सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UK से आई भारत के लिए खुशखबरी! CCTS को दी मान्यता, किसे होगा फायदा? अब यूरोपीय संघ पर भी टिकी निगाहें

Published: Tue, 08 Sep 2026 03:12 PM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 03:18 PM (IST)

ब्रिटेन ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को मान्यता दी है, जिससे भारतीय निर्यातकों को दोहरे कार्बन कराधान ...और पढ़ें

ब्रिटेन ने CCTS को दी मान्यता

ब्रिटेन ने CCTS को दी मान्यता

HighLights

  1. ब्रिटेन ने भारत की CCTS को दी मान्यता।

  2. भारतीय निर्यातकों को दोहरे कार्बन कराधान से मिलेगी मुक्ति।

  3. यूरोपीय संघ से भी ऐसी ही मान्यता की उम्मीद।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत और ब्रिटेन के बीच 15 जुलाई से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हुआ है। जिससे भारतीय प्रोडक्ट्स को वहां के बाजारों में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिला है। अब भारतीय निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। UK ने भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को मान्यता दे दी है। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को दोहरे कार्बन कराधान (Double Taxation) से बचने में मदद मिलेगी और ब्रिटेन के साथ व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय निर्यातकों को राहत

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटेन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के दायरे में आने वाले भारतीय उत्पादों पर लागू कार्बन कीमत को अब ब्रिटिश इंपोर्टर्स मान्यता दे सकेंगे। इससे ब्रिटेन में इंपोर्ट किए जाने वाले भारतीय सामानों पर CBAM के तहत दी जाने वाली एकस्ट्रा ड्यूटी कम होगी। इस फैसले का सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला दोनों देशों के बीच भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के डिजाइन और इंप्लीमेंट को लेकर लंबे समय से चल रही तकनीकी स्तर की बातचीत का परिणाम है।

ब्रिटेन की पहल से EU पर निगाहें 

UK CBAM 1 जनवरी, 2027 से लागू होने वाला है। इसके तहत एल्युमीनियम, सीमेंट, फर्टिलाइज़र, हाइड्रोजन और आयरन-स्टील जैसे खास सामानों के इंपोर्ट में होने वाले कार्बन उत्सर्जन पर कार्बन की कीमत लगाई जाएगी। अधिकारी के मुताबिक, आगे भी कार्बन मार्केट के डिजाइन और उसे लागू करने के मामले में UK-इंडिया एनर्जी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग और पार्टनरशिप फॉर मार्केट इम्प्लीमेंटेशन के जरिए सहयोग जारी रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन की यह मान्यता भारत के लिए यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी इसी तरह की व्यवस्था हासिल करने की दिशा में मददगार साबित हो सकती है। भारत पहले से ही यूरोपीय संघ से अपने कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्र को मान्यता देने की मांग करता रहा है।

16 कार्बन प्राइसिंग सिस्टम को मान्यता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन वर्तमान में दुनिया की 16 कार्बन प्राइसिंग सिस्टम को मान्यता देता है। इनमें यूरोपीय संघ का ETS, चीन का राष्ट्रीय ETS, भारत की CCTS, दक्षिण कोरिया का K-ETS, जापान का GX-ETS और ऑस्ट्रेलिया का सेफगार्ड मैकेनिज्म शामिल हैं। इसके अलावा कनाडा, चिली, कजाकिस्तान, मोंटेनेग्रो, न्यूजीलैंड, सर्बिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड और ताइवान की सिस्टम्स भी इस सूची में शामिल हैं।

ये भी पढ़ें: यहां हो गई प्याज की भारी कमी! मांग से आधी हो रही सप्लाई, ₹20 प्रति किलो तक उछले दाम! मौजूदा कीमत कितनी?

आगे चलकर दोनों देशों के बीच कार्बन बाजार के डिजाइन और उसके क्रियान्वयन को लेकर सहयोग ब्रिटेन-भारत ऊर्जा समझौता (Energy MoU) और पार्टनरशिप फॉर मार्केट इम्प्लीमेंटेशन के तहत जारी रहेगा।