10 महीने बाद भी बिहार कांग्रेस में नहीं हुआ बदलाव, दिल्ली में पार्टी मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं का धरना; नेतृत्व बदलने की मांग
बिहार कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने विधानसभा चुनाव में हार ...और पढ़ें

बिहार कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हुई दुर्गति के 10 महीने बाद भी बिहार कांग्रेस में बदलाव नहीं होने पर चिंता जताते हुए प्रदेश के कुछ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के सामने शांतपूर्ण धरना एवं प्रदर्शन कर प्रदेश संगठन का नए सिरे से कायाकल्प करने की आवाज उठाई।
इस क्रम में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के और एआइसीसी प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को हटाए जाने की मांग करते हुए दावा किया गया कि प्रदेश के मौजूदा नेतृत्व की निष्क्रियता से बिहार में कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता लगभग ठप है।
राजद-कांग्रेस गठबंधन की हार के बाद प्रदेश राजेश राम तथा प्रभारी अल्लावरू दोनों ने हाईकमान के समक्ष इस्तीफा की पेशकश कर दी थी मगर अभी तक इस पर निर्णय नहीं लिया गया है।
बिहार कांग्रेस बचाओ अभियान के तहत संगठन की इसी दुविधापूर्ण स्थिति पर चिंता जताते हुए कुछ पूर्व विधायकों, पूर्व जिला अध्यक्षों, पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर दोनों को हटाए जाने की मांग की।
इनकी अगुवाई कर पार्टी नेता आनंद माधव ने कहा कि बिहार में जब हमारी बात नहीं सुनी गई तब हमें दिल्ली आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दावा किया कि बिहार कांग्रेस लगभग बिखर चुकी है और समर्पित एवं पुराने कांग्रेसजनों को लगातार अपमानित कर पार्टी से दूर किया जा रहा है।
माधव ने कहा कि हमारा विरोध कांग्रेस पार्टी से नहीं बल्कि बिहार में पार्टी के वर्तमान कर्ता-धर्ताओं से है जिनकी कार्यशैली से संगठन कमजोर हो रहा है।
कुछ घंटों तक प्रदर्शन के बाद कांग्रेस की ओर से पार्टी पदाधिकारी मनीष चतरथ इनसे मिलने आए तो बिहार इन लोगों ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा जिसमें राहुल गांधी से मुलाकात का समय दिलाने, अल्लावरू और राजेश राम को हटाने तथा कई कांग्रेसजनों के विरुद्ध जारी नोटिस एवं निष्कासन निरस्त करने की मांग की गई है।
बिहार में कांग्रेस की स्वतंत्र राजनीतिक सक्रियता की पैरोकारी करने वाले सूबे के वरिष्ठ कांग्रेस नेता किशोर कुमार झा इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे मगर इनके उठाए सवालों को जायज ठहराते हुए कहा कि प्रदेश नेतृत्व द्वारा इन्हें नजरअंदाज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
पार्टी में हर कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का अधिकार है और उम्मीद है कि आलाकमान इनकी बातों पर गौर करेगा। झा ने कहा कि पिछले 10 महीने से बिहार में कार्यकर्ता उहापोह में हैं कि कांग्रेस अकेले चलेगी या राजद के साथ गठबंधन जारी रहेगा।
राजद से गठबंधन खत्म करने की पैरोकारी करते हुए झा ने कहा कि कांग्रेस के लिए राजनीतिक आधार बढ़ाने का सुनहरा मौका है।
कांग्रेस मुख्यालय के समक्ष पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन में पूर्व विधायक अनिल सिंह,छत्रपति यादव,पूनम देवी के अलावा जमाल अहमद भल्लू, राज कुमार राजन, नागेंद्र पासवान विकल, वसी अख्तर, शौकत अली, विधूशेखर पांडेय, भारत भूषण दूबे, राहुल मिश्रा, बुद्धदेव प्रसाद यादव, उमाशंकर पांडेय आदि शामिल थे।
