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मिलों की मनमानी से चीनी कारोबारी परेशान, खुदरा बाजारों में मांग की कमी से व्यापारियों के दांव पड़े उल्टे!

Published: Tue, 08 Sep 2026 12:50 PM (IST)

चीनी मिलों की मनमानी और कमजोर उपभोक्ता मांग के कारण चीनी कारोबारी परेशान हैं। त्योहारों से पहले अधिक कीमत पर ...और पढ़ें

चीनी पर मिलों और कारोबारियों में खींचतान

चीनी पर मिलों और कारोबारियों में खींचतान

HighLights

  1. मिलें चीनी के दाम कम करने को तैयार नहीं, स्टॉक पड़ा।

  2. कमजोर मांग से व्यापारियों का त्योहारी दांव उल्टा पड़ा, नुकसान।

  3. लॉजिस्टिक्स की कमी और वैश्विक बाजार में भी चीनी सस्ती।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में चीनी की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं में पड़ा है, लेकिन त्योहारी सीजन से पहले ये दबाव कारोबारियों में पड़ता नजर आ रहा है। बीते दिनों मिलों और कारोबारियों के बीच खींचतान देखने को मिली। त्योहारों के सीजन में कीमतें बढ़ने की उम्मीद में व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में चीनी को स्टोर किया था, लेकिन उपभोक्ता मांग कमजोर रहने से उनकी यह रणनीति उलटी पड़ गई। मिलें 7 सितंबर तक अनिवार्य रूप से बेचे जाने वाले 40 प्रतिशत स्टॉक को भी नहीं बेच पा रही हैं, क्योंकि वे कीमतें कम करने को तैयार नहीं हैं।

चेन्नई के एक चीनी व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि कुछ मिलों ने इस मौके का फायदा उठाकर कीमतों में करीब 2% तक बढ़ोतरी कर दी है। उनका कहना है कि मिलें अपनी मनमर्जी कर रही हैं, जबकि व्यापारी दबाव में हैं। बता दें नई व्यवस्था के तहत मिलों को पहले सप्ताह के अंत तक आवंटित कोटे का 40 प्रतिशत और शेष मात्रा दूसरे सप्ताह में बेचना होता है।

वाहनों की कमी बनी नई चुनौती

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मिलों ने भले ही दरें ऊंची रखी हों, लेकिन लॉजिस्टिक्स की समस्या ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। सरकार की ओर से जारी पहले पखवाड़े के लिए आवंटित चीनी उठाने की समयसीमा में सिर्फ 2 दिन शेष बचे हैं, लेकिन ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों की भारी कमी हो गई है।

मिलें नहीं घटा रहीं चीनी का दाम

मीडिया के सूत्रों का कहना है कि मिलें चीनी बेच नहीं पा रही हैं, लेकिन कीमतें घटाने को भी तैयार नहीं हैं। हालांकि उन्होंने दरें खुली रखी हैं, जिसका मतलब है कि दबाव बढ़ने पर वे कीमतों में कटौती कर सकती हैं। सोमवार को मिलों ने एस-30 ग्रेड चीनी की कीमत करीब ₹4,500 प्रति क्विंटल बताई। वहीं थोक बाजार में कीमतें ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल तक गिरीं और मुंबई में चीनी का भाव घटकर ₹4,850 प्रति क्विंटल रह गया।

गलत साबित हुआ व्यापारियों का दांव

उद्योग सूत्रों के अनुसार, त्योहारों से पहले व्यापारियों ने यह मानकर बड़ी मात्रा में चीनी खरीदी थी कि कीमतें और बढ़ेंगी। लेकिन उपभोक्ता मांग कमजोर रहने और अपेक्षित त्योहारी मांग नहीं आने से उनका यह दांव गलत साबित हुआ।

अब व्यापारी ऊंची कीमतों पर खरीदे गए स्टॉक के साथ फंसे हुए हैं और नुकसान की आशंका से जूझ रहे हैं। नुकसान की भरपाई के लिए वे कम कीमतों पर नई खरीदारी कर रहे हैं।

इसी बीच साप्ताहिक बिक्री लक्ष्य पूरा करने की डेडलाइन विवाद का केंद्र बन गई है। व्यापारियों द्वारा स्टॉक नहीं उठाने और कीमतों में गिरावट के कारण कई मिलों ने टेंडर प्रणाली छोड़कर खुले बाजार में बिक्री शुरू कर दी है ताकि सीधे खरीदारों को आकर्षित किया जा सके। हालांकि यह रणनीति भी सफल नहीं रही क्योंकि मिलें कीमतों में बड़ी कटौती स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि स्थिति नहीं बदली तो अनिवार्य 40 प्रतिशत बिक्री लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा।

ग्लोबल मार्केट में भी दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। न्यूयॉर्क स्थित इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले कच्ची चीनी वायदा कॉन्ट्रैक्ट 18.07 सेंट प्रति पाउंड पर आ गए, जबकि स्पॉट कीमत 18.02 सेंट प्रति पाउंड रही। वहीं लंदन में अक्टूबर डिलीवरी के लिए सफेद चीनी का भाव 523.90 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया।

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि मिलें कीमतों में कुछ कटौती नहीं करतीं तो उन्हें न केवल बिक्री टार्गेट पूरा करने का जोखिम रहेगा, बल्कि वर्किंग कैपिटल पर भी दबाव बढ़ने और नियामकीय कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।