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मेडिकल और DNA रिपोर्ट ने मजबूत किया नाबालिग का बयान, 15 साल की लड़की से रेप केस में दोषी को 7 साल की जेल

Published: Tue, 08 Sep 2026 10:18 PM (IST)

द्वारका की विशेष पॉक्सो अदालत ने जनकपुरी में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी विनोद उर्फ विक्की को सात साल के ...और पढ़ें

अदालत ने पीड़िता को हुए शारीरिक और मानसिक आघात को देखते हुए 10.50 लाख रुपये का अंतिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। एआई इमेज

अदालत ने पीड़िता को हुए शारीरिक और मानसिक आघात को देखते हुए 10.50 लाख रुपये का अंतिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। एआई इमेज

HighLights

  1. पॉक्सो अदालत ने दोषी को सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

  2. पीड़िता को 10.50 लाख रुपये का अंतिम मुआवजा देने का आदेश।

  3. मेडिकल और डीएनए रिपोर्ट ने पीड़िता के बयान को मजबूत किया।

मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका स्थित दक्षिण-पश्चिम जिला की विशेष पाेक्सो अदालत ने जनकपुरी में वर्ष 2019 में 15 वर्षीय नाबालिग के अपहरण, मारपीट और दुष्कर्म के मामले में दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को हुए शारीरिक और मानसिक आघात को देखते हुए 10.50 लाख रुपये का अंतिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट ने आदेश में क्या कहा?

विशेष पाेक्सो अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित गुलिया ने दोषी विनोद उर्फ विक्की को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। दोषी की न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को भी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।

सजा के दौरान बचाव पक्ष ने दोषी की पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की। बताया गया कि दोषी करीब 40 वर्ष का है और उसके दो छोटे बच्चे हैं। साथ ही वह परिवार का कमाने वाला सदस्य है।

मेडिकल जांच रिपोर्ट और डीएनए रिपोर्ट

हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता के बयान को विश्वसनीय माना। पीड़िता के बयान की पुष्टि मेडिकल जांच रिपोर्ट और डीएनए रिपोर्ट से होने को भी अहम माना गया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषी का अपराध सिद्ध माना।

बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया

यह मामला 23 जनवरी 2019 का है। अगले दिन पीड़िता की मां ने जनकपुरी थाने में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में इमारत में काम करने वाले विनोद उर्फ विक्की पर बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने का संदेह जताया गया था।

पुलिस ने मामले में अपहरण, दुष्कर्म, मारपीट और धमकी देने सहित पोक्सो एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद मामला 16 मार्च 2019 को अदालत में पहुंचा।

दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने 5 अगस्त 2026 को विनोद उर्फ विक्की को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 7 सितंबर को फैसला सुनाया है।

साधारण कैद की सजा सुनाई गई

अदालत ने पाक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक माह की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

इसके अलावा अपहरण के मामले में एक वर्ष की साधारण कैद, धमकी देने के मामले में एक वर्ष की साधारण कैद और मारपीट के मामले में छह माह की साधारण कैद की सजा सुनाई गई है। अदालत ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया।

10.50 लाख रुपये का मुआवजा

घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 15 वर्ष पांच माह थी। अदालत ने पीड़िता को हुए मानसिक और शारीरिक आघात को ध्यान में रखते हुए दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को उसके बैंक खाते में 10.50 लाख रुपये का अंतिम मुआवजा जमा कराने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश के अनुसार, पीड़िता को पहले 10 मई 2022 को दिए जा चुके एक लाख रुपये के अंतरिम मुआवजे को अंतिम मुआवजा राशि में समायोजित किया जाएगा।

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