Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    भागलपुर में विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से चमकी नाव चालकों की किस्मत, हर रोज 15 से 20 हजार की कमाई

    Updated: Mon, 11 May 2026 01:40 PM (IST)

    विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से गंगा पार के हजारों लोगों को नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे नाव चालकों की आमदनी में कई गुना बढ़ोतरी हुई ह ...और पढ़ें

    भागलपुर में विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से चमकी नाव चालकों की किस्मत (जागरण)

    भागलपुर में विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से चमकी नाव चालकों की किस्मत (जागरण)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से गंगा पार के हजारों लोगों की जिंदगी भले ही मुश्किलों में घिर गई हो, लेकिन नाव चालकों के लिए यह दौर रोजी-रोटी का बड़ा सहारा बन गया है। पहले जो नावें दूसरे घाटों और इलाकों में चलती थीं, वे अब विक्रमशिला सेतु क्षेत्र में सवारियों को ढोने में लगी हैं।

    पुल पर आवाजाही प्रभावित होने के बाद लोगों की निर्भरता पूरी तरह नावों पर बढ़ गई है। इसका असर यह हुआ कि नाव चालकों की आमदनी में अचानक कई गुना बढ़ोतरी हो गई है।

    नाव चालकों का कहना है कि पहले दिनभर मेहनत करने के बाद भी सीमित कमाई होती थी, लेकिन अब प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। हालांकि, इस कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च में भी चला जाता है।

    पेट्रोल, नाव चालक, मजदूर और रखरखाव पर प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद पहले की तुलना में उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।

    केवट, मंडल, यादव समेत अन्य जातियों के लोग करने लगे संचालन

    इस काम में अब केवल मल्लाह समाज का वर्चस्व नहीं रह गया है। यादव, मंडल, केवट समेत दूसरी जातियों के लोग भी तेजी से नाव संचालन के व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। गंगा किनारे रहने वाले कई परिवार अब नाव खरीदने की तैयारी कर रहे हैं।

    इस्माइलपुर के नाव संचालक राजू मंडल ने बताया कि पहले उनका नाव दूसरी जगह चलता था, अब बरारी पुल घाट से खुल रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह पांच से शाम पांच बजे तक लगातार आठ से 10 फेरे लगाए जाते हैं। हर एक फेरे में 40 लोग गंगा पार करते हैं।

    खबरें और भी

    प्रशासन ने प्रत्येक नाव की क्षमता भी निर्धारित कर रखी है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। बढ़ती भीड़ के कारण नाव चालकों को दिनभर व्यस्त रहना पड़ता है।

    अच्छी नाव तैयार कराने में छह से दस लाख का खर्च

    नाव संचालन से जुड़े लोगों का कहना है कि एक अच्छी नाव तैयार कराने में छह से दस लाख रुपये तक खर्च आता है। इसके बावजूद लोग इस व्यवसाय में निवेश कर रहे हैं, क्योंकि मौजूदा समय में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।

    नाव चालकों के लिए कमाई का बड़ा अवसर

    स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल टूटने से जहां आम लोगों की परेशानी बढ़ी है, वहीं नाव चालकों के लिए यह समय कमाई का बड़ा अवसर बन गया है। हालांकि लोगों की चिंता यह भी है कि जब तक पुल पूरी तरह दुरुस्त नहीं होता, तब तक गंगा पार करने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बना रहेगा।

    यह भी पढ़ें- विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण में एमइएस, बीआरओ, IIT और मुंबई की कंपनी करेंगे काम, रूपरेखा तय

    यह भी पढ़ें- विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर जल्द बन रहा बेली ब्रिज, राउरकेला से स्टील पहुंचा, हल्के वाहन चल सकेंगे