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लड़का होगा या लड़की... जांचकर बताने के लेते थे 1 लाख रुपये; सोनीपत में डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार

Published: Tue, 11 Aug 2026 12:27 PM (IST)Updated: Tue, 11 Aug 2026 12:39 PM (IST)

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चरखी दादरी में अवैध भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक बीएमएस डॉक्टर ...और पढ़ें

कार्रवाई के दौरान एक बीएमएस डॉक्टर समेत तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

कार्रवाई के दौरान एक बीएमएस डॉक्टर समेत तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

HighLights

  1. चरखी दादरी में अवैध भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़।

  2. एक बीएमएस डॉक्टर सहित तीन आरोपी रंगे हाथों गिरफ्तार।

  3. स्वास्थ्य विभाग ने 1 लाख रुपये की डील की रकम बरामद की।

संदीप मच्छरी, सोनीपत। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अंतर-जिला कार्रवाई करते हुए चरखी दादरी में चल रहे अवैध भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान एक बीएमएस डॉक्टर समेत तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

स्वास्थ्य विभाग को मिली थी सूचना

टीम ने अवैध लिंग जांच के लिए वसूली गई रकम भी बरामद कर ली। मामले में चरखी दादरी के सिटी थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग को मिली गुप्त सूचना के आधार पर सोनीपत से एक विशेष टीम गठित की गई। इसमें पीसी-पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कौशिक, डॉ. योगेश दहिया और चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा शामिल थे।

भ्रूण लिंग जांच के लिए हो रही थी सौदेबाजी

टीम ने चरखी दादरी की स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के सहयोग से कार्रवाई अंजाम दी। जांच में सामने आया कि चरखी दादरी स्थित प्रधान अस्पताल में कार्यरत बीएमएस डॉक्टर डॉ. विभूति वत्स कथित रूप से अवैध भ्रूण लिंग जांच के लिए सौदेबाजी कर रहा था। इस पूरे मामले में अस्पताल के एक्स-रे तकनीशियन रविंदर की भी संलिप्तता सामने आई।

1.20 लाख में हुई थी डील

योजना के तहत अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पंजीकृत केंद्र सुविधा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का इस्तेमाल किया गया। वहां औपचारिकता के तौर पर रेफरल पर्ची और फॉर्म-एफ भरवाया गया, लेकिन मौके पर एएनसी रजिस्टर का रखरखाव नहीं पाया गया।

भ्रूण का लिंग बताने के लिए डॉ. विभूति ने पहले 1.20 लाख रुपये की मांग की। बातचीत के बाद सौदा एक लाख रुपये में तय हुआ। इसमें 40 हजार रुपये एडवांस के रूप में डॉ. विभूति के कहने पर उसके एक मित्र के फोनपे खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए। शेष 60 हजार रुपये अल्ट्रासाउंड के बाद नकद दिए गए।

कोडवर्ड में ‘वेरी गुड न्यूज-बाय’ कहा

अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉ. विभूति वत्स ने फोन पर गर्भस्थ शिशु का लिंग बताते हुए कोडवर्ड में ‘वेरी गुड न्यूज-बाय’ कहा। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल दबिश देकर कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान टीम ने अवैध लिंग जांच के लिए दी गई पूरी रकम बरामद कर ली। मामले में चरखी दादरी के सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज कर तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

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