PM Modi क्यों चाहते हैं कि भारतीय ना खरीदें सोना, ना ही विदेशों में करें डेस्टिनेशन वेडिंग? 3 पॉइंट्स में पूरा गणित!
PM Modi Gold Appeal: प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से गैर-जरूरी सोना खरीदने, विदेश यात्रा और विदेशों में शादी करने से ...और पढ़ें
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PM Modi ने क्यों की सोना न खरीदने और विदेश में शादी न करने की अपील?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारतीयों से अपील की है कि अगर बहुत जरूरी न हो तो सोना खरीदने (PM Modi gold appeal) से बचें। गैर-जरूरी विदेश यात्राएं न करें और शादियां भारत में ही करने पर विचार करें। यह पिछले 4 महीनों में दूसरी बार है जब पीएम मोदी ने ऐसी अपील की है। पीएम मोदी ने यह अपील किर्गिस्तान की राजधानी और सबसे बड़े शहर बिश्केक से वीडियो मैसेज के जरिए की थी।
इससे ठीक एक दिन पहले ही आधिकारिक आंकड़े आए थे, जिनमें बताया गया था कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी है। यह ग्रोथ उम्मीदों से बेहतर रही है और इसने भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बरकरार रखा है।
अब सवाल यह है कि जब मजबूत जीडीपी के बाद भी पीएम मोदी आपका विदेशी खर्च क्यों रोक रहे हैं? इन सब सवालों के जवाब दिए सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने।
पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि भारतीय कम सोना खरीदें?
अनुज गुप्ता ने बताया कि भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए काफी हद तक इंपोर्टेड गोल्ड पर निर्भर है। कच्चे तेल के बाद सोना देश में सबसे ज्यादा इंपोर्ट होने वाली चीजों में से एक है। इसलिए, सोने की मांग में हर उछाल का सीधा मतलब है- विदेशी मुद्रा यानी फॉरेन एक्सचेंज का ज्यादा खर्च होना। यह व्यापार घाटे यानी ट्रेड डेफिसिट (gold imports trade deficit India) को बढ़ा सकता है, और जब डॉलर की मांग पहले से ही ज्यादा हो, तो इससे रुपए पर दबाव पड़ता है।
इस साल सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सोने का आयात एक साल पहले की तुलना में 32% से ज्यादा बढ़ गया है। जुलाई में भारत का व्यापार घाटा भी बढ़कर लगभग 32 अरब डॉलर हो गया, जो जनवरी के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है।
यह मुद्दा इसलिए भी खास है, क्योंकि भारत में सोने की ज्यादातर मांग किसी प्रोडक्टिव निवेश के बजाय घरेलू बचत, शादियों, त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं की वजह से होती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदार है, इसलिए ग्राहकों की मांग में आया थोड़ा सा भी बदलाव इंपोर्ट बिल पर बड़ा असर डाल सकता है।"
विदेश यात्रा क्यों मायने रखती है?
पीएम मोदी की यह अपील सिर्फ भौतिक चीजों तक सीमित नहीं है। जब भारतीय विदेश यात्रा करते हैं, तो होटल, रेस्तरां, ट्रांसपोर्ट और मनोरंजन पर उनके खर्च का सीधा फायदा भारत के बाहर के बिजनेसेज को मिलता है। विदेशों में होने वाली शादियों यानी डेस्टिनेशन वेडिंग से तो और भी ज्यादा पैसा बाहर जाता है, क्योंकि इसमें वेन्यू, रहने, खाने-पीने और यात्रा पर भारी खर्च होता है। इसलिए प्रधानमंत्री ग्राहकों से कह रहे हैं कि वे अपने इन गैर-जरूरी खर्चों का कुछ हिस्सा घरेलू अर्थव्यवस्था की तरफ मोड़ें। पीएम मोदी ने कहा,
"अगर आप छुट्टी पर जाते हैं, तो भारत में ही किसी जगह पर जाएं। वेडिंग डेस्टिनेशन भारत में हो सकते हैं। हमें 'वेड इन इंडिया' के मंत्र को जीना चाहिए।"
इसके पीछे बड़ा तर्क यह है कि भारत में छुट्टियों या शादी पर खर्च किया गया पैसा विदेशी मुद्रा को देश से बाहर जाने देने के बजाय घरेलू कारोबारियों और नौकरियों को सपोर्ट करता है।
मजबूत जीडीपी ग्रोथ के बावजूद यह क्यों जरूरी है?
जून तिमाही में दर्ज की गई 7.8% की ग्रोथ देश की आर्थिक मजबूती का संकेत है, लेकिन यह भारत को बाहरी झटकों के जोखिम से पूरी तरह नहीं बचाती। भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहती है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की अनिश्चितता ने ऊर्जा बाजारों में आगे भी बाधाओं का खतरा बनाए रखा है।
तेल का बिल ज्यादा होने का मतलब है कि भारत को जरूरी चीजों के आयात का भुगतान करने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा (Dollar) चाहिए। ऐसे समय में अगर सोने की मांग भी तेज रहती है, तो यह दबाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है।
