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चीनी का 70 वाला भाव फिर लौटा 45 रुपये पर, आपको कितने में मिलेगी शक्कर?

By Arvind SharmaEdited By: Nayan Tiwari
Published: Mon, 07 Sep 2026 08:32 PM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 08:33 PM (IST)

चीनी के एक्स-मिल दाम ₹70 से गिरकर ₹45 पर आ गए हैं, लेकिन खुदरा ग्राहकों को अभी इसका पूरा फायदा ...और पढ़ें

चीनी के एक्स मिल भाव में गिरावट

चीनी के एक्स मिल भाव में गिरावट

HighLights

  1. एक्स-मिल चीनी के दाम ₹70 से ₹45 पर लौटे।

  2. खुदरा बाजार में अभी ₹60-₹63 प्रति किलो बिक रही।

  3. सरकारी सख्ती और स्टॉक सीमा से कीमतों में गिरावट।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| चीनी के दाम में डेढ़ महीने पहले शुरू हुई तेज उछाल अब धीमी पड़ गई है। जुलाई-अगस्त में ₹44 प्रति किलो के आसपास रहने वाला चीनी का एक्स-मिल भाव ₹70 किलो तक पहुंच गया था, लेकिन सरकारी सख्ती, बाजार में जमा अतिरिक्त स्टॉक निकलने और नई खरीद कमजोर पड़ने से अब यह फिर ₹44-₹45 किलो पर आ गया है। हालांकि एक्स-मिल भाव में भारी गिरावट के बावजूद उपभोक्ताओं को अभी इसका पूरा लाभ नहीं मिला है और बाजार में चीनी 60-63 रुपये किलो के आसपास बिक रही है।

रिटेल मार्केट में क्यों नहीं दिखा असर?

एक्स-मिल भाव में गिरावट का असर सबसे पहले थोक बाजार पर पड़ता है। नीचे तक असर पहुंचने में समय लगेगा। मिल से निकलने के बाद चीनी थोक कारोबारी, वितरक और फिर खुदरा दुकानदार तक पहुंचती है। तेजी के दौरान महंगे दाम पर खरीदा गया पुराना स्टाक भी अभी बाजार में है। कारोबारी उसे लागत से नीचे बेचने के बजाय पुराना भाव ही बनाए रखते हैं।

एक्स मिलों में कितना है चीनी का भाव?

चीनी उद्योग के मुताबिक एक्स-मिल भाव में आई गिरावट का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखने में कम से कम सात से 10 दिन लग सकते हैं। फिलहाल तेजी के दौरान बढ़े करीब ₹26-₹27 किलो के भाव में लगभग पूरी बढ़ोतरी खत्म हो चुकी है। अगले कुछ दिनों में थोक बाजार में इसका असर और साफ दिखाई दे सकता है। 5 सितंबर को महाराष्ट्र में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-मिल भाव ₹4,350 क्विंटल और कर्नाटक में ₹4,380 क्विंटल रहा।

सरकार की सख्ती का दिखा असर

दरअसल, चीनी की उपलब्धता को लेकर आशंका पैदा हुई तो थोक उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर रख ली। इससे बाजार में उपलब्ध स्टाक घट गया और दाम तेजी से बढ़ने लगे। लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद बाजार पलट गया। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टाक अधिकतम 15 दिन की जरूरत तक सीमित कर दिया गया। इससे जिन कारोबारियों के पास जरूरत से ज्यादा माल जमा था, उन्हें बाजार में निकालना पड़ा।

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इसी तरह 15 सितंबर से डीलरों के लिए भी स्टाक सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल की जा रही है। जाहिर है बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक भारी पड़ेगा। इसके अलावा सरकार दस लाख टन कच्ची चीनी का भी आयात करने जा रही है। भाव में गिरावट के बाद भले ही पूरी आयातित मात्रा की जरूरत कम दिखाई दे, लेकिन आयात के फैसले ने तेजी की उम्मीद पर जरूर पानी फेर दिया है। सरकार ने प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से पेराई सत्र जल्द शुरू करने का आग्रह भी किया है। हालांकि जल्द पेराई शुरू करने पर गन्ने की रिकवरी प्रभावित हो सकती है और वजन में भी 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।