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'सरकार जिम्मेदारी से नहीं झाड़ सकती पल्ला', सत्य निकेतन हादसे पर दिल्ली HC सख्त, PG-हॉस्टल ऑडिट के निर्देश

Published: Tue, 08 Sep 2026 05:04 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे में 7 मौतों पर सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह अपनी ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

  2. दिल्ली के सभी पीजी और हॉस्टलों का ऑडिट करने का आदेश।

  3. छात्रों की सुरक्षा और आवास सुविधा पर सरकार-डीयू नाकाम।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे में छात्रों सहित सात लोगों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि सरकार इस त्रासदी पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

अदालत ने कहा कि अपनी जिंदगी की शुरूआत कर रहे 50 युवा छात्रों में से ज्यादातर का मलबे के नीचे दबे होने से अधिक दुखद और कुछ नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि यह घटना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि गंभीर चिंता का विषय है कि डीयू और सरकार छात्रों की सुरक्षा के लिए कोई उचित इंतजाम नहीं है।

अदालत ने कहा कि पीजी हास्टल न सिर्फ खतरनाक हैं, बल्कि जानलेवा भी हैं।

उक्त टिप्पणियों के साथ मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने एक सप्ताह के अंदर दिल्ली के पीजी और हास्टल का आडिट करने का एमसीडी को निर्देश दिया।

साथ ही मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर ने केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ एमसीडी व दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपयेमुआवजा देने की मांग

याचािकाकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में इमारत गिरने से पीड़ित लोगों के स्वजन को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की भी थी। साथ ही याचिका में सभी पीजी आवासों/हास्टलों के ढ़ांचागत आडिट कराने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को भरोसा दिलाया कि सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं और बचाव अभियान जोर-शोर से चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

एसजी के बयान को रिकार्ड पर लेते हुए पीठ ने सवाल किया कि हादसा हो चुका है, आखिरी सरकार की रणनीति क्या है कि भविष्य में ऐसा न हो। पीठ ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ बिल्डिंग मालिकों की ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भी है।

अगर अधिकारियों ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियां ठीक से निभाई होतीं, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।

दो मंजिल की अनुमति पर बनाई जाती है छह मंजिला इमारतें

लापरवाह तरीके से निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए पीठ ने कहा कि यह देखा गया कि जिन इमारतों को दो मंजिल बनाने की मंजूरी होती है, उन्हें कभी-कभी बिना नींव बदले छह मंजिल तक बढ़ा दिया जाता है। अदालत ने कहा कि अगर इस तरह की पीजी व निजी हास्टल को नियंत्रित करने के लिए कोई उचित दिशानिर्देश नहीं ळै तो तत्काल दिशानिर्देश तैयार किए जाएं।

क्या वैध अनुमति से बनाई गई थी गिरी इमारत, चूक का जिम्मेदार कौन

अदालत ने एमसीडी को मामले की उच्च स्तरीय जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि 10 दिन के अंदर जांच करके जवाब दाखिल करें कि क्या गिरी हुई इमारत वैध अनुमति से बनाई गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि एमसीडी बताए कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव किया गया है। अदालत दिल्ली सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है।

बाहर के छात्रों को हास्टल की सुविधा उपलब्ध कराने में सरकार-डीयू नाकाम

हाई कोर्ट ने कहा कि बाहर से आकर डीयू में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए हास्टल की सुविधा उपलब्ध कराने में सरकार व डीयू नाकाम हैं। अदालत ने डीयू को हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि बाहर से आए कितने छात्र डीयू और इससे मान्यता प्राप्त कालेजों में पढ़ाई कर रहे हैं और कितने छात्रों को हास्टल सुविधाएं दी जा रही हैं।

सरकार और डीयू द्वारा चलाए जा रहे हास्टलों की संख्या की स्थिति को बेहद दयनीय बताते हुए पीठ ने डीयू को यह भी बताने को कहा कि कितने पीजी हास्टल हैं और इसमें कितने बच्चे रह रहे हैं।

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