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चंद मिनटों का फासला... किसी ने पी चाय, कोई मेट्रो पर था; सत्य निकेतन हादसे में ऐसे बची कई जिंदगियां

By Gouri Edited By: Anup Tiwari
Published: Tue, 08 Sep 2026 05:45 AM (IST)

सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने से कई छात्रों की जान बाल-बाल बची, जबकि कुछ मलबे में फंस गए। हादसे ...और पढ़ें

सत्य निकेतन मार्केट स्थित पीजी में जाने के लिए सीढ़ियों के पास लगे बिजली के मीटर। जागरण

सत्य निकेतन मार्केट स्थित पीजी में जाने के लिए सीढ़ियों के पास लगे बिजली के मीटर। जागरण

HighLights

  1. हादसे से कुछ मिनट पहले छात्र पीजी से निकले।

  2. चंद मिनटों के फर्क ने कई छात्रों की जान बचाई।

  3. मलबे में फंसे दोस्तों को तलाश रहे हैं अन्य छात्र।

गौरी शर्मा, दक्षिणी दिल्ली। छात्र ऋषभ हादसे से करीब 10 मिनट पहले दोस्त अर्थव के साथ इमारत के नीचे चाय पीकर निकला था। हादसे से चार मिनट पहले अर्थव ने संदेश भेजा कि वह नहाकर निकल रहा है। इसके बाद इमारत भरभराकर गिर गई। ऋषभ सोमवार को भी मलबे और अस्पतालों में दोस्त को तलाशता रहा।

ऐसी ही कई कहानी सत्य निकेतन में रविवार को पीजी की इमारत गिरने की है। जानकारी के मुताबिक हादसे के कुछ समय पहले तक छात्र अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त थे। कोई दोस्त के साथ चाय पी रहा था, कोई नहाकर बाहर निकलने की तैयारी कर रहा था और किसी का शाम को फिल्म देखने का प्लान था।

लेकिन कुछ ही मिनट बाद सबकुछ बदल गया। वहीं, कुछ छात्रों की जान महज कुछ मिनट पहले पीजी से निकल जाने के कारण बच गई।

कुछ मिनटों ने बचाई छात्रों की जान

-तन्मय की दोस्त पीजी में दस्तावेज लेने आ रही थी। वह दुर्गा बाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन पहुंच चुकी थी। उसके पीजी पहुंचने से करीब पांच मिनट पहले ही इमारत गिर गई। वहीं एक छात्र जन्माष्टमी की छुट्टी पर अपने चाचा के घर गया हुआ था। जिसके कारण इन लोगों की जान बच गई।

बोले छात्र

अर्थव के साथ हादसे से दस मिनट पहले वहीं चाय पी थी। शाम को घूमने का प्लान था, पर उससे पहले ही पता चला कि बिल्डिंग गिर गई है।
-ऋषभ, छात्र

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इसी पीजी में रहने वाले दोस्त तेजू के साथ मूवी देखने जाने का प्लान था, पर उससे पहले इमारत अचानक गिर गई। अब तक उसका पता नहीं चला है।
-माथुर, छात्र

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मेरी दोस्त पीजी में दस्तावेज लेने जा रही थी। वह मेट्रो स्टेशन पहुंच चुकी थी। पांच मिनट पहले पहुंच जाती तो शायद वह भी हादसे की चपेट में आ जाती।
-तन्मय, छात्र

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मेरी क्लासमेट की हादसे से पहले पीजी में रहने वाले दोस्त से बात हुई थी। करीब 10 मिनट पहले ही वह दूसरे दोस्त के पीजी में चला गया, जिससे वह सुरक्षित रहा।
-विदिशा, छात्र

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