भारत में अच्छे स्पिनरों को लेकर डरावनी स्थिति, BCCI वीवीएस लक्ष्मण से मांगेगा जवाब
भारतीय क्रिकेट में अच्छे स्पिनरों, खासकर ऑफ स्पिनरों की कमी चिंता का विषय बन गई है, जिससे आगामी महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज के लिए टीम प्रबंधन चिंतित है।

वीवीएस लक्ष्मण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण, नई दिल्ली। बिशन सिंह बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, भगवत चंद्रशेखर, एस. वेंकटराघवन, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन जैसे स्पिनरों के देश में इस समय अच्छे स्पिनरों को लेकर डरावनी स्थिति है। हालत यह है कि भारत को श्रीलंका के विरुद्ध दो टेस्ट मैचों की सीरीज में मानव सुथार और सारांश जैन को उतारना पड़ा।
सुथार ने इस सीरीज से पहले सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला था और सारांश जैन को कोलंबो में पदार्पण कराया गया जो उनका आखिरी टेस्ट मैच भी साबित हो सकता है। अब भारतीय टीम को न्यूजीलैंड में दो टेस्ट और अगले साल घर में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पांच टेस्ट मैचों की गावस्कर-बॉर्डर सीरीज खेलनी है।
मीटिंग में मौजूद रहेंगे कप्तान और कोच
न्यूजीलैंड में तो तेज गेंदबाजों का ज्यादा बोलबाला रहेगा लेकिन घर में गावस्कर-बॉर्डर सीरीज के दौरान स्पिनरों की चुनौती को लेकर भारतीय चयनकर्ता और टीम प्रबंधन अभी से चिंतित नजर आ रहे हैं। गुरुवार को मुंबई में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर, मुख्य कोच गौतम गंभीर, वनडे-टेस्ट के कप्तान शुभमन गिल, टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण की उपस्थिति में होने वाली बैठक में यह मुद्दा भी अहम होगा।
खिलाड़ियों की चोट और स्पिनरों की स्थिति पर होगी चर्चा
बीसीसीआई सूत्र के अनुसार लगातार चोटिल हो रहे भारतीय क्रिकेटर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उनकी धीमी प्रगति, न्यूजीलैंड के विरुद्ध होने वाली सीरीज, 2027 वनडे विश्व कप और आयरलैंड-इंग्लैंड में मिली हार की समीक्षा के अलावा भारत में अच्छे स्पिनरों को लेकर डरावनी स्थिति पर भी चर्चा होगी। हालात यह हैं कि जूनियर क्रिकेट से अच्छे स्पिनर और खासकर ऑफ स्पिनर नहीं मिल पा रहे हैं।
हाल में श्रीलंका में खत्म हुई दो टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार को खिलाया। श्रीलंकाई टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता के बावजूद टीम प्रबंधन को तीनों बाएं हाथ के स्पिनर खिलाने पड़े। 91 टेस्ट में 356 विकेट ले चुके बाएं हाथ के आर्थोडॉक्स स्पिनर जडेजा अब गेंदबाज की जगह बल्लेबाजी ऑलराउंडर के तौर पर खेलते हैं।
उन्होंने इतने ही टेस्ट में 37.81 के औसत से 4160 रन बनाए हैं। वह पिछले 14 टेस्ट में सिर्फ 37 विकेट ले पाए हैं। उन्होंने आखिरी बार किसी पारी में पांच और टेस्ट में 10 विकेट एक नवंबर 2024 को वानखेड़े में न्यूजीलैंड के विरुद्ध लिए थे। नौ साल से टेस्ट क्रिकेट खेल रहे कुलदीप अभी तक सिर्फ 19 टेस्ट मैच खेल पाए हैं। गॉल टेस्ट में सिर्फ एक विकेट लेने के कारण उन्हें कोलंबो टेस्ट में नहीं खिलाया गया था।
