प्राइवेट कंपनियों ने खोला खजाना: अदाणी, टाटा, JSW सहित 6 बड़े ग्रुप के लाखों करोड़ के निवेश से इकोनॉमी पकड़ेगी रॉकेट की रफ्तार?
भारतीय अर्थव्यवस्था में निजी पूंजीगत व्यय का चक्र तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें अदाणी, टाटा जैसे बड़े समूह लाखों ...और पढ़ें

निजी कंपनियों का बड़ा निवेश: अदाणी, टाटा सहित दिग्गज समूह लाखों करोड़ रुपये लगाकर अर्थव्यवस्था को देंगे नई रफ्तार
HighLights
निजी पूंजीगत व्यय चक्र ने पकड़ी पूरी रफ्तार।
आरबीआई के अनुसार कॉर्पोरेट ऋण में 19.2% की वृद्धि।
अदाणी, टाटा सहित दिग्गजों का लाखों करोड़ का निवेश।
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी ही पॉजिटिव खबर सामने आ रही है। लंबे इंतजार के बाद देश में प्राइवेट सेक्टर का पूंजीगत व्यय (Private Capex) चक्र पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और डिजिटल जैसे क्षेत्रों में कंपनियां लाखों करोड़ रुपये के निवेश की योजनाएं पेश कर रही हैं।
RBI के आंकड़ों ने दी गवाही
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में औद्योगिक ऋण यानी कॉर्पोरेट क्रेडिट में 19.2% की शानदार सालाना बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले साल इसी अवधि में यह बढ़ोतरी महज 6.3% थी। यह उछाल बताता है कि कंपनियां अब बड़े विस्तार प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज लेने से पीछे नहीं हट रही हैं।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एमडी और सीईओ कल्याण कुमार के अनुसार, अब कंपनियां केवल पुराने एसेट्स के रखरखाव के लिए नहीं, बल्कि 'ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स' (नए सिरे से शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स) के लिए कर्ज मांग रही हैं। विशेष रूप से रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों में भारी मांग देखी जा रही है।
अदाणी और टाटा जैसे दिग्गजों की बड़ी योजनाएं
निवेश की इस रेस में अदाणी ग्रुप सबसे आगे () नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदाणी ग्रुप ने पावर, एयरपोर्ट और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की रूपरेखा तैयार की है। इसमें ओडिशा में 1.08 लाख करोड़ रुपये का एल्युमीनियम प्रोजेक्ट और मध्य प्रदेश में मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शामिल है।
ऑटो सेक्टर में भी निवेश की लहर है। टाटा मोटर्स (Tata Motors Capex Plan) ने वित्त वर्ष 2030 तक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 35,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा अगले तीन वर्षों में 27,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
प्रमुख कंपनियों के निवेश पर एक नजर
| क्र.सं. | कंपनी का नाम | निवेश राशि (अनुमानित) | मुख्य क्षेत्र (Key Sectors) |
| 1 | अडानी ग्रुप | ₹3 लाख करोड़+ | पावर, एयरपोर्ट, डिफेंस, रिन्यूएबल एनर्जी |
| 2 | JSW स्टील | ₹1.5 लाख करोड़+ | स्टील उत्पादन क्षमता विस्तार |
| 3 | टाटा मोटर्स | ₹35,000 करोड़ | पैसेंजर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) |
| 4 | महिंद्रा एंड महिंद्रा | ₹27,000 करोड़ | SUV और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) |
| 5 | ITC | ₹20,000 करोड़ | मैन्युफैक्चरिंग और फूड प्रोसेसिंग |
| 6 | मारुति सुजुकी | ₹14,000 करोड़ | उत्पादन क्षमता विस्तार |
क्यों अलग है यह निवेश चक्र?
बाजार विशेषज्ञों और ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान निवेश चक्र 2001-04 के दौर की याद दिलाता है, जिसके बाद भारत ने कई वर्षों तक तेज विकास देखा था। इस बार खास बात यह है कि कंपनियों की बैलेंस शीट पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।
वैलम कैपिटल के मनीष भंडारी के अनुसार, 'केपेक्स-टू-डेप्रिसिएशन' रेशियो 2x को पार कर गया है, जो यह बताता है कि निवेश अब केवल मशीनों की मरम्मत के लिए नहीं, बल्कि व्यापार के बड़े विस्तार के लिए हो रहा है।
