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$120 के पार जाएगा क्रूड? US-Iran के बीच भयंकर तनातनी से Crude Oil Price में लगी आग, भारत पर क्या पड़ेगा असर

Published: Wed, 02 Sep 2026 02:44 PM (IST)

Crude Oil Price Tpday: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल ...और पढ़ें

US-Iran के बीच भयंकर तनातनी से Crude Oil Price में लगी आग

 US-Iran के बीच भयंकर तनातनी से Crude Oil Price में लगी आग

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अमेरिका और ईरान के बीच भड़के सैन्य टकराव (us iran war news) ने कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। ग्लोबल सप्लाई रुकने के डर से बुधवार को एशियाई बाजारों में कच्चे तेल के दाम 2% से ज्यादा उछल गए। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.94% चढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल (crude oil price today) के पार निकल गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड यानी डब्ल्यूटीआई (WTI) 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है।

हमले और पलटवार से क्यों घबराया बाजार?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर यह कहते हुए स्ट्राइक की है कि, "उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (strait of hormuz news) में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।" इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले का दावा किया है।

फरवरी के आखिर से चल रहे इस पश्चिम एशियाई संघर्ष ने होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है। दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा सप्लाई इसी रास्ते से होती है। IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने और सैन्य कार्रवाई की, तो वे इस रास्ते से तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रोक देंगे।

जवाबी हमलों पर क्या बोला डच थिंक टैंक?

नीदरलैंड्स की मल्टीनेशनल बैंकिंग कंपनी और थिंक टैंक आईएनजी ग्रुप (ING Group) के कमोडिटी स्ट्रैटेजिस्ट वॉरेन पैटरसन और इवा मैंथी का कहना है,

अब देखना यह है कि क्या दोनों तरफ से हमले और तेज होते हैं, और क्या शिपिंग कंपनियां होर्मुज से अपने जहाज गुजारने में हिचकिचाएंगी।"

"होर्मुज के पास स्थिति बहुत ही खराब..."

ग्लोबल फाइनेंशियल ग्रुप मित्सुबिशी UFJ (MUFG) के एनालिस्ट्स के मुताबिक, होर्मुज के पास शिपिंग के हालात अभी भी खराब हैं। ऐसे में क्रूड की कीमतों में रिस्क प्रीमियम बना रहेगा। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध का दबाव भी कीमतों पर है। बता दें कि साल 2025 में अमेरिका और सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड उत्पादक था।

इस तनाव ने महंगाई की चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार,

अब 66% ट्रेडर्स को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। पिछले हफ्ते यह अनुमान 40% था। बाजार की नजरें अब शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर हैं।

क्रूड के एक्शन का भारत पर क्या असर?

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड रिसर्च हेड अनिंद्या बनर्जी का कहना है कि मिडिल ईस्ट वॉर के चलते क्रूड 96 डॉलर के पार चला गया है। अगर अब क्रूड में उछाल आता है तो इसका भारत पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने इसके 4 बड़े फैक्टर्स भी समझाए।

  • क्रूड का एक्शन: क्रूड ऑयल $96.50 के करीब पहुंच गया है और यह इसकी लगातार तीसरी बड़ी तेजी है। यह एक के बाद एक हुई घटनाओं का नतीजा है। अमेरिका का लारख द्वीप पर हमला, जॉर्डन में अमेरिकी अड्डों पर ईरानी मिसाइलें, सोमवार को होर्मुज में दो टैंकरों पर हमला और फिर मंगलवार को ईरान के एयर डिफेंस पर अमेरिकी स्ट्राइक, जिसे अमेरिकी सेना ने अब खत्म घोषित कर दिया है।
  • सप्लाई की कमी: प्रोडक्ट्स की कीमतें भी फिजिकल शॉर्टेज की गवाही दे रही हैं। डीजल रिफाइनिंग मार्जिन 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, जो आमतौर पर $15-$25 होता है। अमेरिका में डीजल का स्टॉक अपने औसत से 14% कम है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं।
  • प्राइस टारगेट:वाशिंगटन ने अपनी तरफ से हमले खत्म मान लिए हैं, अगर ईरान की तरफ से कोई बड़ा तनाव नहीं भड़कता, तो तेल के दामों में थोड़ी नरमी आ सकती है। क्रूड के लिए रेजिस्टेंस $98 पर है, जबकि सपोर्ट $92 और मेजर सपोर्ट $90 पर है। $100-$102 का जोन सबसे बड़ी रुकावट है। अगर भाव $102 के पार निकला तो यह $120 या उससे ऊपर के बड़े टारगेट खोल देगा। लेकिन तब तक $102 एक लिमिट है।
  • रुपए की चाल: रुपए को 94.60-94.70 के स्तर पर बहुत मजबूत सपोर्ट हासिल है। इसे $729 बिलियन के रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार, 7.8% की मजबूत जीडीपी ग्रोथ और लगातार विदेशी निवेश का सहारा है। जब तक यह सपोर्ट कायम है, रुपया 94.70 और 95.40 के बीच ट्रेड करेगा। अगर यह 94.70 के नीचे बंद होता है, तो अगला बड़ा सपोर्ट 94 पर मिलेगा।

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