भारत के पास श्रीलंका में नहीं था विकल्प
श्रीलंकाई टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता को देखते हुए कोलंबो में बाएं हाथ के कलाई स्पिनर कुलदीप की जगह 33 वर्षीय ऑफ स्पिनर सारांश जैन को मौका दिया गया लेकिन 346 गेंदें फेंकने के बावजूद वह सिर्फ तीन विकेट ही ले पाए। सुथार ने पहले टेस्ट में 10 विकेट लिए लेकिन दूसरे टेस्ट में श्रीलंका का निचला क्रम उनके सामने अड़ गया। बीसीसीआई के सूत्र ने कहा कि भारतीय सीनियर टीम के लिए फीडर के तौर पर काम करने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्पिनरों की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। सीओई में चोटिल खिलाड़ियों का जल्दी फिट न होना भी चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत के लिए डरावनी स्थिति
बीसीसीआई से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि स्पिनरों और खासकर ऑफ स्पिनरों को लेकर भारत में डरावनी स्थिति है। एक समय हरभजन सिंह और उसके बाद रविचंद्रन अश्विन ने ऑफ स्पिनर के तौर पर भारत के लिए विकेटों का जखीरा इकट्ठा किया। 537 विकेट लेने वाले अश्विन ने 2024 में ऑस्ट्रेलिया में गावस्कर-बॉर्डर सीरीज में संन्यास लिया था। अब अगली बॉर्डर-गावस्कर सीरीज आने वाली है लेकिन दो साल में भारत एक नया ऑफ स्पिनर नहीं खोज पाया है।
टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय हरभजन सिंह ने एक समय ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 32 विकेट लिए थे। इस ऑफ स्पिनर के सामने कंगारू कांपते थे लेकिन हालत यह है कि अब हमारे पास अनुभवी ऑफ स्पिनर के तौर पर सिर्फ वॉशिंगटन सुंदर का नाम दिखाई देता है। वह भी अनफिट होने के कारण श्रीलंका में नहीं खेल पाए थे। अफगानिस्तान के विरुद्ध टी-20 सीरीज में उनका चयन किया गया है लेकिन नौ तारीख को मैच सिमुलेशन के बाद ही वह सीरीज में खेल पाएंगे।
वॉशिंगटन सुंदर का करना होगा वर्कलोड मैनेजमेंट
वॉशिंगटन तीनों प्रारूप खेलते हैं। ऐसे में नवंबर-दिसंबर में न्यूजीलैंड दौरे के समय पांच टी-20, पांच वनडे और दो टेस्ट के दौरान उनका प्रयोग संभालकर करना होगा। इसके बाद श्रीलंकाई टीम भारत में तीन वनडे व तीन वनडे की सीरीज जबकि जिंबाब्वे तीन वनडे की सीरीज खेलेगी। हम चाहते हैं कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल और गावस्कर-बॉर्डर सीरीज के महत्व को देखते हुए सुंदर अगले साल जनवरी-फरवरी में होने वाले पांचों टेस्ट के लिए उपलब्ध रहें। ऐसे में न्यूजीलैंड दौर में उनका प्रयोग संभालकर करना होगा।
तनुष कोटियान पर भी रहेंगी नजरें
यही नहीं उसके बाद तीनों सीरीज में उन्हें आराम देने की जरूरत होगी। इसके अलावा एक और ऑफ स्पिनर तनुष कोटियान पर भी नजरें हैं। मुंबई के स्पिनर तनुष ने अब तक कोई टेस्ट नहीं खेला है। उन्होंने 45 प्रथम श्रेणी मैचों में 26.75 के औसत से 139 विकेट लिए हैं। स्पिनर के तौर पर एक विकल्प बाएं हाथ के आर्थोडॉक्स गेंदबाज अक्षर पटेल का है। उन्होंने भी 15 टेस्ट मैच खेले हैं लेकिन शायद ही भारतीय चयनकर्ता उनकी तरफ देखें।
