5 साल में 32,596 मौतों का जिम्मेदार कौन? कहीं इमारत गिरी तो कहीं आग ने ली जान; NCRB का चौंकाने वाला खुलासा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020-2024 के बीच शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी घटनाओं में 32,596 लोगों की मौत हुई है, जिसमें आग लगने से सर्वाधिक 22,291 मौतें हुईं।

इमारत गिरने, आग लगने और गड्ढों में गिरने से पांच साल में 33 हजार लोगों की मौत हो गई। फोटो: आर्काइव
HighLights
पांच वर्षों में शहरी हादसों में 32,596 लोगों की मौतें
आग लगने की घटनाओं में सर्वाधिक 22,291 मौतें दर्ज हुईं
बुनियादी ढांचे की कमी और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के शहरों में बुनियादी ढांचे और नागरिक सुरक्षा को लेकर सरकारी आंकड़े गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। 2020 से 2024 के बीच इमारत गिरने, आग लगने और गड्ढों, मैनहोल या सीवर में गिरने जैसी घटनाओं में 32,596 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 22,291 मौतें आग लगने की घटनाओं में हुईं।
पांच वर्षों में 32,596 मौतें सिर्फ हादसों का आंकड़ा नहीं हैं। ये शहरों में निर्माण, रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
हर साल हजारों लोगों की मौत
NCRB आधारित आंकड़ों के अनुसार, 2020 में इन घटनाओं में कुल 7,556 मौतें हुईं। 2021 में यह संख्या 6,486, 2022 में 6,529, 2023 में 6,054 और 2024 में 5,971 रही।
| साल | बिल्डिंग गिरने | मैनहोल/सीवर | गड्ढे | बिल्डिंग फायर | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | 1,142 | 242 | 699 | 5,473 | 7,556 |
| 2021 | 1,261 | 234 | 625 | 4,476 | 6,486 |
| 2022 | 1,285 | 207 | 800 | 4,237 | 6,529 |
| 2023 | 1,216 | 219 | 728 | 3,991 | 6,054 |
| 2024 | 1,047 | 192 | 618 | 4,114 | 5,971 |
आग बनी मौतों की सबसे बड़ी वजह
पांच साल के आंकड़ों में आग से 22,291 मौतें हुईं। 2020 में अकेले आग से 5,473 मौतें दर्ज हुईं। 2021 में 4,476, 2022 में 4,237 और 2023 में 3,991 मौतें हुईं। 2024 में यह संख्या फिर बढ़कर 4,114 हो गई।
ताजा NCRB-आधारित रिपोर्टिंग के मुताबिक, 2024 में आग से होने वाली मौतों में बड़ी संख्या आवासीय या घरों में लगी आग से जुड़ी थी।
इमारतें गिरने का खतरा कायम
2020 से 2024 के बीच इमारत गिरने की घटनाओं में 5,951 लोगों की मौत हुई। 2022 में सबसे ज्यादा 1,285 मौतें दर्ज हुईं, जबकि 2024 में भी 1,047 लोगों की जान गई।
दिल्ली में भी यह खतरा सामने आया है। NCRB के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच दिल्ली में structure collapse से लगभग 170 मौतें दर्ज हुईं।
गड्ढे और मैनहोल भी जानलेवा
पांच वर्षों में गड्ढों में गिरने से 3,470 मौतें हुईं, जबकि मैनहोल या सीवर में गिरने से 1,094 लोगों की जान गई। गड्ढों से जुड़ी घटनाओं में 2022 सबसे घातक रहा। इस साल ऐसी घटनाओं में 800 मौतें दर्ज हुईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये केवल अचानक होने वाली दुर्घटनाएं नहीं हैं। बेहतर रखरखाव, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी से कई हादसे रोके जा सकते हैं।
32,596 मौतें पूरी तस्वीर नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़े शहरी नागरिक सुरक्षा से जुड़ी सभी मौतों की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते हैं। नगरपालिका सीमा के भीतर सड़क हादसों, जिनमें खराब सड़क या गड्ढों की भूमिका हो सकती है, और दूषित पानी से होने वाली मौतों का पूरा डेटा इसमें शामिल नहीं है। इसलिए 32,596 का आंकड़ा दर्ज मौतों का है, न कि शहरी नागरिक सुरक्षा से जुड़ी हर मौत का।
आंकड़ों ने जवाबदेही पर उठाए सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि हर कॉरपोरेटर या पार्षद, नगरपालिका अधिकारी और मेयर को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। यह चिंता भी जताई है कि निर्माण प्रक्रिया को आसान बनाने और नियमों में ढील देने के दौरान सुरक्षा और निगरानी कमजोर नहीं होनी चाहिए।
