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अब सालभर चलेगी धूल के खिलाफ जंग, दिल्ली में 10 महीने एंटी-स्मॉग गन चलाने का प्लान तैयार

Published: Tue, 08 Sep 2026 08:35 PM (IST)

दिल्ली सरकार ने धूल प्रदूषण से निपटने के लिए साल में 10 महीने एंटी-स्मॉग गन चलाने का फैसला किया है। ...और पढ़ें

सरकार द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब एंटी-स्माॅग गन का संचालन साल में करीब 10 माह तक किया जाएगा। एआई इमेज

सरकार द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब एंटी-स्माॅग गन का संचालन साल में करीब 10 माह तक किया जाएगा। एआई इमेज

HighLights

  1. दिल्ली में 10 महीने चलेंगी एंटी-स्मॉग गन।

  2. 150 करोड़ से अधिक खर्च, 1100 गन किराये पर।

  3. बड़े निर्माण स्थलों पर स्मॉग गन अनिवार्य की।

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। सर्दियों में बढ़ने वाले धूल प्रदूषण काे रोकने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निर्देश के साथ ही दिल्ली सरकार ने धूल प्रदूषण से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। सरकार द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब एंटी-स्माॅग गन का संचालन साल में करीब 10 माह तक किया जाएगा।

150 करोड़ रुपये से अधिक होगा खर्च

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सरकार के निर्देश पर 1,100 से अधिक एंटी-स्माॅग गन किराये पर लेने के लिए 10 टेंडर जारी किए हैं। इनके माध्यम से सितंबर से जून तक एंटी-स्माॅग गन चलाने की योजना है।

सरकार इस पूरी व्यवस्था पर 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी। पूर्व मेें मुख्य रूप से नवंबर से मार्च तक ही ये स्माॅग गन प्रमुखता से काम करतीं थीं और इनकी संख्या भी 600 तक भी नहीं हाेती थी।

धूल से 30 प्रतिशत तक प्रदूषण

विभाग का उद्देश्य प्रमुख सड़कों और प्रदूषण प्रभावित इलाकों में धूल एवं प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है। सर्वे के अनुसार दिल्ली के वायु प्रदूषण में धूल का योगदान मौसम और स्थान के अनुसार बदलता रहता है। अलग-अलग अध्ययनों में दिल्ली में धूल को मोटे तौर पर कुल प्रदूषण के करीब 30 प्रतिशत तक का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

200-200 स्माॅग गन लेने के टेंडर

हालांकि, सर्दियों में इसकी हिस्सेदारी और भी बढ़ जाती है। इसे गंभीरता से लेते हुए अभी तक से ही एंटी स्माॅग गन के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें 200-200 स्माॅग गन लेने के लिए पांच टेंडर किए गए हैं। मतलब साफ है इन टेंडर में बड़ी कंपनियां ही भाग ले सकेंगी। वहीं आठ, 12, और 26 की संख्या वाले टेंडर भी जारी किए गए हैं।

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एआई से तैयार की गई इमेज।

देरी के चलते सरकार की होती रही किरकिरी

इनमें इमारतों की छतों पर लगाई जाने वाली एंटी स्माॅग गन के साथ साथ ट्रकों लगाई जाने वाली स्माॅग गन भी शामिल हैं। जानकारों की मानें तो इन्हें किराये पर लेने की प्रक्रिया इसी माह पूरी कर एंटी स्माॅग गन का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाएगा। पिछले सालों में पीडब्ल्यूडी के साथ साथ सरकार की भी एंटी स्माॅग गन लगाए जाने में हुई देरी से किरकिरी होती रही है।

मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य

यहां बता दें कि डीपीसीसी ने अपने ताजा आदेश में ऊंची इमारतों और बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्माॅग गन और मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। नए नियमों के तहत 3,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाली व्यावसायिक और हाईराइज इमारतों के साथ-साथ 1,000 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाना होगा।

धूल से कैसे होता है प्रदूषण

जानकारी के अनुसार धूल प्रदूषण के मुख्य कारण सड़कों की धूल, निर्माण और तोड़फोड़ का काम, खाली जमीन और खुले भूखंड, सड़क किनारे मिट्टी और कच्चे हिस्से, निर्माण सामग्री का खुले में ले जाना भी माना जा रहा है। केवल सूखी झाड़ू लगाने से सड़क की महीन धूल हवा में उठ सकती है। नियमित रूप से उचित तरीके से सड़क की सफाई नहीं होने पर धूल जमा होती रहती है।

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