साथ पढ़े, साथ रहे, साथ देखे सपने... सत्य निकेतन हादसे में हमेशा के लिए बिछड़ गए युवराज-अभिषेक
सत्य निकेतन इमारत हादसे में दो गहरे दोस्त अभिषेक और युवराज की मौत हो गई, जो एक ही कमरे और ...और पढ़ें

युवराज व अभिषेक कुमार। फाइल फोटो
HighLights
सत्य निकेतन इमारत हादसे में दो गहरे दोस्त बिछड़ गए।
अभिषेक और युवराज एक ही कमरे, कॉलेज में पढ़ते थे।
उज्ज्वल भविष्य के सपने लेकर दिल्ली आए छात्रों की मौत।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सत्य निकेतन में रविवार को भरभराकर गिरी इमारत ने दो ऐसे दोस्तों को हमेशा के लिए जुदा कर दिया, जो कमरे से लेकर कक्षा तक हर पल साथ रहते थे।
एक ही कालेज, एक ही कक्षा और एक ही कमरे में रहने वाले अभिषेक और युवराज सोनी की दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों की दिनचर्या भी एक-दूसरे के बिना अधूरी थी। उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर दिल्ली आए दोनों दोस्तों को शायद नहीं पता था कि जिस शहर में वे अपने सपनों को आकार देने आए हैं, वहीं एक हादसा उनकी जिंदगी का अंत कर देगा।
सोनभद्र का रहने वाला अभिषेक करीब दो साल पहले दिल्ली आया था। उसने मोतीलाल नेहरू कालेज में बीकाम में दाखिला लिया था। शुरुआत में वह मोती बाग स्थित एक पीजी में रहा, लेकिन करीब एक साल बाद वहां से निकलकर सत्य निकेतन की उसी इमारत में रहने लगा, जो रविवार को भरभराकर गिर गई।
हादसे की सूचना मिलते ही अभिषेक के स्वजन घबराए हुए घटनास्थल पहुंचे। काफी तलाश के बाद भी जब वहां कुछ पता नहीं चला तो वे एम्स ट्रामा सेंटर पहुंचे। वहां उन्हें वह खबर मिली, जिसे सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अभिषेक अब इस दुनिया में नहीं रहा था। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को स्वजन उसका शव लेकर सोनभद्र के लिए रवाना हो गए।
वहीं, छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी युवराज सोनी भी करीब दो साल से इसी इमारत में रह रहा था। हादसे के बाद उसके दोस्तों आर्यन और माधव ने परिवार को युवराज की मौत की सूचना दी। सोमवार सुबह स्वजन एम्स ट्रामा सेंटर पहुंचे। बेटे का शव देखकर पिता बेसुध हो गए। भाई की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। यह दृश्य देखकर युवराज के दोस्तों की आंखें भी नम हो गईं।
रूम से लेकर कक्षा तक साथ रहता था दोनों का साया
अभिषेक और युवराज एक ही कमरे में रहते थे और एक ही कक्षा में पढ़ते थे। साथ पढ़ना, साथ खाना-पीना, घूमना और भविष्य के सपने देखना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। दोनों दोस्तों के अचानक चले जाने से उनके साथी स्तब्ध हैं। जिन कमरों और गलियारों में कल तक दोनों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ उनकी यादें रह गई हैं।
इंटरनेट मीडिया पर मिली हादसे की सूचना
वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले अन्य छात्र पवन की भी दर्दनाक मौत हो गई। ओरैया का रहने वाला पवन कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहा था और उसका पहला वर्ष ही था। पवन के भाई धीरज ने बताया कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर हादसे की सूचना मिली थी।
सूचना मिलते ही वह बहन प्रियांशी के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए। सबसे पहले वह घटनास्थल पर पहुंचकर भाई को रातभर ढूंढते रहे। जब-जब रेस्क्यू कर मलबे से छात्रों को निकाला जा रहा था तो उनकी उम्मीद जग रही थी कि कहीं उनका भाई तो नहीं, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
इसके बाद वह भाई की तलाश में एम्स ट्रामा सेंटर पहुंचे, जहां पता चला कि उनके भाई की मौत हो गई है। यह सुनकर उनके होश उड़ गए और हिम्मत जुटाकर परिवार को सूचित किया। सोमवार को उसकी पहचान कर पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजन को सौंप दिया गया।
