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Transit Area में कई दिन फंसे यात्रियों को मिलती हैं कौन-कौन सी सुविधाएं? दिल्ली HC का केंद्र से सीधा सवाल

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:00 PM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 09:00 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से एयरपोर्ट के ट्रांजिट एरिया में कई दिनों तक फंसे यात्रियों को मिलने वाली ...और पढ़ें

यात्रियों के ट्रांजिट एरिया में आराम से रहने के लिए भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

यात्रियों के ट्रांजिट एरिया में आराम से रहने के लिए भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब।

  2. एयरपोर्ट ट्रांजिट एरिया में यात्रियों की सुविधाओं पर सवाल।

  3. भोजन, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर जानकारी मांगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट के ट्रांजिट एरिया में कई दिनों तक रुकने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या ट्रांजिट एरिया में यात्रियों के आराम से रहने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।

अमानवीय व्यवहार और मूलभूत सुविधाओं का अभाव

यह आदेश यात्री पारस नारसी की याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर पारस को रोक लिया गया था और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

आरोप है कि ट्रांजिट एरिया में उन्हें भोजन और रहने जैसी बुनियादी जरूरतें भी मुहैया नहीं कराई गईं। याचिका में यह भी कहा गया कि 22 फरवरी, 2023 को हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश का पालन नहीं हुआ।

इसमें पारस को उनके सामान के साथ अहमदाबाद जाने की अनुमति देने और सुविधाओं पर जवाब देने का निर्देश दिया गया था।

केंद्र और एयर इंडिया का कोर्ट में पक्ष

सुनवाई के दौरान एयरलाइंस और केंद्र सरकार ने अपना-अपना पक्ष रखा...

  • एयर इंडिया का रुख: वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि पारस को इमिग्रेशन अधिकारियों (FRRO) ने रोका था, इसमें एयरलाइन की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेशानुसार 4 सप्ताह के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर दिया जाएगा।

  • केंद्र सरकार का पक्ष: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि पारस को कभी हिरासत में नहीं लिया गया था, बल्कि उन्हें केवल ट्रांजिट एरिया में रखा गया था, जहां वे स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते थे।

  • ट्रांजिट एरिया क्या होता है?

    एयरपोर्ट पर 'ट्रांजिट एरिया' एक सुरक्षित एयरसाइड ज़ोन होता है। यहाँ कनेक्टिंग फ्लाइट वाले यात्री बिना स्थानीय कस्टम या इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए अपनी अगली उड़ान का इंतजार करते हैं।

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यदि किसी यात्री को कई दिनों तक ट्रांजिट एरिया से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती है, तो उसके पास वहां सम्मानजनक और आरामदायक तरीके से रहने की व्यवस्था मौजूद हो।

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