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सत्य निकेतन हादसे के बाद सहमे छात्रों के लिए कॉलेजों ने खोले दरवाजे, रात में 72 विद्यार्थियों ने ली शरण

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:44 AM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 07:10 AM (IST)

सत्य निकेतन हादसे के बाद दक्षिणी दिल्ली के कई कॉलेजों ने प्रभावित छात्रों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। ...और पढ़ें

श्री वेंकटेश्वर कालेज में भोजन लेते छात्र। जागरण

श्री वेंकटेश्वर कालेज में भोजन लेते छात्र। जागरण

HighLights

  1. सत्य निकेतन हादसे के बाद कई कॉलेजों ने मदद की।

  2. श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ने 72 छात्रों को आश्रय दिया।

  3. प्राचार्य और स्टाफ ने छात्रों के साथ रात बिताई।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद दक्षिणी दिल्ली के कई कालेज प्रभावित छात्र-छात्राओं की मदद के लिए आगे आए हैं। श्री वेंकटेश्वर कालेज, राम लाल आनंद कालेज, शहीद भगत सिंह कालेज सहित कई कालेजों ने विद्यार्थियों के लिए दरवाजे खोले हैं।

कालेजों की ओर से छात्रों के ठहरने के लिए हास्टल और कक्षाओं में जगह बनाई गई है। साथ ही भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए कालेज कैंटीन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। हादसे वाली जगह के बिल्कुल पास मौजूद श्री वेंकटेश्वर कालेज में रविवार शाम से विद्यार्थियों के भोजन ठहरने व्यवस्था कर दी गई थी।

आस-पास रहने वाले विद्यार्थियों को शरण देने के लिए कालेज ने 10 कमरों को खाली कराने के बाद रुकने की व्यवस्था की है। कालेज के स्टाफ सहित प्राचार्य वी रवि ने भी कालेज में विद्यार्थियों के साथ ही रात गुजारी।

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प्राचार्य ने बताया कि रविवार रात को कुल 46 छात्रों और 26 छात्राओं ने कालेज में शरण ली। ये सभी विद्यार्थी ढही इमारत के आस-पास पीजी में रहते हैं और हादसे को बाद सहमे हुए थे। उन्होंने कहा कि डीयू के किसी भी कालेज से अन्य संस्थान से भी पढ़ाई कर रहे जो विद्यार्थी सत्य निकेतन रहते हैं आकर कालेज में रुक सकते हैं। दिन-रात शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों सहित स्टूडेंट वालंटियर भी हर संभव मदद में जुटे हैं।

क्या बोले बच्चे


मैं बिहार से हूं और सत्य निकेतन के पीजी में रहती हूं। हादसे के बाद हम लोग काफी डरे हुए थे तो मैं रात को कालेज आकर ही रुकी हूं। सभी पीजी में सुविधाओं को लेकर नियमों का पालन सख्ती से होना चाहिए।
- शांभवी


मैं आगरा से हूं और यहां पीजी में रहती हूं। हादसे के बाद परिवार के लोग काफी सहमे हुए हैं और मुझे भी डर लग रहा था। इसलिए मैं यहां आई हूं। पीजी में पैसे लेने के बावजूद हम लोगों को सुविधा नहीं मिलती हैं।
- लक्षिता

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