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    12 साल से फरार जालसाज को दिल्ली पुलिस ने दबोचा, नेताओं के फर्जी लेटरहेड से करता था ब्लैकमेल

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 11:04 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नेताओं और सरकारी अधिकारियों के नाम पर वसूली करने वाले भगोड़े जालसाज मनोहरन कंडासामी को 12 साल बाद तमिलनाडु से गिरफ्ता ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. दिल्ली पुलिस ने 12 साल से फरार जालसाज को दबोचा।

    2. नेताओं-अधिकारियों के फर्जी लेटरहेड से करता था वसूली।

    3. तमिलनाडु में पहचान छिपाकर चला रहा था पोल्ट्री फार्म।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं और उच्च सरकारी अधिकारियों के नाम पर लोगों को गुमराह और ब्लैकमेल कर वसूली करने वाले एक आरोपित को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है।

    2008 में जालसाज के घर से प्रमुख राजनीतिक पार्टियों और उच्च सरकारी अधिकारियों के नाम पर छपे फर्जी लेटरहेड बरामद हुए थे। जमानत पर बाहर आने के बाद 12 साल से वह फरार चल रहा था। कोर्ट ने उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था और पुलिस आयुक्त की तरफ से पर 50 हजार का ईनाम था।

    हाई प्रोफाइल मामले में था वांछित

    डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम के मुताबिक गिरफ्तार किए गए जालसाज का नाम मनोहरन कंडासामी है। वह राजनीतिक पार्टिर्यों के नेताओं और उच्च सरकारी अधिकारियों के फर्जी लेटरहेड छापने व जालसाजी के कई हाई-प्रोफाइल मामले में वांछित था।

    2007 में मंदिर मार्ग थानाक्षेत्र स्थित एक धर्मशाला से चोरी हुई थी। हैदराबाद के रहने वाले विजय कुमार की अलमारी का ताला तोड़ सोने के गहने और कीमती सामान चोरी हो गए थे। जांच के बाद पुलिस ने कर्नाटक के रहने वाले मनोहरन को गिरफ्तार कर लिया था।

    उसकी निशानदेही पर चोरी का सामान बरामद नहीं हुआ, लेकिन तलाशी लेने पर कई फर्जी लेटरहेड बरामद हुए थे। उसके बाद 2008 में फिर मंदिर मार्ग थाने में सरकारी पहचान के दुरुपयोग और गंभीर षड्यंत्र को देखते हुए जालसाजी का नया मामला दर्ज किया गया।

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    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था लेकिन एक माह बाद ही उसे जमानत मिल गई।

    उसके बाद उसने दोबारा कोर्ट में समर्पण नहीं किया और अदालती कार्यवाही में भाग लेना बंद कर दिया। जिसपर 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। हवलदार नवीन ने आरोपित के पुराने और नए इलेकट्रानिक इनपुट्स का महीनों तक जांच की।

    पहचान छिपाकर तमिलनाडु में रह रहा था आरोपी

    तमाम कोशिश के बाद तमिलनाडु में इस्तेमाल हो रहा आरोपित के एक मोबाइल नंबर के बारे में पता चला। उसके बाद एसीपी सत्येंद्र मोहन व इंस्पेक्टर महीपाल सिंह की टीम को तमिलनाडु के नामक्कल जिले के तिरुचेंगोडे में उसकी लोकेशन मिली।

    वहां पर एक गोदाम पर छापेमारी कर उसे दबोच लिया गया। वहां वह मुर्गी पालन का कारोबार चला रहा था।

    पूछताछ में मनोहरन ने बताया कि जमानत मिलने के बाद उसे सजा होने का डर था। जेल जाने से बचने के लिए उसने अपने पुराने सभी साथियों और रिश्तेदारों से संपर्क तोड़ लिया और दिल्ली और कर्नाटक छोड़कर तमिलनाडु चला गया।

    वहां पहचान छिपाकर रहने लगा और पोल्ट्री फार्म का एक बड़ा व्यवसाय स्थापित कर लिया।

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