NIA की चार्जशीट में 7 विदेशी लेकिन UAPA की धाराएं नहीं, म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण केस में नया मोड़
NIA ने म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण मामले में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें फिलहाल यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं।

मार्च 2026 में यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले में दाखिल आरोपपत्र में फिलहाल यूएपीए की कोई धारा नहीं लगाई गई है।
HighLights
NIA ने म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण मामले में सात विदेशियों पर आरोपपत्र दाखिल किया।
आरोपपत्र में फिलहाल यूएपीए की धाराएं शामिल नहीं की गईं।
आरोपियों ने म्यांमार में जातीय समूहों को हथियार और प्रशिक्षण दिया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कोर्ट में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इनमें छह यूक्रेनी नागरिक और एक अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। खास बात यह है कि मार्च 2026 में यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले में दाखिल आरोपपत्र में फिलहाल यूएपीए की कोई धारा नहीं लगाई गई है।
धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए
फिलहाल, आरोपितों के खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए हैं। ये धाराएं एफआरआरओ (फारेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) स्तर पर समझौते योग्य अपराध हैं। जबकि आरोपितों की गिरफ्तारी के समय एनआईए ने यूएपीए की धारा 18 (आतंकी साजिश) भी लगाई थी।
एजेंसी बाद में पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी
एनआईए की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) राहुल त्यागी ने दलील दी कि इस संबंध में जांच अभी जारी है। यदि जांच में यूएपीए के तहत अपराध बनता पाया गया तो एजेंसी बाद में पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है।
आरोपपत्र विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में दाखिल किया गया। अदालत ने आरोपपत्र पर विचार के लिए एक अक्टूबर की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से राहुल त्यागी के साथ अधिवक्ता जतिन खत्री और अमित रोहिला पेश हुए।
छह यूक्रेनी आरोपितों की ओर से अधिवक्ता नितिन सलूजा और गरिमा सिंह व अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की ओर से अधिवक्ता रोहित दांद्रियाल और रोहित गौर पेश हुए।
180 दिन से हिरासत में हैं सातों विदेशी
मामले में गिरफ्तार सात आरोपितों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक तथा यूक्रेन के हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होन्चारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। सभी को मई 2026 में गिरफ्तार किया गया था और करीब 180 दिन से हिरासत में हैं।
एनआईए ने आरोप लगाया था कि आरोपित म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार, आतंकी हार्डवेयर और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक इन समूहों के संबंध भारत में सक्रिय कुछ प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से भी जुड़े हैं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपित यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन की बड़ी खेप लेकर आए थे।
मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचने का आरोप
एनआईए के मुताबिक आरोपित भारत वीजा पर आए और इसके बाद मिजोरम के संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश किया। वहां से वे म्यांमार पहुंचे और वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों के संपर्क में आए। एजेंसी का आरोप था कि उन्होंने वहां प्रशिक्षण लिया और बाद में इन समूहों के सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया।
"आरोपपत्र में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाए जाने का यह अर्थ नहीं है कि अदालत यूएपीए के अपराध पर विचार नहीं कर सकती। आरोपपत्र पर संज्ञान लेते समय अदालत यह देखती है कि जांच के दौरान सामने आई सामग्री से कौन-कौन से अपराध बनते हैं। यदि रिकाॅर्ड पर यूएपीए के तहत अपराध के पर्याप्त तत्व मौजूद पाए जाते हैं तो अदालत कानून के अनुसार उस अपराध का संज्ञान ले सकती है। एक अक्टूबर को आरोपपत्र पर अदालत के विचार और संज्ञान के बाद ही मामले की कानूनी दिशा अधिक स्पष्ट होगी।"
-तरुण राणा, वरिष्ठ अधिवक्ता।
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