'पिंक फाइलों' ने उड़ा दी है दिल्ली पुलिस की नींद, 6 महीने में बन चुकीं 70 फाइलें ; नाबालिग बने सिरदर्द
राजधानी दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराधों में alarming वृद्धि हुई है, जहां एक सब-डिवीजन में छह माह में 70 से अधिक 'पिंक फाइलें' बनी हैं। ...और पढ़ें

पिंक फाइलों ने दिल्ली पुलिस की मुश्किल बढ़ा दी है। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
दिल्ली में छह माह में 70 से अधिक 'पिंक फाइलें' बनीं
नाबालिगों के अपराध का मुख्य कारण नशीले पदार्थों की लत
NDPS एक्ट में ढील से अपराधियों को आसानी से जमानत
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में अपराध की दुनिया में नाबालिगों की बढ़ती मौजूदगी ने पुलिस और समाज के सामने चिंता बढ़ा दी है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजधानी के एक सब-डिवीजन में पिछले छह महीने में 70 से अधिक ‘पिंक फाइल’ तैयार की गई हैं। दिल्ली में कुल 226 थाने हैं और एक सब-डिवीजन में दो से तीन थाने आते हैं।
हाल ही में पुलिस मुख्यालय में हुई अपराध समीक्षा बैठक में पिछले छह महीने के नए क्राइम पैटर्न पर चर्चा हुई। इस दौरान सामने आए आंकड़ों ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी।
क्या होती है पिंक फाइल, क्यों है इतनी चिंता?
आम तौर पर किसी बालिग अपराधी के बार-बार अपराध में शामिल होने पर पुलिस उसकी हिस्ट्रीशीट तैयार करती है। वहीं, 14 से 18 वर्ष के किशोरों के बार-बार संगीन वारदातों में शामिल पाए जाने पर उनके रिकॉर्ड और निगरानी के लिए दिल्ली पुलिस ‘पिंक फाइल’ तैयार करती है।
एक ही सब-डिवीजन में छह महीने के भीतर 70 से ज्यादा पिंक फाइलों का बनना किशोरों के अपराध की ओर बढ़ने की गंभीर स्थिति को दिखाता है। पुलिस के सामने यह चिंता भी है कि कई किशोर लगातार अपराधों में शामिल होते जा रहे हैं।
नशे की लत के लिए अपराध करने का आरोप
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अपराध की राह पर जाने वाले लगभग सभी नाबालिग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नशे की लत के शिकार हैं। समीक्षा बैठक में नशे को किशोर अपराध की बड़ी वजह माना गया।
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पुलिस के अनुसार, नशे की दैनिक खुराक का इंतजाम करने के लिए कुछ किशोर झपटमारी, चोरी, लूटपाट और हत्या जैसे संगीन अपराध तक कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, संगठित आपराधिक गिरोह भी पुलिस से बचने के लिए नाबालिगों का इस्तेमाल नशे की सप्लाई और वारदातों को अंजाम देने में कर रहे हैं।
ड्रग्स के मामले में कानून की रियायत पर पुलिस को चिंता
बैठक में अधिकारियों ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी रियायतों पर भी चिंता जताई। पुलिस के अनुसार, नशे की बरामदगी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।
कम मात्रा में ड्रग्स मिलने पर किशोर या बालिग को थाने से ही तुरंत जमानत मिल जाती है और ऐसे मामले में बहुत मामूली सजा का प्रविधान है। मध्यम मात्रा में ड्रग्स मिलने पर महज 10 दिनों के भीतर जमानत मिल जाती है और इसमें भी कम सजा का प्रावधान है।
वहीं, व्यावसायिक मात्रा में ड्रग्स मिलने पर लंबे समय तक जमानत नहीं मिलती और मामले में न्यूनतम 10 साल तक की सख्त कैद का प्रविधान है।
कम ड्रग्स पर भी सख्त कार्रवाई चाहती है पुलिस
पुलिस अधिकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस पिछले कई सालों से यह प्रयास कर रही है कि कम मात्रा में ड्रग्स मिलने पर भी उसे व्यावसायिक मात्रा जैसा ट्रीट किया जाए और सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
पुलिस का कहना है कि मौजूदा लचीले कानूनी प्रविधानों का फायदा उठाकर नशे के सौदागर और नाबालिग अपराधी आसानी से जेल से बाहर आ जाते हैं। अधिकारियों का मानना है कि सख्त कानूनी प्रावधानों से नाबालिगों और ड्रग्स तस्करों में कानून का खौफ पैदा होगा और तुरंत मिलने वाली जमानत पर लगाम लगेगी।
नशे की सप्लाई चेन पर प्रहार जरूरी
पुलिस का मानना है कि जब तक नशे की सप्लाई चेन और इसकी आसान उपलब्धता पर कड़ा प्रहार नहीं होगा, तब तक किशोर अपराध के ग्राफ को नीचे लाना मुश्किल है।
राजधानी में बढ़ती पिंक फाइलों की संख्या यह भी बताती है कि केवल पुलिस की सख्ती से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए कड़े कानूनी सुधार, नशामुक्ति केंद्रों की सक्रियता और सामाजिक व पारिवारिक स्तर पर काउंसलिंग की जरूरत है।
दिल्ली में थानों की स्थिति
- 15 जिलों में कुल थाने : 194
- रेलवे थाने : 7
- मेट्रो रेल थाने : 16
- एयरपोर्ट थाने : 2
- स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच समेत अन्य यूनिटों के थाने : 6
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