वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी परिषद की बैठक में जो फैसले लिए गए, वे समय की मांग थे। इस परिषद का सबसे उल्लेखनीय फैसला इस विभाग के अधिकारियों से गिरफ्तारी के अधिकार को खत्म करने का है। यह फैसला इसलिए उचित है, क्योंकि इसके पहले की वैट व्यवस्था में भी टैक्स अधिकारियों को यह अधिकार प्राप्त नहीं था।

इस फैसले से कारोबार जगत को राहत मिलेगी, क्योंकि इस अधिकार के चलते सही तरीके से कारोबार करने वाले व्यापारियों में भी अनावश्यक डर का माहौल बना रहता था। गिरफ्तारी का अधिकार खत्म होने से जीएसटी विभाग का ध्यान टैक्स की वसूली, खातों की जांच और जुर्माने पर ही अधिक रहेगा।

यह भी उचित फैसला है कि यदि फर्जी बिलिंग या टैक्स चोरी का कोई मामला सामने आता है तो उसका निपटारा सामान्य धोखाधड़ी के रूप में किया जाएगा। जीएसटी परिषद ने कुछ अन्य फैसले भी लिए हैं, जैसे 10 दिनों में रिफंड की मंजूरी और 17 दिनों में उसका भुगतान। अब रिटर्न में किसी तरह की गड़बड़ी के चलते कारोबारियों को कारण बताओ नोटिस से राहत मिलेगी और दस हजार से कम की टैक्स डिमांड पर कारण बताओ नोटिस नहीं आएगा। इसके अतिरिक्त छोटे ई कामर्स आपरेटरों को अलग-अलग राज्यों में कारोबार के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। छोटे कारोबारियों को अब 30 दिनों के अंदर पेनाल्टी देने पर छूट भी मिलेगी।

जीएसटी परिषद को अपने फैसलों के सकारात्मक परिणामों पर तो नजर रखनी ही चाहिए। इसी के साथ उसे यह भी देखना होगा कि इस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगे। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि नियम-कानूनों में किसी तरह के उल्लंघन का हवाला देकर टैक्स अधिकारी कारोबारियों को तंग करते हैं और उनसे अवैध वसूली करते हैं। कोई भी टैक्स व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो किसी को भी बेवजह तंग न कर सके। इससे ही उद्योग-व्यापार फलेंगे-फूलेंगे और ऐसा होना वक्त की एक बड़ी मांग है।

ध्यान रहे कि देश के साथ विदेश के भी कारोबारी टैक्स संबंधी नियमों को सरल और सुगम बनाने की मांग करते ही रहते हैं। यह मांग पूरी होनी चाहिए, क्योंकि इससे कारोबार जगत में भरोसा बढ़ता है और इसके नतीजे में उसे गति मिलती है। जैसे जीएसटी विभाग से यह अपेक्षित है कि वह कारोबार को तेजी के साथ फलने-फूलने वाला माहौल बनाए, वैसे ही कारोबारियों के लिए भी यह जरूरी है कि वे नियम-कानूनों के पालन को लेकर प्रतिबद्ध रहें। टैक्स चोरी के मामले थमने ही चाहिए। जीएसटी के नियमों में लगातार सुधार किए जाने के बाद अब इस शिकायत के लिए गुंजाइश नहीं रह जाती कि व्यवस्था जटिल है। समय और तकनीक के साथ कदमताल मिलाना कारोबारियों की भी जिम्मेदारी है।