाटी के अंदर और बाहर बाज़ारों तक फसल पहुंचाने के लिए ट्रकों की आवाजाही बहुत ज़रूरी है। हज़ारों किसान समय पर ट्रांसपोर्टेशन पर निर्भर हैं, इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी ट्रैफ़िक नियम से कृषि उत्पादों की आवाजाही में रुकावट नहीं आनी चाहिए।
पीक आवर्स में शहर में ट्रकों की एंट्री से बढ़ती परेशानी
एक सामाजिक कार्यकर्ता मीठा गाटू ने कहा कि वह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए फलों के व्यापार के महत्व को समझते हैं, लेकिन उनका मानना है कि भारी गाड़ियों की आवाजाही को बेहतर ढंग से मैनेज करने की जरूरत है।
गाटू ने कहा, 'फलों का उद्योग इस इलाके के लोगों की आर्थिक जीवनरेखा है। ट्रकों की आवाजाही में किसी भी तरह की रुकावट से किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि फलों के ट्रकों की बिना रुकावट आवाजाही के कारण शहर में आम ट्रैफिक पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, 'पीक आवर्स के दौरान भारी ट्रकों को शहर में घुसने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।'
ट्रैफ़िक-मैनेजमेंट प्लान की जरूरत
गाटू ने कहा कि व्यस्त समय में ट्रकों की लंबी कतारों से ट्रैफिक जाम बढ़ रहा है और आने-जाने वालों को परेशानी हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारी फल ले जाने वाले भारी वाहनों के लिए खास समय या रास्ते तय कर सकते हैं, ताकि खेती-बाड़ी के सामान की आवाजाही भी होती रहे और शहर का ट्रैफिक भी न रुके।
आने वाले हफ़्तों में सेब की कटाई ज़ोरों पर रहने की उम्मीद है, इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि पीक सीज़न के दौरान ट्रैफ़िक जाम की समस्या को और बिगड़ने से रोकने के लिए तुरंत ट्रैफ़िक-मैनेजमेंट प्लान की जरूरत है।
