'यहां सब मजहब के लोग...', Sharmila Tagore के 'वंदे मातरम' पर दिए बयान से मची हलचल; बताया क्या है सबके लिए सही?
शर्मिला टैगोर ने 'वंदे मातरम' को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे सोशल मीडिया पर काफी हलचल मच गई ...और पढ़ें

शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम पर दिया बयान/ फोटो- Instagram
HighLights
शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम पर बयान की सफाई दी
भारत की विविधता के कारण शुरुआती दो छंद उचित बताए
मुकेश खन्ना ने भी राष्ट्रगान बदलने की सलाह दी थी
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर (Sharmila Tagore) ने हाल ही में वंदे मातरम को लेकर एक बयान दिया था, जोकि इंटरनेट पर काफी वायरल हो रहा है। अब एक्ट्रेस ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं को देखते हुए 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो छंद ही अपनाना सही फैसला है।
'भारत में अलग-अलग मजहब के लोग रहते हैं'
शर्मिला टैगोर ने समाचार एजेंसी आईएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "मेरा मानना है कि भारत में अलग-अलग मजहब के लोग रहते हैं, जो एक ही भगवान पर यकीन करते हैं, अलग-अलग पर नहीं। वंदे मातरम के जो छंद हैं, वह अलग-अलग भगवान की वंदना करते हैं, जब आप उसे पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा, उसमें सभी गॉड्स के बारे में नामों के साथ मेंशन हैं।
शर्मिला टैगोर ने कहा, " जो एक ही धर्म में विश्वास करते हैं उनके लिए मुश्किल है कहना। वंदे काली, वंदे दुर्गा...ये कहना मुश्किल है। तो इसलिए ही भारत में जितने धर्मों के लोग हैं, उसको अगर हम इकट्ठा साथ लेकर चले तो पहले दो छंद अच्छे हैं।"
शर्मिला टैगोर से पहले मुकेश खन्ना ने दी थी राष्ट्रगान बदलने की सलाह
शर्मिला टैगोर के रिएक्शन से पहले मुकेश खन्ना ने भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' से बदलकर 'वंदे मातरम' करने की सलाह दी थी। उन्होंने दावा किया था कि जन गण मन महारानी एलिजाबेथ को श्रद्धांजलि अर्पित करने के रूप में लिखा गया था। मुकेश खन्ना ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा था कि, "मैंने तीन साल पहले ही ये कहा था कि 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान बनाना चाहिए। 'जन गण मन'हमारे देश का राष्ट्रगान नहीं है। यह क्वीन एलिजाबेथ को एक श्रद्धांजलि है। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने यह गीत उनकी सराहना में लिखा था।"

मुकेश खन्ना ने आगे कहा था, "हमने इस गीत को स्वीकार कर लिया, भाग्यविधाता, पंजाब, सिंध हमारा नहीं है, बल्कि 'वंदे मातरम' हमारा है। लता दीदी ने इसे बहुत ही खूबसूरत तरीके से गाया है। मैंने कल्याण आंनदजी भाई के साथ मीटिंग की थी। दो साल हो गए मुझे ये पढ़े हुए दो साल हो गए। मैंने सात मिनट का एक वंदे मातरम गाना भी रिकॉर्ड किया था जो आइकॉनिक बन जाएगा।"
