दिल्ली वालों के लिए NOC का झंझट खत्म, 50 साल पुराने DDA मकानों का कायाकल्प; मास्टर प्लान 2047 को हरी झंडी
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) बोर्ड ने 'मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047' को औपचारिक मंजूरी दे दी है, जिसे अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

दिल्ली का मास्टर प्लान 2047 मंजूर। फोटो: सोशल मीडिया
HighLights
मास्टर प्लान 2047 को डीडीए बोर्ड ने दी मंजूरी
यमुना ओ-जोन में अनधिकृत बस्तियों के नियमन पर जोर
निर्माण के लिए पूर्व-एनओसी की अनिवार्यता हुई खत्म
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राजधानी के सुनियोजित विकास के लिए बहुप्रतीक्षित 'मास्टर प्लान' को लेकर जारी लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ।
बुधवार को एलजी व डीडीए अध्यक्ष टीएस संधु की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में 'मास्टर प्लान फार दिल्ली-2047' को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई।
डीडीए अब इस अंतिम प्रस्ताव को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजेगा, जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
2041 से बढ़कर 2047 हुआ मास्टर प्लान का लक्ष्य
इससे पहले डीडीए ने 28 फरवरी 2023 को 'मास्टर प्लान-2041' को मंजूरी देकर केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन कई समय-सीमाएं बीत जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसके क्षितिज वर्ष को बढ़ाकर 2047 करने पर विचार किया, ताकि इसे प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विजन से पूरी तरह जोड़ा जा सके।
- यमुना ओ-जोन में अनधिकृत बस्तियों के नियमन पर जोर: दिल्ली में लगभग पांच लाख से अधिक आबादी वाले यमुना ओ-जोन (इको-सेंसिटिव क्षेत्र) में अनधिकृत बस्तियों के नियमन और पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में विशेष प्रावधान और नीतियां तय की जा रही हैं।
- बढ़ती आबादी के हिसाब से आवास से परिवहन तक की तैयारी: वर्ष 2047 तक दिल्ली की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए आवास, परिवहन, कचरा प्रबंधन और ढांचागत सुविधाओं का एकीकृत ढांचा तैयार किया गया है।
- इमारत निर्माण के लिए कई पूर्व-एनओसी की अनिवार्यता खत्म: दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, जल बोर्ड और वन विभाग से इमारत निर्माण के लिए पूर्व-एनओसी लेने की अनिवार्यता समाप्त की गई है।
- 50 साल पुराने डीडीए मकानों के पुनर्विकास का रास्ता साफ: 50 साल से अधिक पुरानी डीडीए की दो मंजिला इमारतों, जैसे नारायणा विहार की इमारतों को अब खाली प्लाॅटों की तर्ज पर पुनर्विकास के अधिकार दिए गए हैं।
- नरेला में मेट्रो डिपो के लिए 19.63 हेक्टेयर जमीन आरक्षित: नरेला में 19.63 हेक्टेयर भूमि का उपयोग बदलकर मेट्रो डिपो के लिए आरक्षित किया गया है, जिससे हरियाणा-दिल्ली कनेक्टिविटी को नई उड़ान मिलेगी।
