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छोटे प्लॉट, बढ़ते परिवार और पुराना ढांचा... दिल्ली की पुनर्वास कॉलोनियों में ऐसे बढ़ता गया अवैध निर्माण

Published: Tue, 08 Sep 2026 01:55 AM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 04:56 AM (IST)

दिल्ली की पुनर्वास कॉलोनियों में बढ़ती आबादी और आवास की जरूरतों के कारण अवैध निर्माण बढ़ रहा है, क्योंकि पुरानी ...और पढ़ें

सत्य निकेतन मार्केट में गिरी इमारत की साथ वाली इमारत पर नोटिस चिपकता एमसीडी कर्मचारी। जागरण

सत्य निकेतन मार्केट में गिरी इमारत की साथ वाली इमारत पर नोटिस चिपकता एमसीडी कर्मचारी। जागरण

HighLights

  1. पुनर्वास कॉलोनियों में आवास की जरूरतें बढ़ रही हैं।

  2. पुरानी कॉलोनियों के पुनर्विकास की कोई योजना नहीं।

  3. अवैध निर्माण से भवनों की संरचना पर दबाव।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में आबादी बढ़ने के साथ आवास की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। पर्याप्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का असर अनधिकृत कालोनियों के साथ-साथ नियोजित और पुनर्वास कालोनियों में भी दिखाई दे रहा है।

यहां परिवारों के बढ़ने के साथ मकानों की जरूरत बढ़ी, लेकिन पुरानी कालोनियों के पुनर्निर्माण के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनी। नतीजा यह हुआ कि लोगों ने जरूरत के अनुसार पुराने मकानों में मंजिलें बढ़ानी शुरू कर दीं और अवैध निर्माण का दायरा बढ़ता गया।

पुनर्वास कॉलोनियों में बढ़ता ढांचागत संकट

सत्य निकेतन में हुआ हादसा भी इसी तरह की पुनर्वास कालोनी से जुड़ा है। यहां स्टैंडर्ड प्लान के तहत करीब डेढ़ से ढाई मंजिल तक ही निर्माण किया जा सकता है। खास बात यह है कि इन कालोनियों में सामान्य तौर पर भवन का नक्शा पास कराने की व्यवस्था भी नहीं है।

ऐसे में करीब 50-60 वर्ष पुरानी हो चुकी इन कालोनियों में मूल आवंटी के परिवार के बढ़ने के बाद मौजूदा आवासीय जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

दिल्ली में 1960-70 के दशक में कई पुनर्वास कालोनियां बसाई गई थीं। उस समय दिल्ली में आबादी और आवासीय दबाव आज की तुलना में काफी कम था। सरकारी जमीन पर करीब 55 वर्गमीटर तक के छोटे प्लाट देकर लोगों को बसाया गया।

समय के साथ परिवार बढ़े तो इन्हीं छोटे प्लाट पर मकानों का विस्तार शुरू हो गया। पहले दो मंजिल, फिर तीसरी और इसके बाद कई जगह चौथी मंजिल तक निर्माण कर दिया गया।

पुराने मकानों में अतिरिक्त मंजिल बनाने के दौरान कई मामलों में पिलर और अन्य संरचनात्मक मानकों का पालन नहीं किया गया। इसकी एक वजह यह भी है कि मकान को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से बनाने में अधिक खर्च आता है। इसलिए लोग पुराने ढांचे में ही धीरे-धीरे निर्माण बढ़ाते गए।

भवनों की संरचना पर अतिरिक्त दबाव

वहीं, इन कालोनियों में चार मंजिल का वैध नक्शा पास कराने का प्रावधान नहीं होने से लोग बिना अनुमति निर्माण करने को मजबूर होते हैं। इससे एक तरफ भवनों की संरचना पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ निगम की नजर से बचकर निर्माण होने के कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी हो रही है।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्वास कालोनियों में बढ़ती आबादी और बदलती आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुनर्निर्माण की स्पष्ट नीति बनानी होगी। केवल अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।

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