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दिल्ली में पीजी ढहने से 7 छात्राओं की मौत के बाद भी बेखबर जमशेदपुर प्रशासन, जर्जर इमारतों में चल रहे अवैध हॉस्टल

Published: Mon, 07 Sep 2026 11:09 PM (IST)

दिल्ली में पीजी ढहने की घटना के बावजूद जमशेदपुर प्रशासन शहर के जर्जर और अवैध पीजी हॉस्टलों पर ध्यान नहीं ...और पढ़ें

दिल्‍ली में हुए भयावह हादसे के बावजूद जमशेदपुर का जिला प्रशासन और नगर निकाय पूरी तरह बेखबर बैठे हैं।

दिल्‍ली में हुए भयावह हादसे के बावजूद जमशेदपुर का जिला प्रशासन और नगर निकाय पूरी तरह बेखबर बैठे हैं।

HighLights

  1. दिल्ली घटना के बाद भी जमशेदपुर प्रशासन निष्क्रिय।

  2. शहर में जर्जर और अवैध पीजी हॉस्टल संचालित।

  3. सुरक्षा मानकों की अनदेखी, छात्रों में भय व्याप्त।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात विद्यार्थियों की दर्दनाक मौत की वीभत्स घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 
 
इस भयावह हादसे के बावजूद जमशेदपुर का जिला प्रशासन और नगर निकाय पूरी तरह बेखबर बैठे हैं। शहर के मानगो, साकची, बिष्टुपुर, कदमा और सोनारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संचालित दर्जनों पीजी (पेइंग गेस्ट) हॉस्टल किसी भी दिन दिल्ली जैसी भीषण त्रासदी का केंद्र बन सकते हैं। 
 

जर्जर बहुमंजिला इमारतों में चल रहे अवैध ठिकाने 

संबंधित प्रशासनिक विभागों की अनदेखी और शून्य निरीक्षण के कारण शहर में बड़े हादसे की ज़मीन तैयार हो चुकी है। जमीनी पड़ताल के दौरान मिली तस्वीरें शहर में बेकाबू हो चुके हालात की पूरी सच्चाई बयां करती हैं। 
 
गुरुनानक नगर जैसी संकरी गलियों में बड़े-बड़े कमर्शियल बोर्ड लगाकर पुराने व जर्जर रिहायशी मकानों को धड़ल्ले से हॉस्टलों में बदल दिया गया है।
 

इन बहुमंजिला इमारतों की स्थिति बेहद जर्जर है:

  •     उधड़ता प्लास्टर व सीलन: छतों और दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, कई जगह दीवारों पर पेड़-पौधे तक उग आए हैं।
  •     लटकते तारों का जाल: पूरी गली और इमारतों के बाहर बिजली के तारों का खतरनाक जाल झूल रहा है, जिससे शॉर्ट सर्किट का हर वक्त खतरा बना रहता है।
  •     अवरुद्ध रास्ते: मुख्य द्वारों पर कचरे और मलबे का ढेर लगा है। ऐसी तंग गलियों में किसी आपात स्थिति में अग्निशमन वाहन (फायर ब्रिगेड) या एम्बुलेंस का पहुंचना पूरी तरह नामुमकिन है।

 

बिना सुरक्षा मानकों के भारी किराया वसूली, छात्रों में दहशत 

शहर के अधिकतर पीजी हॉस्टलों में न तो अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) लगे हैं और न ही आपातकालीन निकासी (Emergency Exit) का कोई रास्ता है। 
 
बिष्टुपुर में रहने वाले छात्र अमित सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि दिल्ली की घटना के बाद से छात्र सहमे हुए हैं, लेकिन मकान मालिक सुरक्षा का कोई इंतजाम किए बिना सिर्फ मोटा किराया वसूल रहे हैं।


छात्रा प्रिया शर्मा के अनुसार, कमरों में वेंटिलेशन तक की व्यवस्था नहीं है और शिकायत करने पर रूम खाली करने की धमकी दी जाती है। वहीं साकची के राहुल वर्मा का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी आज तक किसी भी जांच के लिए नहीं पहुंचे हैं।

यदि समय रहते नगर निकाय और जिला प्रशासन ने इन अवैध व जर्जर पीजी हॉस्टलों की जांच कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो जमशेदपुर में भी दिल्ली जैसी भीषण त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।