नेपाल सीमा से सटे बिहार के जिलों में फर्जी आधार-प्रमाण पत्र गिरोह का बड़ा खुलासा, 11 बदमाश गिरफ्तार; उपकरण बरामद
नेपाल सीमा से सटे बिहार के सीमावर्ती जिलों में फर्जी प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनाने वाले गिरोहों का पर्दाफाश हो रहा है। किशनगंज, अररिया, सुपौल में पु ...और पढ़ें
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एसपी संतोष कुमार

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अमरेंद्र कांत, किशनगंज। नेपाल सीमा से सटे कोसी व सीमांचल के जिलों में फर्जी प्रमाण पत्र व आधार कार्ड बनाने के चल रहे खेल का पुलिस लगातार पर्दाफाश कर रही है। किशनगंज, अररिया, सुपौल में चल रहे इस नेटवर्क के देश के अन्य राज्यों के लिंक को भी खंगाल लिया है। जबकि खगड़िया, कटिहार समेत अन्य जगहों से गिरफ्तारी भी की गई है।
इन गिरोह के सदस्य पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए किराना दुकान, फोटो स्टेट व मोबाइल दुकान की आड़ में फर्जीवाड़ा करते हैं। सिर्फ इस माह में इस गिरोह में शामिल 11 से अधिक बदमाशों की गिरफ्तारी की गई है। जबकि हजारों की संख्या में फर्जी कागजात, आधार कार्ड, मुहर व इलेक्ट्रोनिक उपकरण भी बरामद किये गये हैं।
इसी माह के दो अप्रैल को किशनगंज पुलिस ने एसटीएफ के सहयोग से टेढ़ागाछ थाना क्षेत्र के बुलआजागिर गांव में किराना दुकान की आड़ में चलाए जा रहे फर्जी प्रमाण पत्र व आधार कार्ड बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना मनोहर कुमार को गिरफ्तार किया गया था।
इस गिरोह का नेटवर्क बंगाल, यूपी तक रहने की बात सामने आई थी। इस दौरान चार सौ से अधिक लोगों का आधार कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद की गई थी। इसी के निशानदेही पर पुलिस ने खगड़िया में छापेमारी कर इस गिरोह के सक्रिय सदस्य कुंदन कुमार को खगड़िया से गिरफ्तार किया।
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आरोपी खगड़िया में मोबाइल दुकान की आड़ में फर्जी प्रमाण पत्र व आधार कार्ड बनाता था। इसी गिरोह के सदस्य साजिद रब्बानी को भी पुलिस ने पांच अप्रैल को गिरफ्तार किया।
आरोपी प्रिटिंग प्रेस की आड़ में क्लोन बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट बेचता था। जिसका इस्तेमाल इस गिरोह के सरगना मनोहर कुमार द्वारा साफ्टवेयर को आपरेट करने के लिए किया जाता था। जिले में इससे पहले भी ठाकुरगंज, जियापोखर समेत अन्य थाना क्षेत्रों से गिरफ्तारी हो चुकी है।
सुपौल व अररिया में भी हो चुकी है कार्रवाई
सुपौल में फर्जी आधार-पैन कार्ड बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश पुलिस ने नौ अप्रैल को किया था। इस गिरोह द्वारा फर्जी दस्तावेजों से आधार, पैन और सरकारी पहचान पत्र बनाया जाता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह नेटवर्क सिर्फ सुपौल तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में फैला था। मामले में बाबुल कुमार गुप्ता, मुकेश पासवान व मास्टरमाइंड सारण जिले के मकेर से पप्पू कुमार को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस की माने तो फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र एक खास वेबसाइट से बनाया जाता था। आधार के आफिशियल इसीएमपी साफ्टवेयर को हैक कर सीधे आधार जनरेट किया जाता था। डुप्लीकेट फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी कर लिया जाता था।
गिरोह द्वारा डोमिसाइल, जन्म प्रमाण पत्र भी फर्जी तरीके से बनाए जाते थे। पप्पू कुमार के नेटवर्क से जुड़े 12 सौ से अधिक यूजर अकाउंट मिले जो पश्चिम बंगाल, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब जैसे राज्यों में चल रहे थे।
इसी तरह अररिया जिला पुलिस ने भी पलासी थाना क्षेत्र के एक मोबाइल दुकान पर छापेमारी कर कर्नाटक व मध्य प्रदेश के आइडी बाइपास कर फर्जी आधार कार्ड बनाने के गिरोह का पर्दाफाश कर छह बदमाशों की गिरफ्तारी की थी।
फर्जी आधार-पैन का इस्तेमाल
- बैंक फ्राड में सिम कार्ड निकालने में फर्जीवाड़ा
- अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिक साबित करने में अहम
- अन्य संगठित अपराधों में इसका इस्तेमाल
- फर्जी बैंक खाता खुलवाने व फाड किये गये राशि को मंगाने में इस्तेमाल किया जाता था
क्या कहते हैं एसपी
किशनगंज के एसपी संतोष कुमार कहते हैं कि हाल के दिनों में अवैध घुसपैठियों को फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से भारतीय नागरिक साबित करने का कोई मामला सामने नहीं आया है। ऐसे गिरोह के सदस्य दूसरे राज्य में संचालित आधार कार्ड सेंटर के आइडी पासवर्ड लेकर, फर्जी तरीके से फिंगरप्रिंट का क्लोन बनाकर, बाइपास कर विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र बनाते हैं।
आधार कार्ड के लिए आवासीय बनाना आवश्यक है। जिस कारण इस गिरोह के लोग पहले आवासीय, जन्म प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनाते हैं और उसी से फर्जी आधार कार्ड तैयार करते हैं। एसपी ने कहा कि लोग आसानी से प्रमाण पत्र बनने व घर के नजदीक व खास प्रक्रिया से नहीं गुजरने में व्यतीत होने वाले समय से बचने के लिए गिरोह के चंगुल में फंसते हैं। जिन्हें फर्जी आधार कार्ड भी बनवा दिया जाता है।